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बाप के कंधे पर बेटे की मौत, मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल पर गिरी गाज

News18India
Updated: August 30, 2016, 11:32 PM IST

आखिर देश या राज्य का सिस्टम किसके लिए होता है, क्या सिर्फ मंत्रियों के लिए, या फिर सिर्फ सांसदों या विधायकों के लिए? या फिर उसकी जनता के लिए।

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  • Last Updated: August 30, 2016, 11:32 PM IST
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नई दिल्ली। आखिर देश या राज्य का सिस्टम किसके लिए होता है, क्या सिर्फ मंत्रियों के लिए, या फिर सिर्फ सांसदों या विधायकों के लिए? या फिर उसकी जनता के लिए। हकीकत ये है कि हमारे देश का सिस्टम तब जागता है जब कोई मंत्री या सांसद या विधायक या अभिनेता या जाना माना इंसान बीमार पड़ता है।

उसकी आवभगत में डॉक्टर और नर्स लग जाते हैं। लेकिन अगर गलती से भी गरीब आम जनता बीमार पड़े तो उसकी पूछ कहीं नहीं होती। कुछ दिन पहले आपने देखा था उड़ीसा के कालाहांडी को, जहां एक अस्पताल में पत्नी की मौत के बाद कोई गाड़ी न मिलने पर उसका बेबस पति पत्नी के शव को कंधे पर उठा कर चल पड़ा।

ऐसा ही एक मामला उत्त प्रदेश के कानपुर में सामने आया है। जहां एक बेबस पिता अपने बीमार बेटे को कंधे पर लाद कर डॉक्टर को दिखाने के लिए भागता रहा। लेकिन न इलाज मिल सका न और वक्त। पिता के कंधे पर पड़े 12 साल के अंश ने पिता के कंधे पर ही दम तोड़ दिया। अंश ने तेज बुखार के चलते दम तोड़ दिया।

पिता का नाम अनिल है, अनिल का कहना है कि कानपुर के सरकारी हैलट अस्पताल की इमरजेंसी में वो यूं ही बेटे को कंधे में या हाथों मे उठाए आधे घंटे तक दौड़ता रहा  डॉक्टर इधर से उधर दौड़ाते रहे  उसे कहा गया कि बाल रोग विभाग जाओ  12 साल के बेटे को उठाए उठाए थक चुके अनिल ने कोई स्ट्रेचर तलाशा  कोई बिस्तर तलाशा  लेकिन कुछ न मिला।

अनिल ने फिर अपने अंश को पुचकारने, उसे जगाने उससे बात करने की कोशिश की  लेकिन बदन में कोई हरकत न हुई  अनिल रुआंसा हो गया  वो फिर दौड़ा बाल रोग विभाग की ओर  डॉक्टरों और नर्सों से घिरे एक अस्पताल में इतना बेबस आदमी शायद ही आपने कभी देखा हो।  कहा जा रहा है कि अनिल को बाल रोग विभाग में फिर आधा घंटा इंतजार करना पड़ा  जब तक अंश का नंबर आया  वो दम तोड़ चुका था। दूसरे अस्पताल के डॉक्टर बोले  20 मिनट पहले आते तो अंश बच जाता, अब सवाल ये उठ रहा है कि इन बीस मिनटों का गुनहगार कौन है।

इलाज में देरी उत्तर प्रदेश के लिए नई बात नहीं है  लेकिन एक बाप का यूं बेटे को कंधे पर लेकर दौड़ना  और डॉक्टरों का उसे दूसरे विभाग में टरकाना और फिर उस बाप का दूसरे विभाग की ओर दौड़ना और इसी दौड़ में बच्चे का दम तोड़ जाना  फिर भी बाप का दौड़ते रहना ये देखकर कोई भी सभ्य समाज शर्मसार हो जाए। फिलहाल इस पूरी घटना के बाद देर शाम को मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल सस्पेंड कर दिया गया है।

 

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First published: August 30, 2016, 11:26 PM IST
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