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ज़िंदगी की ये मुश्किलें भी रोक न पाईं स्वप्ना की राह, ऐसे मिली क़ामयाबी

News18Hindi
Updated: August 31, 2018, 2:30 PM IST

स्वप्ना ने 18वें एशियाई खेलों के 11वें दिन बुधवार को महिलाओं की हेप्टाथलान इवेंट में भारत की झोली में स्वर्ण पदक डाला.

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  • Last Updated: August 31, 2018, 2:30 PM IST
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पश्चिम बंगाल के एक छोटे से कस्बे जलपैगुरी में एक रिक्शा चालक की बेटी 21 वर्षीय स्वप्ना बर्मन ने बुधवार को एशियाई खेलों में हेप्टाथलान इवेंट में भारत को पहला गोल्ड मेडल दिलवाया. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्वप्ना को उनकी इस सफलता पर बधाई दी और और राज्य सरकार की ओर से उन्हें 10 लाख रुपय का इनाम देने की घोषणा की.

बंगाल के पर्यटन मंत्री गौतम देव जलपैगुरी में स्वप्ना के घर गए और उन्हें बधाई दी. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्वप्ना की माता से फोन पर बात की. स्वप्ना को पश्चिम बंगाल सरकार नौकरी देगी. स्वप्ना ने 18वें एशियाई खेलों के 11वें दिन बुधवार को महिलाओं की हेप्टाथलान इवेंट में भारत की झोली में स्वर्ण पदक डाला. बर्मन ने कुल सात इवेंट्स के बाद 6026 अंकों के साथ स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया था.

स्वप्ना ने तमाम बाधाओं को पार करते हुए एशियाई खेलों में सफलता प्राप्त की. उन्होंने जलपैगुरी में अपने घर के पास ही स्कूल के मैदान में दौड़्ना शुरू किया और कड़ी मेहनत की.

स्वप्ना के पिता रिक्शा चलाते हैं और उनकी माता चाय के बागनों से चाय की पत्तियां तोड़ने का काम करती हैं. स्वप्ना के लिए यहां तक कि राह आसान नहीं थी लेकिन तमाम मुश्किलों का सामना करते हुए उन्होंने अपनी मंज़िल हासिल कर ही ली.

बचपन में जब स्वप्ना अपनी ट्रेनिंग कर रही थीं तो उनकी माता अपने काम पर जाते हुए उन्हें मैदान में छोड़ देती थीं और शाम को काम से लौटते हुए उन्हें उसी मैदान से साथ लेते हुए घर आती थीं. एक छोटे से घर से शुरुआत करके स्वप्ना ने यह मुकाम पाया है.

स्वप्ना के जीवन में संकट आते ही गए. घर में तंगी का माहौल तो था ही उस पर कुछ सालों से उनके पिता ने बीमारियों के कारण बिस्तर पकड़ लिया. स्वप्ना के पैरों में 6 उंगलियां हैं इसलिए उनके मुताबिक जूते भी उन्हें नहीं मिल पाते थे. लेकिन ये सारी कठनाई एक तरफ और स्वप्ना का लक्ष्य एक तरफ, जिसे उन्होंने हासिल कर ही लिया.

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First published: August 31, 2018, 2:30 PM IST
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