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बजरंग 5 साल से हर इवेंट में टॉप-3 में रहे, खराब प्रदर्शन से लौटे और कहा- फिर आक्रामक खेल के लिए हूं तैयार

बजरंग पूनिया एक बार फिर अच्छे प्रदर्शन को तैयार. (Bajrang Punia Instagram)

बजरंग पूनिया एक बार फिर अच्छे प्रदर्शन को तैयार. (Bajrang Punia Instagram)

बजरंग पूनिया ने टोक्यो ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीता था. लेकिन इसके बाद यह पहलवान लगातार चोट से परेशान रहा. पिछले दिनों ...अधिक पढ़ें

नई दिल्ली. सुबह के 8 बज रहे हैं और 90 मिनट के सत्र के बाद एक-एक कर के सभी पहलवान ट्रेनिंग हॉल से बाहर निकल रहे हैं. बजरंग पूनिया (Bajrang punia) अभी और पसीना बहाने की तैयारी कर रहे हैं. पसीने से तर-बतर बजरंग शरीर में लचीलापन और मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए अगले 45 मिनट तक प्लियोमेट्रिक कसरत का सहारा लेंगे. इस तरह की कसरत से एथलीट अपने शरीर की ताकत बढ़ाने के साथ लचीलापन लाने की कोशिश करता है.  उनकी नयी ऊर्जा और उत्साह का कारण पिछले दिनों हुई कुछ जांच के उत्साहजनक परिणाम हैं. ‘टेक्नोबॉडी असेसमेंट’, ‘फंक्शनल मूवमेंट स्क्रीनिंग बॉडी कंपोजिशन एनालिसिस’ और ‘वीओ2एमएएक्स’ जैसी जांच के परिणामों ने उन्हें अपनी मानसिकता को मजबूत करने में मदद की है.

टोक्यो ओलंपिक से पहले घुटने की चोट के कारण बजरंग ने अपने खेल में रक्षात्मक रवैया अपना लिया था. इस चोट के कारण उनकी मानसिकता प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी पर आक्रमण करने की जगह खुद का बचाव करने की हो गई थी. कॉमनवेल्थ गेम्स के ट्रायल में भी ऐसा ही देखने को मिला, जहां वह अपने प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ियों को कड़े मुकाबले के बाद हरा सके. इसके कुछ दिनों के बाद अल्माटी में बोलत तुर्लिखानोव कप में उन्हें उज्बेकिस्तान के अब्बोस राखमोनोव के खिलाफ बेहतर स्थिति में होने के बाद भी मुकाबला गंवाना पड़ा. यह सब उनकी रक्षात्मक रणनीति के कारण था. ऐसा लगने लगा था कि बजरंग ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर लिया है. खुद बजरंग को भी अपनी काबिलियत पर शक होने लगा था.

नतीजे नहीं आ रहे थे पक्ष में

बजरंग पूनिया ने पीटीआई को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘मैंने अपने कोच से कहा कि मैं पुराने अंदाज में खेलूंगा और आक्रामक रवैया अपनाउंगा, लेकिन अल्माटी में मेरे शरीर ने साथ नहीं दिया. मेरे प्रयास में कोई कमी थी, बल्कि मैं अधिक कोशिश कर रहा था. लेकिन प्रदर्शन और नतीजे मेरे हक में नहीं आ रहे थे. उन्होंने कहा कि मुझे कई बार तो ऐसा लगा कि मैं अपने अतीत के शानदार प्रदर्शन को कभी नहीं दोहरा पाउंगा. मुझे लगा कि मेरे शरीर की क्षमता कम हो गई है. ऐसा लग रहा था कि मेरे शरीर में कुछ कमी है और यह बात मुझे मानसिक रूप से लगातार परेशान कर रही थी. ’

जांच के नतीजे शानदार रहे

इस दिग्गज पहलवान को हालांकि खुद पर संदेह से बाहर निकलने में ज्यादा समय नहीं लगा. उन्होंने कहा कि अब मुझे लग रहा है कि मेरा सर्वश्रेष्ठ खेल आना बाकी है और आप इसे देखेंगे. उन्होंने कहा कि कजाखस्तान से वापस आने के बाद मैंने फिजियो आनंद दुबे की सलाह पर ताकत, गति, शारीरिक संतुलन, सहनशक्ति और लचीलेपन के आकलन के लिए कुछ चिकित्सा जांच कराई और इसके नतीजे शानदार रहे.

बजरंग ने कहा कि जांच के नतीजे अच्छे रहने के बाद मैं अभ्यास में बेहतर कर पा रहा था. एक मानसिक रुकावट सी थी, जो अब नहीं है. इस 28 साल के पहलवान ने पिछले 5 साल में हर साल किसी प्रतियोगिता में पोडियम (टॉप-3) स्थान हासिल किया, लेकिन उनके लिए यह मायने नहीं रखता है. उन्होंने कहा कि मैं परेशान था. मुझे पता है कि मीडिया भी मुझे (रूस में) लेकर चिंतित था, लेकिन मुझे उस समय मीडिया की नहीं बल्कि रिहैबिलिटेशन की जरूरत थी. दाहिने घुटने में चोट के कारण बाएं घुटने पर अधिक भार पड़ रहा था.

उन्होंने कहा कि उस समय मेरे पास कोई फिजियो नहीं था और ओलंपिक के बाद अपने दम पर रिहैबिलिटेशन कर रहा था. मैंने 8-10 दिनों के लिए प्रशिक्षण लिया और मेरे दाहिने घुटने में फिर से चोट लग गई. मेरे दिमाग में फिर से चोटिल होने की बात का बुरा असर पड़ा. उनके फिजियो आनंद ने कहा कि बजरंग के मानसिक अवरोध को दूर करने के लिए इन परीक्षणों को करवाना जरूरी हो गया. वह रक्षात्मक खेल रहा था. वह अपनी गति को लेकर संघर्ष कर रहा था. अगर वह अपना नैसर्गिक आक्रामक खेल खेलता तो उसकी गति अपने आप वापस आ जाती. यही उसका हथियार है.

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बजरंग ने कहा कि मैं अब खुद में काफी बदलाव महसूस कर रहा हूं. मैं अब आक्रामक रुख अख्तियार कर रहा हूं. अब डरने की कोई वजह नहीं है. बजरंग का आत्मविश्वास ‘देसी’ तरीके के अभ्यास से भी बढ़ा है. वह अब अखाड़े में अभ्यास कर रहे हैं, जबकि अपने पूर्व कोच शाको बेंटिनिडिस की देख-रेख में मैट पर ही अभ्यास कर रहे थे. उन्होंने कहा कि शाको (बेंटिनिडिस) को सुहागी, उठक-बैठक जैसी चीजें कभी पसंद नहीं थी. मैं बचपन से ये काम करता रहा हूं. ये महत्वपूर्ण व्यायाम हैं, क्योंकि आपको टखने से सिर तक शक्ति का इस्तेमाल करने की जरुरत होती है. यह कार्डियो करने जैसा है.

Tags: Bajrang punia, Commonwealth Games, Wrestling, Wrestling Federation of India

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