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रिव्यूः बोल्ड और विवादास्पद होने के बाद भी ठंडी है ‘इनकार’

राजीव मसंद
Updated: January 19, 2013, 9:23 AM IST

सुधीर मिश्रा की नई फिल्म ‘इनकार’ ऑफिस में होने वाले यौन उत्पीड़न और वासना पर आधारित है, पर यह एक ऐसी फिल्म है जो आपको पूरी तरह से हताश कर देगी।

  • Last Updated: January 19, 2013, 9:23 AM IST
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मुंबई। सुधीर मिश्रा की नई फिल्म ‘इनकार’ ऑफिस में होने वाले यौन उत्पीड़न और वासना पर आधारित है, पर यह एक ऐसी फिल्म है जो आपको पूरी तरह से हताश कर देगी। फिल्म में अर्जुन रामपाल एक विज्ञापन एजेंसी के सीईओ राहुल के किरदार में हैं जिसपर क्रिएटिव हेड माया यानी चित्रांगदा सिंह ने गलत बर्ताव का आरोप लगाया है। यह एक परेशान कर देने वाली प्रस्तावना है और मिश्रा बहुत ही चालाकी से आम इश्कबाजी और महत्वाकांक्षा की कहानी दर्शाते हैं।
कहीं न कहीं फिल्म की बिखरी हुई स्टोरी लाइन इसके बनावटी किरदार और अजीब अंत की वजह से यह एक अच्छी सेक्सुअल थ्रिलर होने की क्षमता खो देती है और ये अफसोस की बात है। इनकार बड़े ही दिलचस्प तरीके से अपनी थीम को सामने लाती है जिसकी शुरुआत एक जांचकर्ता और सोशल वर्कर से होती है, जिसके किरदार को बखूबी निभाया है दीप्ति नवल ने जो इस विज्ञापन एजेंसी में माया द्वारा राहुल पर लगाए गए आरोपों की जांच करती हैं।
एजेंसी के अहम कर्मचारी भी इस जांच में मदद करते हैं और पिछले सात साल में माया और राहुल के बीच जो कुछ भी हुआ उस पर अपनी-अपनी राय देते हैं। इसमें दोनों के बीच के जटिल पेशेवर और निजी रिश्ते फ्लैशबैक में दिखते हैं। पता चलता है कि माया और राहुल के बीच अफेयर था, पर चीजें तब बिगड़ गईं जब माया कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ती चली गई और वह बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में शामिल हो गई। ये एक थका देने वाली कहानी है।
माया कहती है कि राहुल ने उसका यौन उत्पीड़न किया, वहीं राहुल कहता है कि माया ने कामयाबी पाने के लिए उसका इस्तेमाल किया है। इससे लंबी जांच शायद ही आपने देखी हो। फिल्म में परफोरमेंस ठीक-ठाक ही हैं। अर्जुन और चित्रांगदा मस्त लगते हैं लेकिन यहां आपको यह आइडिया मिलता है कि शायद ये दोनों इतने मुश्किल किरदार प्ले करने के लिए तैयार नहीं थे।

बोल्ड और विवादास्पद थीम के बावजूद ‘इनकार’ ठंडी पड़ जाती हैं। खास तौर पर इसके अजीब क्लाईमैक्स की वजह से जो कहीं और नहीं बल्कि ऑफिस के रेस्ट रूम में जाकर खत्म होता है। मैं सुधीर मिश्रा की ‘इनकार’ को पांच में से दो स्टार देता हूं। इसमें होने वाले मेलोड्रामा के बावजूद ये फिल्म कुछ ज्यादा हद तक देखने लायक है। अफ़सोस अगर यह सही तरीके से बनी होती तो यह थ्रिलर काफी रोमांचक हो सकता था। (विस्तृत समीक्षा के लिए वीडियो देखें)

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First published: January 19, 2013, 9:23 AM IST
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