Home /News /sports /

Tokyo Paralympics: भाविनाबेन पटेल बोलीं-मैं खुद को दिव्यांग नहीं मानती, कुछ भी असंभव नहीं

Tokyo Paralympics: भाविनाबेन पटेल बोलीं-मैं खुद को दिव्यांग नहीं मानती, कुछ भी असंभव नहीं

Tokyo Paralympics: भाविना पटेल गोल्ड जीतने से एक कदम दूर, फाइनल में पहुंचकर रचा इतिहास. (फोटो साभार-SAI Media)

Tokyo Paralympics: भाविना पटेल गोल्ड जीतने से एक कदम दूर, फाइनल में पहुंचकर रचा इतिहास. (फोटो साभार-SAI Media)

टोक्यो पैरालंपिक (Tokyo Paralympics) में टेबल टेनिस खिलाड़ी भाविनाबेन पटेल (Bhavinaben Patel) ने फाइनल में पहुंचकर इतिहास रच दिया है. टेबल टेनिस महिला सिंगल्स के सेमीफाइनल में भाविनाबेन पटेल (Bhavina Patel) ने चीन की झांग मियाओ को 3-2 से हराया.

अधिक पढ़ें ...

    नई दिल्ली. पैरालंपिक खेलों ( Tokyo Paralympics) के फाइनल में पहुंचने वाली भारत की पहली टेबल टेनिस खिलाड़ी भाविनाबेन पटेल (Bhavinaben Patel) ने शनिवार को कहा कि वह खुद को दिव्यांग नहीं मानती. भाविना (Bhavina Patel) ने कहा कि टोक्यो खेलों में उनके प्रदर्शन ने साबित कर दिया कि कुछ भी असंभव नहीं है.

    बारह महीने की उम्र में पोलियो की शिकार हुई पटेल ने कहा, ‘‘ मैं खुद को दिव्यांग नहीं मानती. मुझे हमेशा से यकीन था कि मैं कुछ भी कर सकती हूं और मैंने साबित कर दिया कि हम किसी से कम नहीं है. पैरा टेबल टेनिस भी दूसरे खेलों से पीछे नहीं है. मैंने चीन के खिलाफ खेला है और यह हमेशा कहा जाता है कि चीन को हराना आसान नहीं होता है. मैंने आज साबित कर दिया कि कुछ भी असंभव नहीं है. हम कुछ भी कर सकते हैं.’’

    पटेल ने कहा कि खेल के मानसिक पहलू पर फोकस करने से उन्हें मैच के दौरान मदद मिली. उन्होंने कहा, ‘‘ मेरा दिन सुबह चार बजे शुरू हो जाता है और मैं ध्यान व योग के जरिये मानसिक एकाग्रता लाने का प्रयास करती हूं. मैचों के दौरान कई बार हम जल्दबाजी में गलतियां करते हैं और अंक गंवा देते हैं लेकिन मैने अपने विचारों पर नियंत्रण रखा.’’ उन्होंने कहा ,‘‘ मैं अपने कोचों को धन्यवाद देना चाहता हूं जिन्होंने मुझे तकनीक सिखाई. उनकी वजह से ही मैं यहां तक पहुंच सकी. भारतीय खेल प्राधिकरण, टॉप्स, पीसीआई, सरकार, ओजीक्यू, नेत्रहीन जन संघ, मेरे परिवार को भी मै धन्यवाद देती हूं.’’

    यह भी पढ़ें:

    Tokyo Paralympics: भाविना पटेल गोल्ड जीतने से एक कदम दूर, फाइनल में पहुंचकर रचा इतिहास

    भाविनाबेन पटेल: 12 महीने की उम्र में हुआ था पोलियो, अपने पहले पैरालंपिक गेम्स में रच दिया इतिहास

    भाविना ने मैच जीत जीतने के बाद कहा, ‘‘ जब मैं यहां आई तो मैने सिर्फ अपना शत प्रतिशत देने के बारे में सोचा था. अगर ऐसा कर सकी तो पदक अपने आप मिलेगा. मैंने यही सोचा था.’’ भाविना ने कहा, ‘‘अगर मैं इसी आत्मविश्वास से अपने देशवासियों के आशीर्वाद के साथ खेलती रही तो कल गोल्ड जरूर मिलेगा. मैं फाइनल के लिये तैयार हूं और अपना शत प्रतिशत दूंगी.’’

    Tags: Paralympics 2020, Sports news, Tokyo Paralympics, Tokyo Paralympics 2020

    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर