देखिए चांद का दिलकश नज़ारा, चूके तो करना होगा 2034 का इंतजार

जब भी सुंदरता का इज़हार होता है तो चांद का ज़िक्र ज़रूर होता है। लेकिन सोमवार को चांद की खूबसूरती में 4 चांद लगने वाले हैं।

  • News18India
  • Last Updated: November 14, 2016, 9:16 PM IST
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नई दिल्ली। चांद की खूबसूरती किस कदर है इसका अंदाज़ा तो इसी बात से है कि जब भी सुंदरता का इज़हार होता है तो चांद का ज़िक्र ज़रूर होता है। लेकिन सोमवार को चांद की खूबसूरती में 4 चांद लगने वाला है। सोमवार का चांद होगा ज़्यादा बड़ा, ज़्यादा चमकीला यानि चांद की चांदनी और भी खूबसूरत होगी।

सोमवार का चांद 14 फीसदी बड़ा और 30 फीसदी ज़्यादा चमकदार होगा और ऐसा इसलिए क्योंकि इस वक़्त चांद पृथ्वी के सबसे क़रीब होगा। आमतौर पर चांद और पृथ्वी के बीच का फ़ासला करीब 3 लाख 84 हज़ार किमी होता है। लेकिन सोमवार को ये फासला सिर्फ़ 3 लाख 55 हज़ार किमी ही होगा। जिससे चांद की काफी बड़ा दिखेगा।

चांद पृथ्वी के इतने करीब कैसे आ जाता है?



पहली परिस्थिति- पृथ्वी के चक्कर लगाते हुए चांद की कक्षा को दो हिस्सों में बांटा गया है। एक पेरिजी और दूसरी आपॉजी। आपॉजी में रहते हुए चांद पृथ्वी से सबसे दूर होता है और पेरिजी में होते हुए सबसे करीब।
दूसरी परिस्थिति- चांद, सूर्य और पृथ्वी के एक कतार में आने की। लेकिन इस कतार में पृथ्वी का चांद और सूर्य के बीच होना ज़रूरी है। यानि जब सूरज और चांद एक कतार में पृथ्वी के इर्द-गिर्द आ जाते हैं और चांद अपनी कक्षा के उत्तरी गोलार्ध पेरिजी में प्रवेश करता है तो होता है- सुपरमून।

चांद पृथ्वी के चारों ओर लगाता है चक्कर

अब आप सोच रहे होंगे कि चांद तो पृथ्वी के चारों ओर गोल घूमता है तो फिर वो कभी पृथ्वी के पास तो कभी दूर कैसे हो जाता है? वो इसलिए क्योंकि चांद पृथ्वी के चारों ओर एकदम गोल चक्कर नहीं लगाता। बल्कि कुछ अंडाकार आकृति बनाते हुए चक्कर लगाता है। और इसी वजह से तय होता है उसका धरती से फ़ासला।

जानकारों की माने तो सर्दियों के सुपरमून सबसे बड़े होते है वो इसलिए क्योंकि इन महीनों में पृथ्वी सूर्य के काफी पास होती है। सुपरमून का नज़ारा एक अनूठा नज़ारा है। यूं तो सुपरमून्स होते रहते हैं। लेकिन ये सुपरमून बेहद खास है।

अगली बार 25 नवंबर 2034

दरअसल इस बार का सुपरमून दूसरे सुपरमून्स के मुक़ाबले पृथ्वी के ज़्यादा क़रीब होगा। ये मौक़ा 68 साल बाद मिल रहा है। पिछली बार 26 जनवरी 1948 को चांद पृथ्वी के इतने क़रीब आया था और उसके बाद अब। अगली बार 25 नवंबर 2034 को चांद पृथ्वी के इतना क़रीब आ पाएगा।

इस साल चांद ने दिए हैं 3 बार सुपरमून के नजारे

हालांकि खुले आसमान में आपको चांद देखने पर खास फर्क महसूस नहीं होगा। लेकिन उगता चांद देखने पर ज़्यादा बड़ा और चमकदार दिखेगा। मौका 68 साल बाद आ रहा है इसलिए इसे देखने के लिए हर कोई बेताब है। बता दें, इस साल चांद ने 3 बार सुपरमून के नज़ारे दिए हैं। पिछले महीने 16 अक्टूबर को भी सुपरमून हुआ था। और ठीक एक महीने बाद 14 दिसंबर को फिर सुपरमून होगा। 14 दिसंबर का सुपरमून भी ख़ास होगा क्योंकि वो अपनी तेज़ रोशनी में उल्कापात का नज़ारा छिपा देगा।
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