• Home
  • »
  • News
  • »
  • shows
  • »
  • रिव्यूः काफी नीरस लगती है फिल्म ‘दावत-ए-इश्क’

रिव्यूः काफी नीरस लगती है फिल्म ‘दावत-ए-इश्क’

क्लाइमैक्स इतना जल्दबाजी से भरा और आसान लगता है कि आप इस बात को मान ही नहीं पाएंगे कि इन लोगों के बीच की उलझनें असलियत में सुलझ चुकी हैं।

  • Share this:
मुंबई। ‘दावत-ए-इश्क’ के बारे में इसका नाम ही सबकुछ कह देता है और ये सीक्रेट लेखक-निर्देशक हबीब फैजल अच्छे से जानते हैं। ‘दू दूनी चार’ में कार खरीदने के एक मिडिल क्लास परिवार के सपने से लेकर ‘बैंड बाजा बाराज’ में जनकपुरी के मेहनती दो लोगों का अपना बिजनेस फैलाने तक, वो अपने किरदारों को न सिर्फ अच्छे से समझते हैं, बल्कि एक ऐसी दुनिया क्रिएट करते हैं जिससे दर्शक जुड़ सकें। यही चीज है जो वो ‘दावत-ए-इश्क’’में सही पकड़ते हैं। जिसकी दुनिया असली, और जिसके किरदार एकदम फ्रेश लगते हैं, भले ही उनके एक्शन उतने विश्वसनीय न लगें।

दहेज मांगने वाले और डरपोक लड़कों का बार-बार सामना करके थक चुकी कामकाजी हैदराबादी गुलरेज यानी परिनीती चोपड़ा और उसका पिता यानी अनुपम खेर एक प्लान बनाते हैं। इसके तहत वो लखनऊ पहुंचते हैं जहां एक कबाब की दुकान का वारिस तारिक यानी आदित्य राय कपूर उनके जाल में फंस जाता है। जाहिर तौर पर मुश्किलें तब बढ़ने लगती हैं जब इस सोचे-समझे प्लान में प्यार शामिल होने लगता है।

ज्यादातर हिंदी फिल्मों में खाने को कभी सही तरीके से कहानी का हिस्सा नहीं बनाया गया है, पर हबीब फैजल ये काम अच्छे से करते हुए दावत-ए-इश्क की शुरुआत से ही कबाब, बिरयानी, जलेबी और फिरनी के अच्छे खासे क्लोजअप लेते हैं। फिर भी फिल्म काफी नीरस लगती है। पहली बात तो फिल्म के लीड किरदारों के बीच का रोमांस काफी जल्दबाजी से भरा और अविश्वसनीय लगता है जो महज गानों के साथ ही स्थापित किया गया है। फिल्म का क्लाइमैक्स भी जो रेलवे प्लेटफॉर्म पर फिल्माया गया है, इतना जल्दबाजी से भरा और आसान लगता है कि आप इस बात को मान ही नहीं पाएंगे कि इन लोगों के बीच की उलझनें असलियत में सुलझ चुकी हैं।


सच पूछा जाए तो यहां और समस्या भरी बात है फिल्म के असल मुद्दों को दर्शाने का तरीका। जरा सोचिए, हमें एक ऐसी लड़की का साथ देना है जो दहेज की सताई महिलाओं के लिए बने कानून का बेधड़क गलत इस्तेमाल कर रही है। अच्छी बात है कि फिल्म के एक्टर काफी अच्छे हैं जो स्क्रिप्ट की कमियों को ढंक देते हैं। परिनीती चोपड़ा काफी सच्ची और दिल को छूने वाली लगती हैं हालांकि वो ऐसी जिंदादिल लड़की के किरदार पहले भी कई बार निभा चुकी हैं। आदित्य राय कपूर अपने जोशीले किरदार में जो उन्होंने पहले कभी नहीं निभाया है, एकदम सही बॉडी लैंग्वेज पकड़ते हैं। अनुपम खेर कॉमेडी और नाजुकता के बीच सही बैलेंस बनाते हुए एक ऐसा किरदार पेश करते हैं जो जाना-पहचाना लगेगा।

‘दावत-ए-इश्क’ इंटरवल तक काफी आराम से आगे बढ़ती है पर उसके बाद दूसरे हाफ में इतने सारे ट्विस्ट सामने आते हैं जहां मानो लॉजिक पूरी तरह से भुला दिया गया है। फिल्म का ह्यूमर भी कहीं खो जाता है और दो घंटे में भी ये फिल्म काफी खिंची हुई लगती है। मैं ‘दावत-ए-इश्क’ को पांच में से दो स्टार देता हूं। शर्म की बात है कि अच्छी शुरुआत के बावजूद कहानी को पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं किया गया।


पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

हमें FacebookTwitter, Instagram और Telegram पर फॉलो करें.

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज