मूवी रिव्यू : सुशांत की शानदार एक्टिंग और रोमांच से भरपूर है 'एम.एस.धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी'

News18India.com
Updated: October 1, 2016, 3:44 PM IST

‘एम एस धोनी द अनटोल्ड स्टोरी’ इंडिया के सबसे सक्सेस्फुल क्रिकेट कैप्टन की जिंदगी के इवेंट्स के कलेंडर जैसी है। ये हुआ, वो हुआ, किसी आदमी ने मदद की तो किसी आदमी ने प्रेरित किया।

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नई दिल्ली।  ‘एम एस धोनी द अनटोल्ड स्टोरी’ इंडिया के सबसे सक्सेस्फुल क्रिकेट कैप्टन की जिंदगी के इवेंट्स के कलेंडर जैसी है। ये हुआ, वो हुआ, किसी आदमी ने मदद की तो किसी आदमी ने प्रेरित किया, उसने ये मेच जीता,  उस लड़की के प्यार में पड़ा। ये सचमुच में एक हैग्योग्राफी है। इस फेसिनेटिंग पर्सनेलिटी के केरेक्टर के इनसाइट्स नहीं मिलते। अगर आप हमेशा हैरान होते हैं की कैसे इतने प्रेशर के बीच भी धोनी काम रहते हैं, या मुश्किल घड़ी के बीच में उनके दिमाग में क्या चल रहा है, तो सावधान हो जाइए, ये फिल्म ऐसे किसी भी सवाल का जवाब नहीं देती है। पर ऐसा नहीं है की ये फिल्म नहीं करती है।

डायरेक्टर नीरज पांडे की ये फिल्म ड्रामे से भरपूर है। खासतौर पर फिल्म के प्रोटागॉनिस्ट का छोटे शहर से बड़े बड़े सपने लिए इंडिया के स्तर विकेटकीपर बैट्समैन बनने तक का सफर हमें बेहद प्रेरित करता है। छोटे शहर की जिदंगी को नीरज पांडे बखूबी पर्दे पर उतारते हैं और उनके किरदार भी सच्चे लगते हैं। यंग माही के टैलेंट को उनके स्कूल का क्रिकेट कोच, फुटबॉल ग्राउंड में परख लेता है। उनके पिता का कहना है की वो पढ़ाई पर ध्यान दें क्योंकि, स्पोर्ट्स से ज्यादा एक अच्छी नौकरी उन्हें मदद करेगी। फिर भी उन्हें उनके सपोर्टर्स मिलते हैं उनकी, मां और बहन और कुछ दोस्तों में जो उन पर यकीन करते हैं। जल्द ही  रांची में हर किसी की जुबान पर यही होता है की ‘माही मार रहा है’, जब वो लगातार बॉल को बैट से हिट करते हुए पूर शहर में अपना लोहा मनवाते हैं।

धोनी के किरदार में सुशांत सिंग राजपूत शानदार हैं और वो बिल्कुल सही बॉडी लैंग्वेज पकड़ते हैं साथ ही क्रिकेट मूव्स भी। खरगपुर में रेलवे टिकट कलेक्टर की नौकरी में फंसे माही की फ्रस्ट्रेशन को आप महसूस कर सकते हैं। आप उनके लिए रूट करेंगे, जब आप उन्हें सिंगल माइंडेड्ली अपने सपने को पूरा करने की कोशिश करते हुए देखेंगे, जो ना तो छोटी छोटी कामयाबियों से खुश होते हैं, और ना ही मुश्किल हालातों और नाकामी से निराश होते हैं। उनका लाजवाब अभिनय ही है जो आपको फिल्म से बंधे रखता है। फिल्म फ्रैंक्ली अपने सेकेंड हाफ में बहुत ही प्रैडिक्टेबल और बोरिंग हो जाती है। फिल्म में दो रोमॅन्स हैं और ये एक के बाद एक आते हैं, पर ये रिश्ते धोनी की पर्सनैलिटी के बारे में ज्यादा कुछ नहीं बताते। अफसोस, नीरज पांडे कभी भी धोनी से जुड़ी कॉनट्रोवर्सी के बारे में ज्यादा कुछ नहीं बताते।

करीब 3 घंटे और 10 मिनट की ये फिल्म बेहद लंबी लगती है और परफेक्शन से बहुत दूर है पर क्लाइमेक्स में 2011 के वर्ल्ड कप में धोनी के शानदार परफॉर्मेंस से नीरज पांडे सही नोट पकड़ते हैं और अंत में आप गर्व महसूस करेंगे। हालांकि आप जानते हैं की ये कोई ऐसी शानदार बायोपिक नहीं है। जो आपको इस प्रोटागॉनिस्ट के दिल और दिमाग में ला जाए। आपका दिल फिर भी खुश हो जाएगा। इसका ज्यादातर श्रेय जाता है बेहतरीन फिल्माए गए क्रिकेट सीन्स को। मैं ‘एम एस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’ को पांच में से तीन स्टार देता हूं।

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First published: October 1, 2016, 9:34 AM IST
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