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अब डायनासोर के रहस्य से पर्दा उठाने में मदद करेगा भारत, क्योंकि...!

Bhawani Singh | News18India
Updated: April 28, 2016, 10:33 PM IST

दानव जैसे डायनासोर जीव लाखों साल पहले दुनिया से लुप्त हो गए थे, लेकिन डायनासोरों के जीवों के छोड़े हुए निशान अब भी मिला करते हैं।

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  • Last Updated: April 28, 2016, 10:33 PM IST
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नई दिल्ली। दानव जैसे डायनासोर जीव लाखों साल पहले दुनिया से लुप्त हो गए थे, लेकिन डायनासोरों के जीवों के छोड़े हुए निशान अब भी मिला करते हैं।  ये निशान धरती के अलग-अलग हिस्सों में फैले हुए हैं। डायनासोरों के रहस्यमयी निशानों का एक छोर अब राजस्थान में मिला है।

दरअसल, राजस्थान के जैसलमेर से 16 किलोमीटर दूर थयात गांव की ये पहाड़ियां रेती नहीं पथरीली हैं। वैज्ञानिको की टीमें दो साल से इन पहाड़ियों की खाक छान रही है। इन्हीं पहाड़ियों में वैज्ञानिकों को जनवरी 2014 और जनवरी 2016 में डायनासोर के जीवाष्म मिले हैं। पहाड़ी पर अभी भी बिल्कुल साफ दिखाई दे रहे पंजों के साढे पांच सेंटीमीटर लंबे इन निशानों को वैज्ञानिक डायनासोर के मान रहे है। इसे ग्रालेटर नाम दिया गया है। पहाड़ी पर कुछ ही दूरी पर दूसरी तरह के पंजों के 35 सेंटीमेंटर लंबे निशान मिले हैं। इन्हें यूरोन्टेस नाम दिया गया है। यहीं पर डायनासोर की जांघ की हड्डियों के जीवाष्म कुछ ही दिन पहले एक वैज्ञानिक को मिले थे।

जैसलमेर के भू जल विभाग के भू वैज्ञानिक एन जी इनकिया का कहना है कि यूरोपियन यूनियन की टीम आई थी। उनकी स्टडी के दौरान एक्सपोज हुआ कि डायनासोर रहते, दो फुट प्रिंट मिला था। मूर्गी के पांव जैसा फुट प्रिंट मिला। जुरासिक पिरियिड के दौरान जितनी उथल-पुथल हुई थी। जैसलमेर की जियोलिजी जुरासिक पिरियिड की है। मेराईन फोसिल्स है। कोटिंवेंटल इनवायरमेट था। डायनासोर इसमें रहते थे।

वैज्ञानिकों ने जैसलमेर में मिले डायनासोर के इन जीवाष्म को लेकर लंबी पड़ताल की। जांच में आया कि छोटे आकार के पंजों के निशान वाले डायनासोर करीब एक मीटर लंबे थे। 35 सेंटीमीटर लंबे पंजों के निशान वाले डायनासोर करीब छह मीटर लंबे थे। इन खतरनाक डायनासोरों के दांत शेर से भी तीनगुना बड़े थे। दोनों ही तरह के ये डायनासोर मांसाहारी थे।

जर्मनी शोधार्थी मैथ्यू के मुताबिक डायनोसोर के फुट प्रिंट मिले। इससे साफ होता है कि जुरासिक समय के डायनोसोर थे। इससे साबित होता है कि इस इलाके में डायनोसोर रहते थे। तो वहीं जैसलमेर में मिले जीवाष्म का अध्ययन कर रही वैज्ञानिकों की टीम ने रिसर्च में पाया कि ये करीब 15 करोड़ वर्ष पुराने जुरासिक काल के डायनासोर के अवशेष हैं। डायनासोर की ये दोनों की प्रजातियां जयवायु परिवर्तन की वजह से खत्म हो गई थीं।

सोचिए, जिस जगह पर आज आपको हर जगह रेत दिखाई दे रही है। वहां कभी समंदर हुआ करता था। जैसलमेर की ये छोटी-छोटी चट्टानें इस बात की भी पुष्टि करती हैं। इन्हीं चट्टानों ने लाखों साल से एक ऐसा रहस्य खुद में समेट कर रखा था। जो कभी सामने नहीं आया। अब इस रहस्य के उजागर होने के बाद भारत डायनासोर से जुड़ी रिसर्च में एक अहम भूमिका निभा सकता है।

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First published: April 28, 2016, 10:24 PM IST
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