जानें क्या है भारत और चीन में 'चिकन नेक' विवाद

सिक्किम-भूटान और तिब्‍बत का मीटिंग पॉइंट कहे जाने वाले डोका ला क्षेत्र में चीन (china) सड़क निर्माण करने की कोशिश कर रहा है जिस पर भारत को आपत्ति है. इस सड़क का निर्माण वह भूटान के डोका ला पठार में कर रहा है.

News18Hindi
Updated: July 1, 2017, 8:55 AM IST
जानें क्या है भारत और चीन में 'चिकन नेक' विवाद
India china dispute: भारत चीन सीमा पर पिछले कई दिनों से तनाव है. (File Photo:PTI)
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Updated: July 1, 2017, 8:55 AM IST


China India Dispute: सिक्किम-भूटान और तिब्‍बत का मीटिंग पॉइंट कहे जाने वाले डोका ला क्षेत्र में चीन (china) सड़क निर्माण करने की कोशिश कर रहा है जिस पर भारत को आपत्ति है. इस सड़क का निर्माण वह भूटान के डोका ला पठार में कर रहा है.



इस क्षेत्र के अधिकार को लेकर चीन और भूटान के बीच विवाद है. चीन इस क्षेत्र को डोंगलांग कहता है और प्राचीन काल से अपना हिस्‍सा बताता है. इसीलिए अपनी सेना के गश्‍ती दल को वहां भेजता रहता है. असल में चीन की मंशा अपने क्षेत्र के डोंगलांग से भूटान के डोका ला तक इस सड़क निर्माण से दक्षिण तिब्‍बत स्थित चुंबी घाटी तक अपनी पैठ को बढ़ाना है.


इसके अलावा सीमा में दाखिल होने का आरोप भारत के माथे मढ़ कर चीन पूरी दुनिया के आगे बीते कई दिनों से शोर मचा रहा है. यहां तक कि अपने आरोपों को सच बताने के लिए चीनी विदेश मंत्रालय ने कुछ तस्वीरें भी जारी की हैं जिसके जरिए वह भारतीय सैनिकों के घुसपैठ का दावा कर रहा है. मगर चीन के इन दावों ने कलई भूटान सरकार ने खोल दी. साथ ही साफ कर दिया कि भारतीय सेना ने कोई घुसपैठ नहीं की बल्कि चीनी आक्रामक कार्रवाई से एक छोटे मुल्क भूटान को बचने के लिए कदम उठाया है.
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भारत और चीन के बीच चिकेन नेक हैअहम


क्यों अहम है डोका ला का पठार

269 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल का यह इलाका भारत, चीन और भूटान की सीमाओं के पास है. यही वह इलाका है जहां तीनों देशों की सीमाएं मिलती हैं.

1914 की मैकमोहन रेखा के मुताबिक यह इलाका भूटान के अधिकार में है. जबकि चीन इस लाइन को मानने से ही इनकार करता है और वक्त-वक्त पर उसके सैनिक भूटान की सीमा पर अतिक्रमण करते रहते हैं.

डोका ला के पठार की रणनीतिक रूप से बेहद अहमियत है. चुंबी घाटी से सटा हुआ होने के चलते चीन इस पठार पर अपनी सैन्य पोजीशन को मजबूत करना चाहता है.

चीन की कोशिश है कि इस इलाके में सड़कों का जाल बिछाया जाए ताकि भारत के साथ युद्ध की स्थिति में जल्द से जल्द इस इलाके में सैन्य मदद पहुंचाई जा सके. डोका ला के पठार पर चीन की इसी मंशा ने भारत को सख्त रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया है.



चिकन  नेक के  पेंच: भारत को घेरने की कोशिश

पिछले दिनों प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि भारत और चीन के बीच सीमा विवाद होने के बावजूद पिछले 40-50 साल से बॉर्डर पर एक भी गोली नहीं चली है. लेकिन 40-50 वर्ष पहले यानी सितंबर 1967 में भारत और चीन के बीच सीमा पर आखिरी बार इस इलाके में जोरदार फायरिंग हुई थी. सिक्किम की सीमा का वही इलाका इस वक्त दोनों देशों की सेनाओं के बीच जोर आजमाइश का केंद्र बन गया है.

इस इलाके को 'चिकन नेक' के नाम से जाना जाता है. यह भारत की मुख्‍य भूमि को उत्‍तर-पूर्व राज्‍यों से जोड़ने का एकमात्र जरिया है. यह घाटी हंसिए की तरह है जो सिक्किम और भूटान को अलग करती है.

कूटनीतिक कदम: कैलाश मानसरोवर यात्रा पर रोक
भारत के लिहाज से यह भू-भाग,भू-सामरिक दृष्टिकोण से काफी महत्‍वपूर्ण माना जाता है. अभी इस क्षेत्र में भू-सामरिक लिहाज से भारत बेहतर स्थिति में है लेकिन डोंगलांग से डोका ला तक सड़क निर्माण कर चीन इन देशों के मिलन बिंदु स्‍थल तक पहुंचकर भारत को घेरना चाहता है. यदि चीन डोका ला तक सड़क निर्माण कर लेता है तो उसकी सेना को यहां से तकरीबन 50 किमी दूर संकरे सिलिगुड़ी कॉरीडोर तक सामरिक बढ़त मिल जाएगी जोकि पश्चिम बंगाल का हिस्‍सा है.

सिक्किम के बॉर्डर पर ताजा विवाद में दोनों सेनाओं के बीच हुआ विवाद इतना गंभीर है कि अगर इसे जल्दी ही नहीं सुलझाया गया तो बात दोनों सेनाओं के बीच 'धक्का-मुक्की' से आगे बढ़ सकती है.

इस बार यह घटना इतनी बड़ी है कि इसे साल 2013 दौलतबेग ओल्डी सेक्टर के मामले से भी ज्यादा गंभीर माना जा रहा है. पिछले मामलों के उलट इस बार चीनी मीडिया भारत के प्रति बेहद सख्त भाषा का इस्तेमाल कर रहा है. ग्लोबल टाइम्स ने तो भारत को सबक सिखाने की चुनौती भी दे डाली है.

चीन ने इस बार की घटना के विरोध में कूटनीतिक कदम उठाते हुए कैलाश मानसरोवर की तीर्थ यात्रा को रोक दिया है. यानी इस बार यह मामला चुमार, डेमचौक और चेपसांग के इलाकों में चीनी सैनिकों की घुसपैठ की पिछली घटनाओं से अलग है. रक्षा जानकारों के मुताबिक चुंबी घाटी में चीन की गतिविधियां भारत के लिए चिंता का सबब है.

क्‍या है मामला 

चीन का दावा है कि भारत ने डोका ला सेक्टर के जोम्पलरी इलाके में 4 जून को सड़क निर्माण कर रहे उसके सैनिकों को रोक दिया और उनके साथ हाथापाई भी की. इसके बाद अगले दिन चीनी सैनिकों ने भूटान की सीमा में स्थित भारत के दो अस्थाई बंकर गिरा दिए.

चीन डोका ला इलाके में जिसे भारत की घुसपैठ बता रहा है वह दरअसल चीन की कार्रवाई के खिलाफ भूटान को बचाने के लिए भारत की कार्रवाई थी.

सूत्रों के मुताबिक, चीनी दादागिरी से निपटने के लिए भारत ने भी अपनी ताकत का मोर्चा बांध दिया है. गुरुवार को सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने सिक्किम का दौरा किया. सेना प्रमुख ने इस इलाके की कमान संभालने वाले सैन्य कमांडरों के साथ समीक्षा की. भारत के रवैये से साफ है कि वो किसी सैनिक संघर्ष की ताल नहीं ठोंक रहा, मगर अपने ताकतवर पड़ोसी चीन की दादागिरी से भूटान को बचाने के लिए सिद्धांत की लड़ाई लड़ने को जरूर तैयार है.
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