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'आप' के फाइनल 'गेम' का क्या होगा परिणाम?

'आप' के फाइनल 'गेम' का क्या होगा परिणाम?

स्वराज, आरटीआई, पारदर्शिता और जन भागीदारी की माला जप-जप कर जो पार्टी दिल्ली में सत्ता के शिखर तक पहुंच गई, अब इन्हीं मुद्दों पर पार्टी के अपने ही अंदर-बाहर से घेरने लगे हैं।

    नई दिल्ली। राष्ट्रीय परिषद की बैठक से एक दिन पहले जब प्रशांत-योगेंद्र गुट मीडिया से मुखातिब हुआ तो पर्दे के भीतर के ढके-छुपे कई सच सामने आ गए। जिस चिट्ठी को दोनों नेताओं का इस्तीफा बताया जा रहा था, वो कुछ और निकला। हालांकि पार्टी में इन दो नेताओं के भविष्य पर फैसला कल होगा, लेकिन पार्टी जिस संकट से गुजर रही है और इतने कम वक्त में उसके विचारों में जो भटकाव आया है, वो तो सतह पर आ ही गया है।

    प्रशांत-योगेंद्र ने कह दिया कि उन्हें नहीं चाहिए संयोजक के पद से केजरीवाल का इस्तीफा, लेकिन पार्टी को अगर उनका इस्तीफा चाहिए तो कुछ मांगें मान लें, तो हम इस्तीफा के लिए तैयार हैं। स्वराज, आरटीआई, पारदर्शिता और जन भागीदारी की माला जप-जप कर जो पार्टी दिल्ली में सत्ता के शिखर तक पहुंच गई, अब इन्हीं मुद्दों पर पार्टी के अपने ही अंदर-बाहर से घेरने लगे हैं। और सबसे गंभीर आरोप पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर लगे हैं। आरोप ये कि वो तानाशाह हैं!

    दबी जुबान में लगने वाले आरोप खुले-आम, मीडिया को बुलाकर और लगाने वाले कौन जिन्होंने पार्टी की बुनियाद रखी, संविधान तैयार किया, चंदा देकर खड़ा किया और केजरीवाल के कंधे से कंधा मिलाकर अच्छा-खासा फासला तय किया।

    पार्टी के भीतर की किचकिच जब सतह पर आई तो अंदर की कमियां तह हटा-हटा कर गिनाई जाने लगीं। लोकपाल की बैठक के दौरान जो केजरीवाल बाहर निकल कर बैठक की रिकॉर्डिंग की मांग करते नहीं थकते थे, उन्हीं पर शनिवार को होने वाली राष्ट्रीय परिषद की बैठक में मोबाइल फोन पर पाबंदी के आरोप लग रहे हैं।

    प्रशांत भूषण ने राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों से कहा गया है कि उन्हें फोन भी भीतर लेकर जाने की इजाजत नहीं मिलेगी, यह गलत है और हम मांग करते हैं कि बैठक की रिकॉर्डिंग कराई जाए। साफ है, इस गुट को राष्ट्रीय परिषद की बैठक में गड़बड़ी का अंदेशा है। इसी बैठक में योगेंद्र और प्रशांत को राष्ट्रीय कार्यकारिणी से बाहर किया जाना है।

    मीडिया के सामने केजरीवाल एंड कंपनी पर आरोपों की झड़ी लगाने के लिए प्रशांत, योगेंद्र और प्रो आनंद कुमार की त्रिमूर्ति थी। तीनों ने तथ्यों और तर्कों के जरिए विरोधी गुट पर जबरदस्त हमले किए। योगेंद्र गुट ने दावा किया कि उनकी मांगों की चिट्ठी को इस्तीफा प्रचारित किया गया। उनकी हर मांग को केजरीवाल के इस्तीफे से जोड़ा गया जबकि उन्होंने कभी संयोजक के पद से केजरीवाल का इस्तीफा नहीं मांगा। उन्हें कहा गया कि अरविंद उनके साथ काम नहीं कर सकते।

    योगेंद्र यादव ने पार्टी को बुनियादी उसूलों की याद दिलाई और कुछ सवाल खड़े किए। उन्होंने स्वराज, स्वायत्तता, आंतरिक लोकपाल और आंतरिक लोकतंत्र के मुद्दे फिर से उठाए। एएपी नेता योगेंद्र यादव के मुताबिक मूल मुद्दा यह था कि जो स्वराज हम आपके सामने लाना चाहते हैं वो इस पार्टी में है कि नहीं। हमने राज्यों की स्वायतत्ता के सवाल उठाए।

    एक तरफ पीएसी से निकाले जा चुके दो नेताओं का गुट मीडिया से बात कर रहा था तो उसी दौरान दूसरा गुट सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर जवाबी हमले कर रहा था। दोनों को पार्टी से निकालने के दावों से लेकर नौबत यहां तक आ गई कि स्वराज की अपनी-अपनी परिभाषाएं गढ़ी जाने लगीं।

    एएपी नेता कुमार विश्वास के मुताबिक स्वराज की अपनी-अपनी परिभाषा है। एक परिवार के तीन लोग बैठ जाएं तो स्वराज है, और अब केजरीवाल को हटाना है। एएपी विधायक कपिल शर्मा के मुताबिक कोई असमंजस नहीं है, मैंने सभी विधायकों के साइन कराए हैं कल बैठक मे योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण को पार्टी से बाहर जाना चाहिए। प्रशांत-योगेंद्र की प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडियो को एक स्टिंग ऑपरेशन के जारी होने का इंतजार था। लेकिन ऐसा हुआ नहीं।

    योगेंद्र गुट एक महीने के उथल-पुथल को आंदोलन की आत्मा को बचाए रखने का संघर्ष बता रहा है तो दूसरा गुट पार्टी के लिए इन्हें बोझ मानने लगा है। इन दो गुटों की लड़ाई में एक चीज साफ होती जा रहा है कि दिल्ली के सत्ता पर काबिज दूसरे सियासी दलों से अलग नहीं।
    आम आदमी पार्टी का फाइनल गेम इस मुद्दे पर बात करने के लिए आईबीएन7 पर आम आदमी पार्टी के नेता कमल मित्रा चिनाय, बीजेपी नेता ऐजाज इल्मी और कांग्रेस नेता आलोक शर्मा मौजूद थे। इसके अलावा दिल्ली से विक्रांत यादव भी जुड़े। चर्चा देखने के वीडियो देखें।

    Tags: AAP, Anand Kumar, Arvind kejriwal, Prashant bhushan, Yogendra yadav

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