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25 रुपए की गोली खाइए, सदा के लिए जवान हो जाइए!

News18India
Updated: September 11, 2015, 10:53 AM IST

न्यूयॉर्क के अल्बर्ट आईंस्टीन कॉलेज ऑफ मेडिसन का इंस्टीट्यूट ऑफ एजिंग बरसों से इंसान के उम्र बढ़ने की प्रक्रिया पर रिसर्च कर रहा है।

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  • Last Updated: September 11, 2015, 10:53 AM IST
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नई दिल्ली। न्यूयॉर्क के अल्बर्ट आईंस्टीन कॉलेज ऑफ मेडिसन का इंस्टीट्यूट ऑफ एजिंग बरसों से इंसान के उम्र बढ़ने की प्रक्रिया पर रिसर्च कर रहा है। इसका एक रिसर्च लांगविटि जींस पर है, जिसमें ऐसे लोगों पर अध्य्यन किया गया जो औरों के मुकाबले ज्यादा लंबी उम्र तक जीते हैं।

सौ साल से ज्यादा उम्र वाले इर्विन कान, 90 साल से ज्यादा उम्र वाली लिली पोर्ट, 100 की हद छूने वाले हरोल्ड लॉफमैन और 100 साल से ज्यादा उम्र वाली इर्मा डेनियल ये सभी वो लोग हैं जो उम्र और मौत को ठेंगा दिखाते नजर आते हैं।

लेकिन, तस्वीर का दूसरा पहलू 15 साल के निहाल भी हैं। ये भारतीय बच्चा 15 साल की उम्र में ही अपनी उम्र के बाकी बच्चों के मुकाबले 8 गुना तेजी से उम्रदराज हो रहे हैं। निहाल जन्मजात जेनेटिक बीमारी प्रोजेरिया से पीड़ित हैं, जो दुनिया में बहुत कम बच्चों में पाई जाती है।



एक तरफ तेजी से उम्रदराज होने वाले निहाल हैं तो दूसरी तरफ लंबी उम्र में भी ऊर्जावान बने रहने वाले इर्विन और लिली जैसे लोगों के जरिए विज्ञान ये समझने की कोशिश कर रहा है कि इंसान उम्र दराज कैसे होता है और कुछ लोग लंबी उम्र में भी सेहतमंद कैसे बने रहते हैं।



उन सबके पास कोई ऐसा जीन है जिससे वो ज्यादा उम्र तक जीते हैं और सेहतमंद रहते हैं। इंसानों में उम्र बढ़ने के कारणों की पड़ताल और उम्र रोकने के तरीकों पर हो रहे अध्य्यन के तहत ही वैज्ञानिक ऐसी दवाओं की खोज कर रहे हैं। जो उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को रोक सकें। पिछले कुछ बरसों में रापामाइसिन नाम की एक दवा को उम्र रोकने के मामले में चमत्कारी माना जाता था।

चूहोें पर किए गए प्रयोग से पता चला कि रापामाइसिन के इस्तेमाल से चूहों की उम्र 28 से 38 फीसदी ज्यादा हो गई। वो ज्यादा उम्र तक जीने लगे,  लेकिन ट्रांसप्लांट ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाली रापामाइसिन के ज्यादा इस्तेमाल से डाइबिटीज जैसी बीमारी का खतरा भी सामने आया है। लिहाजा, जवानी की बूटी की तलाश दूसरी दवा की तरफ मुड़ गई है। और ये तलाश अब जा कर ऐसी दवा पर खत्म होती नजर आ रही है। जो टाइप-2 डाइबिटीज के लिए खूब इस्तेमाल होती है।

भारत समेत दुनिया के तमाम मुल्कों में टाइप-2 डाइबिटीज से लड़ने की सबसे असरदार दवा है मेटफॉर्मिन, जिसकी एक गोली भारत में महज 25 रुपये से भी कम कीमत पर मिलती है।

मेटफॉर्मिन यानी डाइबिटीज की असरदार दवा और अब जवानी की बूटी भी साबित होगी मेटफॉर्मिन! क्या मेटफार्मिन वो दवा हो सकती है जो इंसानों में उम्र बढ़ने की रफ्तार रोक सकती है?

दरअसल ये सवाल पिछले साल कर्डिफ यूनिवर्सिटी के एक रिसर्च के बाद उठा। इस रिसर्च में यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पाया कि मेटफॉर्मिन इस्तेमाल करने वाले टाइप-2 डाइबिटीज के कुछ मरीज, सेहतमंद लोगों के मुकाबले 15 फीसदी ज्यादा जिए।

अब, न्यूयॉर्क के इंस्टीट्यूट ऑफ एजिंग ने पाया है कि मेटफॉर्मिन से उम्र बढ़ने से जुड़ी कोशिकाओं की प्रक्रिया और मेटाबॉलिज्म को मेटफॉर्मिन बदल देता है। इसीलिए नीर बर्जिलाई की टीम ने मेटफॉर्मिन को जवानी की बूटी के तौर पर परखने के लिए यूएस फूड एंड एडमिनिस्ट्रेशन से इंसानों पर इसके परीक्षण की इजाजत मांगी है।

इंस्टीट्यूट ऑफ एजिंग- जवानी की बूटी की तलाश के तहत के तहत 3000 लोगों पर मेटफॉर्मिन का परीक्षण करेगा। मेटफॉर्मिन का परीक्षण सेहतमंद लोगों से लेकर 70 से 80 के उम्र वाले लोगों पर 15 सेंटर पर परीक्षण होगा।

इन लोगों पर 7 साल तक दवा का असर परखा जाएगा। अगर परीक्षण सफल रहता है तो मुमकिन है कि दुनिया को जवानी की वो बूटी मिल जाए जो इंसान को ज्यादा जीने का वरदान दे सकती है। वैसे मेटफॉर्मिन के साथ कुछ और दवाओं पर भी रिसर्च जारी है, ऐसे ही एक रिसर्च का हिस्सा प्रोजेरिया से पीड़ित 15 साल का निहाल भी है।

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First published: September 10, 2015, 11:47 PM IST
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