मुंबई में 4 बियर की बोतलों ने हत्यारों को पहुंचाया सलाखों के पीछे

मुंबई क्राइम ब्रांच ने एक मासूम बच्चे की हत्या का केस सुलझाने का दावा किया है।

  • News18India
  • Last Updated: January 21, 2016, 12:09 AM IST
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मुंबई। मुंबई क्राइम ब्रांच ने एक मासूम बच्चे की हत्या का केस सुलझाने का दावा किया है। 7 साल के बच्चे को पिछले साल अक्टूबर में अगवा किया गया था और उसका शारीरिक शोषण करने के बाद हत्या कर दी थी, लेकिन क्राइम ब्रांच के सामने मुश्किल ये थी कि उसके पास सुराग के नाम पर सिर्फ 4 बोतलें ही थीं।

दो महीने पहले अगवा हुए एक 7 साल के मासूम की लाश जिस हालत में इस फ्लाईओवर के एक होल से मिली थी। उससे इतना तो साफ था कि बच्चे की हत्या हुई है और उससे पहले उसका शारीरिक शोषण किया गया था। ये फ्लाईओवर ईस्टर्न हाईवे पर है जो कि दिन रात चलता है। ऐसे में पुलिस के लिए सबसे मुश्किल ये थी कि आखिर हत्यारों तक कैसे पहुंचा जाए, क्योंकि काफी जांच पड़ताल के बाद भी पुलिस सिर्फ मासूम बच्चे के बारे में पता लगा पाई थी और कातिलों ने सबूत के तौर पर चार बियर की बोतलें छोड़ीं थी।

मामले की जांच को मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंपा गया। कई दिनों की जांच के बाद क्राइम ब्रांच को सिर्फ इतना पता चला कि बच्चे का नाम फुर्कान है और उसे वडाला इलाके से पिछले साल 13 अक्टूबर को अगवा किया गया था। लेकिन, सवाल यही था कि आखिर अपराधी कौन हैं? ऐसे में पुलिस ने 4 बियर की बोतल को लेकर ही जांच आगे बढ़ानी शुरू की।



पुलिस ने अपराधियों तक पहुंचने के लिए बियर की बोतलों के रजिस्ट्रेशन नंबर का सहारा लिया। इस रजिस्ट्रेशन नंबर के सहारे पुलिस उस दुकान तक पहुंची जहां से इसे बेचा गया था और फिर दुकान में लगे सीसीटीवी के सहारे पुलिस का शिकंजा अपराधियों तक जा पहुंचा।



डीसीपी धंनजय कुलकर्णी ने बताया कि क्राइम ब्रांच हमारे पास कुछ भी सुराग नहीं था, सिर्फ वीयर की बोतले थी। हमने बोतल के रजिस्ट्रेशन नंबर से सबसे पहले होल-सेल रिटेलर के पास पहुंचे। बाद में उस रिटेलर के पास पहुंचे, फिर हमने जांच की उस दुकान से हमेशा वीयर कौन-कौन खरिदता है। सबसे पहले हमने शक के आधार पर लोगों से पुछताछ शुरू की। यह चार आरोपी हमारे हाथ लगे।

ये हत्या का एक ब्लाइंड केस था, जिसमें सबूत के नाम पर कुछ नहीं था। मुंबई क्राइम ब्रांच के अधिकारियों का मानना है की इस मामले को सुलझाना काफी ज्यादा मुश्किल था, लेकिन कहते हैं न कि अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो कुछ न कुछ सुराग जरूर छोड़ जाता है।
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