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तो फिर तानाशाह एडोल्फ हिटलर ने नहीं की थी खुदकुशी, 1984 में हुई थी मौत?

News18India
Updated: January 27, 2016, 11:23 PM IST

क्या हिटलर ने अपनी मौत का नाटक रचा था? क्या कई नाजी अफसरों की तरह हिटलर भी फरार होने में कामयाब हो गया था? 2014 से ही ये सवाल पूछे जा रहे हैं जब एफबीआई ने अपनी सीक्रेट फाइलों के करीब 700 पन्नों को सार्वजनिक किया था।

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  • Last Updated: January 27, 2016, 11:23 PM IST
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नई दिल्ली। क्या हिटलर ने अपनी मौत का नाटक रचा था? क्या कई नाजी अफसरों की तरह हिटलर भी फरार होने में कामयाब हो गया था? और किसी गुप्त जगह पर बदले नाम और पहचान के साथ अपनी मौत तक आराम की जिंदगी जीता रहा? साल 2014 से ही ये सवाल पूछे जा रहे हैं जब एफबीआई ने अपनी सीक्रेट फाइलों के करीब 700 पन्नों को सार्वजनिक किया था। इसके बाद से कई रिसर्चरों ने द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद भी हिटलर के जिंदा होने की संभावना पर खोजबीन शुरू की तो सामने आई वो कहानियां और तस्वीर जो सवाल उठाती हैं-क्या अपने सीक्रेट बंकर में मरा नहीं था हिटलर?

नाजी यातना कैंप में लाखों यहूदियों को मारने का गुनहगार अडोल्फ आइखमैन द्वितीय विश्वयुद्ध के अंत में जर्मनी से भाग निकला था और गुप्त नाम और पहचान के साथ अर्जेंटीना रहने लगा था। 1960 में इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद ने आइखमैन का अपहरण कर लिया। इजरायल लाकर उसे सजा-ए-मौत दे दी गई थी। कुख्यात ऑस्विट्ज यातना कैंप का डॉक्टर डेथ-जोसेफ मेंगले भी अर्जेंटीना भाग निकला था, फिर वो गुप्त पहचान के साथ ब्राजील में रहने लगा जहां 1979 में उसकी मौत हो गई।

द्वितीय विश्वयुद्ध के बहुत से नाजी युद्ध अपराधियों ने सजा पाने से बचने के लिए-खुद को छुपाने की साजिशें रचीं थीं। लेकिन क्या हिटलर ने भी ऐसा किया था? क्या हिटलर ने अपनी मौत का नाटक रचा था, ये सवाल उठता ही नहीं अगर हिटलर की लाश पर रहस्य का परदा ना पड़ा होता, कहा यही जाता है कि हिटलर ने खुदकुशी कर ली थी, लेकिन कुछ बातें ऐसी भी हैं जो इस कहानी पर सवाल खड़े करती हैं।

दरअसल, हार नजदीक देखकर 29 अप्रैल को हिटलर ने अपनी साथी ईवा ब्राउन से शादी कर ली थी, अगले ही दिन यानी 30 अप्रैल 1945 को दोपहर को करीब साढ़े तीन बजे हिटलर के स्टडी रूम से सिर्फ एक गोली चलने की आवाज आई। कहा जाता है हिटलर ने खुद को गोली मार ली थी। ईवा ने जहर खा लिया। जर्मन सैनिकों ने दोनों की लाश को बंकर के बाहर ले जाकर जला दिया। दो मई को सोवियत सेनाओं ने बंकर के बाहर से वो लाश बरामद की, जिसे हिटलर की मान कर उसके खोपड़ी का एक हिस्सा सुरक्षित रख लिया गया।



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लेकिन, हिटलर के अंत की इस कहानी पर तब सवाल खड़ा हो गया जब कुछ अमेरिकी रिसर्चरों ने साल 2009 में खोपड़ी के उस हिस्से का डीएनए टेस्ट किया, जिसे सोवियत अफसर हिटलर का समझते थे। डीएनए टेस्ट में वो हिस्सा किसी 40 साल की जर्मन महिला का पाया गया।

हिटलर की लाश का कोई पुख्ता सबूत ना मिलने के कारण ही कुछ रिसर्चर मानते हैं कि OSS अफसरों की मदद से हिटलर जर्मन पनडुब्बियों के सहारे दक्षिण अमेरिका भाग निकला था। अब, सिमोनी रिनी नाम की एक रिसर्चर ने अपनी किताब ‘हिटलर इन ब्राजील- हिज़ लाइफ एंड हिज़ डेथ’ में दावा किया है कि हिटलर ब्राजील के गुमनाम कस्बे मातो ग्रोसो में रहता था। हिटलर ने अपना नाम अडोल्फ लिपजिग रख लिया था। वो ब्राजीलियाई गर्लफ्रेंड कुटिंगा के साथ रहता था। अडोल्फ लिपजिग 1984 तक जिंदा रहा।

सिमोनी ने अपने दावे के समर्थन में 1984 से दो साल पहले खींची गईं तस्वीर भी पेश की है। धुंधली सी इस तस्वीर में जिसे हिटलर बताया जाता है वो अपनी गर्लफ्रेंड के साथ है। लेखिका ने अडोल्फ लिपजिग को जानने वालों के बयान और कई तथ्यों के आधार पर उसे हिटलर साबित किया है। उसने ब्राजील की सरकार से अडोल्फ लिपजिग की कब्र खोद कर उसकी डीएनए जांच करने की भी मांग की है, लेकिन बहुत से इतिहासकार इसे महज एक थ्योरी बता कर खारिज कर रहे हैं।

हिटलर की खोपड़ी के कथित टुकड़े की डीएनए जांच से साबित हो चुका है कि जिस लाश को सोवियत फौजी हिटलर की समझते थे वो उसकी नहीं थी। लिहाजा, एक थ्योरी ये भी है कि हिटलर ने खुदकुशी की ही नहीं थी। वो दक्षिण अमेरिकी मुल्क अर्जेंटीना भाग निकला था। दरअसल इस थ्योरी को सबसे ज्यादा मजबूती इस बात से मिलती है कि 1956 तक अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई हिटलर की तलाश करती रही।

नाजी फौज, खुफिया एजेंसी और जासूसों के जाल की बदौलत द्वितीय विश्वयुद्ध में हिटलर लगभग पूरा यूरोप जीत लिया था। ये मानने वालों की कमी नहीं लोकप्रियता के लहर पर सवार होकर साधारण सा जो शख्स जर्मनी का शासक बना और फिर तानाशाह। जिस शख्स ने दुनिया को दो धड़े में बांट दिया उसने अपने भागने का प्लान-बी ना तैयार किया हो। यही नहीं हिटलर के कम से कम आधा दर्जन से ज्यादा जनरलों ने अपने भागने का प्लान-बी तैयार किया था।

साल 2009 में जब हिटलर की लाश के कथित अवशेष के डीएनए टेस्ट से साफ हो गया कि वो लाश हिटलर की नहीं थी। इसके बाद कई रिसर्चरों ने नए सिरे से हिटलर के मौत के हालात की जांच की और साल 2011 में गेरार्रड विलियम्स और सिमोन डंस्टन ने अपनी किताब Grey Wolf: The Escape of Adolf Hitler में खुलासा किया कि हिटलर और उसकी साथी ईवा जर्मनी से फरार हो गए थे। पहचान छुपा कर वो अर्जेंटीना के पातागोनिया में रहते थे। दोनों की दो बेटियां भी हुई थी। 1962 में अर्जेंटीना में ही हिटलर की मौत हो गई। दावे के हक में किताब में कई अकाट्य सबूत पेश किए गए हैं। हिटलर के अर्जेंटीना भाग जाने की बात इसलिए भी सच लगती हैं क्योंकि आइखमैन जैसे नाजी जनरलों को भी अर्जेंटीना में ही पाया गया था।

लेखक एच डी बाउमन ने हिटलर के गायब होने के इस रहस्य की जांच में अपने छह कीमती साल गुजारे हैं। उनका भी दावा है कि हिटलर मरा नहीं था बल्कि अर्जेंटीना पहुंच गया था। जुलाई 1945 को जब मित्र राष्ट्रों के नेता मिले तब स्टालिन ने उन्हें बताया था कि हिटलर स्पेन भाग निगला, वहां से वो अर्जेंटीना पहुंच गया।

बाउमन की किताब का दावा है कि हिटलर की खुफिया एजेंसी गेस्टापो के मुखिया हेनरिच म्यूलर ने अमेरिकी जांच कर्ताओं को बताया था कि खुद उसने हिटलर और ईवा ब्राउन के भागने में मदद की थी। 26 अप्रैल 1945 को ही दोनों बार्सिलोना भाग निगले थे। दावा ये भी है कि सोवियत सेनाओं ने सिर पर गोली लगी हुई जिस शख्स की तस्वीरें जारी की थीं, वो हिटलर के उस हमशक्ल की थी, जो बंकर में ही रहता था।

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First published: January 27, 2016, 10:27 PM IST
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स्रोत: जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी, U.S. (www.jhu.edu)
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