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मुद्दा: 'आप' में आर-पार की जंग, खिंची तलवारें?

मुद्दा: 'आप' में आर-पार की जंग, खिंची तलवारें?

आम आदमी पार्टी की नेशनल एक्जीक्यूटिव की 28 मार्च को होने वाली बैठक से पहले दोनों खेमे में तलवारें खिंच चुकी हैं।

    नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी की नेशनल एक्जीक्यूटिव की 28 मार्च को होने वाली बैठक से पहले दोनों खेमे में तलवारें खिंच चुकी हैं। ऊपर से दोनों खेमे के नेता सुलह की कोशिश करते नजर आ रहे हैं। लेकिन दरअसल पर्दे के पीछे एक अलग ही खेल चल रहा है। दोनों खेमे अपने को मजबूत करने में लगे हैं। सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि अब आर या पार की लड़ाई का दौर शुरू हो चुका है।

    करीब तीन साल पुरानी आम आदमी पार्टी में मचे घमासान में अब सुलह की कोई संभवाना बची नहीं हैं। 28 तारीख को नेशनल काउंसिल की बैठक के पहले अरविंद खेमे के नेता और प्रशांत, योगेंद्र अपनी अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं। पार्टी के संविधान के मुताबिक राष्ट्रीय संयोजक ही नेशनल काउंसिल की मीटिंग की अध्यक्षता करता है। अगर वो मौजूद नहीं है तो उसकी जगह कोई और अध्यक्षता कर सकता है।

    सूत्रों के मुताबिक यह लगभग तय हो चुका है कि प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव को पार्टी से बाहर निकाला जाएगा। सूत्रों का दावा है कि नेशनल काउंसिल की बैठक में पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी का कोई सदस्य एक लाइन का प्रस्ताव रखेगा जिसमें ये कहा जाएगा कि अगर प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव पार्टी में रहते हैं तो अरविंद केजरीवाल राष्ट्रीय संयोजक के तौर पर काम नहीं कर पाएंगें।

    हालांकि पार्टी के नेता इस बारे में खुलकर कुछ बोलने से कतरा रहे हैं। लेकिन ये मान रहे हैं कि समझाने की कोशिश की जा रही है। आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह से जब पूछा गया कि क्या प्रशांत और योगेंद्र के साथ सलह का बात हो रही है, तब संजय सिंह ने जवाब देते हुए कहा कि मैंने तो बहुत कोशिश की, हफ्ते- दस दिन लगे रहे, हर प्रयास किया। आज भी उसी प्रयास में हूं। इसका हल निकल जाए तो अच्छा है।

    दरअसल जब पार्टी का गठन हुआ था तब इसके नेशनल कांउसिल में करीब साढे तीन सौ सदस्य बनाए गए थे। उस वक्त पार्टी की विचारधारा को मानने वाले अलग अलग क्षेत्र के लोग इसके सदस्य बने थे। इस वजह से दोनों खेमे के लोग इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं हैं कि वहां कौन जीतेगा। वहां अगर जरूरत पड़ती है तो वोटिंग भी करवाई जा सकती है। इसकी संभावना के लिए ही इस तरह की बातें सामने आ रही हैं कि नेशनल काउंसिल के सदस्यों को एक दिन पहले दिल्ली बुलाने की कोशिश की जा रही है। सोशल मीडिया पर तो ये बात दो तीन दिनों से चल रही है।

    हालांकि शांति भूषण ने इस बात से इंकार किया है कि उनके इशारे पर किसी को दिल्ली बुलाने के लिए फोन किया है या इस तरह की कोशिश हो रही है। इस बीच पार्टी के आंतरिक लोकपाल पूर्व एडमिरल रामदास दिल्ली आए हैं और माना जा रहा है कि देर शाम तक वो अरविंद केजरीवाल से मुलाकात कर सकते हैं। इस मुलाकात का कोई नतीजा निकलेगा इसकी उम्मीद कम ही है क्योंकि दोनों खेमों में बात इतनी आगे बढ़ चुकी है कि वहां से वापस लौटना बहुत मुश्किल है। और पार्टी में बिखराव तय है।

    आम आदमी पार्टी में बढ़ते घमासान पर चर्चा के लिए स्टूडियो में मौजूद हैं अवाम के संस्थापक करण सिंह, कांग्रेस प्रवक्ता आलोक शर्मा, दिल्ली से बीजेपी प्रवक्ता अनिल बलूनी और ‘आप’ के प्रवक्ता दिलीप पांडे, साथ ही चंडीगढ़ से ‘आप’ के प्रवक्ता राजीव गोदारा भी जुड़े हुए हैं। (चर्चा के लिए वीडियो देखें)

    Tags: Aam aadmi party, Arvind kejriwal, Prashant bhushan, Yogendra yadav

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