सीआरपीएफ ने खोया अपना ये जांबाज कुत्ता, याद में बन रहा मेमोरियल

CRPF के जवान, नक्सलियों से लोहा लेने के लिए पिछले 10 दिन से झारखंड के लातेहर में तैनात हैं. बुरहा पहाड़ी के इस इलाके में हर कदम पर जान को ख़तरा है,

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  • Last Updated: January 25, 2017, 12:02 AM IST
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देश के लिए शहीद जवानों का सम्मान तो होता ही है जिसके लिए हमारा देश हमेशा उनके बलिदान के लिए कृतज्ञ रहता है, लेकिन कम ही ऐसा सुनने में आता है कि शहीद हुए श्वान यानि स्निफ़र डॉग का सम्मान हुआ है. सीआरपीएफ यानि सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स की 207 कोबरा वाहिनी की शहीद हुई स्निफ़र डॉग अमिनका के नाम पर स्मारक तो बनेगा ही साथ उसे वीरता पुरस्कार देने की सिफारिश पर भी विचार किया जा रहा है.

जानें , क्या है शहीद स्निफर डॉग अमिनका के बलिदान की कहानी

अमिनका स्निफर डॉग यानि श्वान सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स की वो जांबाज सिपाही जिसने अपनी जान देकर अपनी बटालियन के कई जवानों की जान बचाई. अमिनका की कहानी इसलिए जरूरी है क्योंकि इसके बलिदान से इस जैसे कई और शहीदों के स्मारक बनने की परंपरा शुरू हुई है. सीआरपीएफ की सबसे एलीट यानि सबसे ज्यादा प्रशिक्षित टीम 207 कोबरा वाहिनी की सदस्य थी अमिनका.



झारखंड का लातेहार जिला देश के सबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित इलाकों में से एक 17 जनवरी 2017 का दिन,  अमिनका अपनी टीम के सदस्यों के साथ घने जंगलों में निकल चुकी थी नक्सलियों से लोहा लेने. दोपहर 3.30 बजे का वक्त था इसी तरीके से अमिनका घने जंगलों में अपनी फोर्स के सबसे आगे चल रही थी. अचानक वो रुकी और एक पत्थर आया. अमिनका ने जैसे ही उस पत्थर तो अपने पैर से छुआ जोरदार धमाका हुआ और मौके पर ही वो शहीद हो गई. इस हादसे में अमिनका के ट्रेनर पी के सामल बुरी तरीके से घायल हो गए. जरा सोचिए कि अगर अमिनका ने बिस्फोटक का पता नहीं लगाया होता तो उसके ट्रेनर के साथ 4 और लोगों की धमाके से मौके पर ही मौत हो जाती. सीआरपीएफ आईजी ऑपरेशन सदानंनद दाते के मुताबिक बहुत बड़ा नुकसान फोर्स को होने से अमिनका ने बचाया हमें उसपर गर्व है.
बहादुर अमिनका के लिए बांब खोजना या बिस्फोटकों की  पहचान करने का ये पहला मौका नहीं था. महज डेढ़ साल की सीआरपीएफ की अपनी सर्विस में उसने कई बार ऐसे ही बुद्धिमानी का परिचय देकर कई लोगों की जान बचाई थी. 21 सितंबर 2015 को पश्चिम बंगाल में उसने 8 किलो का टिफिन बॉम्ब बरामद किया,6 मई 206 को पश्चिम बंगाल में ही उसने केन बांब बरामद किया, तीन दिन बाद यानि 9 मई 2016 को उसने बंगाल में बिस्फोटक  माइन का पता लगाया था जिसमें 15 किलो विस्फोटक रखा था, 5 अगस्त को झारखंड में उसने झारखंड में 4 आईईडी बरामद किया था, लेकिन 17 जनवरी को आखिरकार अमिनका की शहादत का वक्त आ ही गया, लेकिन इस बलिदान से पहले वो कई लोगों की जान बचा चुकी थी.

2 साल 7 महीने की अमिनका बेल्जियन शेफर्ड मेलिनियोसिस नस्ल की स्निफर डॉग थी. फोर्स में शामिल किए जाने से पहले उसे 40 महीने की सघन ट्रेनिंग दी गई. बिस्फोटकों को सटीक जगह पर सही वक्त पर पहचानना अमिनका की खासियत थी. इस वीर सिपाही की ट्रेनिंग से जुड़े लोग बताते हैं ये उसकी खासियत ही थी जिस वजह से उसे सीआरपीएफ की सबसे खास यूनिट कोबरा बटालियन में शामिल किया गया था. सीआरपीएफ डीआईजी ऑपरेशन एडमिन योगज्ञान सिंह मानते हैं कि कुछ तो बात थी अलग अनिमका में इसीलिए वो अपने बैच की टापर भी थी. अमिनका की शहादत के बाद सीआरपीएफ ने उसे शहीद सिपाही का दर्जा देकर उसका अंतिम संस्कार किया. इतना ही नहीं अमिनका के साथ साथ अन्य श्वान यानि स्निफर डाग जो शहीद हुए हैं उनके लिए स्मारक भी ये फोर्स जल्द बनाएगी. साथ ही अमिनका को सीआरपीएफ फोर्स का वीरता पुरस्कार भी दिया गया है.

दरसल स्निफर डॉग खोजी कुत्ते या फिर यूं कहें श्वान को की अलग अलग नस्ल को देश की अलग अलग फोर्स अपने बेड़े में समय समय पर शामिल करती रहती है.इन स्निफर डॉग को खासतौर पर डिजाइन की गई ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है. इन सारी नस्लों में बेल्जियन शेफर्ड मेलीनोइस को सबसे दम खम वाली नस्ल का स्निफर डाग माना जाता है. सीआरपीएफ  डॉग ट्रेनिंग एंड ब्रीडिंग सेंटर,बेंगलुरू में और इस तरह के कई और सेंटर में तैयार किए गए देशभर में 693 स्निफर डॉग, लेकिन इन सबमें से सबसे जांबाज और दमखम वाले स्निफर डाग होते हैं बेल्जियन शेफर्ड मेलीनोइस सीआरपीएफ के बेड़े में ऐसे 284 स्निफर डॉग शामिल हैं. पर हर वक्त दुर्गम से दुर्गम इलाकों में ये दुश्मनों से लोहा लेने को तैयार होते हैं. सदानंनद दांते आईजी, ऑपरेशन,सीआरपीएफ के मुताबिक बराबर ये अपनी सेवाएं देते रहते हैं और हमें इनपर फक्र है.

बेल्जियन शेफर्ड मेलीनोइस स्निफर डाग पहली बार चर्चा में तब आए जब 2012 में अमेरिका ने पाकिस्तान में ओसामा बिन लादेन को मारने में इनका इस्तेमाल किया. अपनी खास काबलियत की वजह से ही उन्होने सटीक पता लगाया था. इस वक्त देश की चुनिन्दा फोर्स में ही इनका इस्तेमाल होता है. इसके अलावा इनमें  काफी ज्यादा दमखम होता है. इसीलिए कई दिनों तक कठिन से कठिन रास्तों में अपनी फोर्स के साथ दुश्मनों से ये लोहा लेते हैं.

अब जरा नजर डालते हैं बेल्जियन शेफर्ड मेलीनोइस स्निफर डॉग के देश के सबसे बड़े अर्धसैनिक बल सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स में योगदान पर. पिछले महज तीन सालों में ही ऐसे 68 स्निफर डॉग ने लगभग 100 खौफनाक वारदास टाली हैं बिस्फोटकों की पहचान कर. इतना ही नहीं पिछले तीन सालों में 11 ऐसे जांबाज सिपाहियों को फोर्स के मुखिया ने प्रशस्ति पत्र भी दिया है. यानि जैसी काबलियत वैसा ही काम और अब जब ऐसा सम्मान इन्हें मिला है तो ये भी इनकी जांबाजी की फेहरिस्त में एक नया पन्ना है.
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