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कंगारुओं के खिलाफ ही हीरो से जीरो बने धवन

ऑस्ट्रेलिया में खेली गई टेस्ट सीरीज में अगर टीम इंडिया की बल्लेबाजी की ही बात करें तो ओपनिंग से लेकर मिडिल ऑर्डर तक के कई बल्लेबाजों ने निराश किया।

ऑस्ट्रेलिया में खेली गई टेस्ट सीरीज में अगर टीम इंडिया की बल्लेबाजी की ही बात करें तो ओपनिंग से लेकर मिडिल ऑर्डर तक के कई बल्लेबाजों ने निराश किया।

ऑस्ट्रेलिया में खेली गई टेस्ट सीरीज में अगर टीम इंडिया की बल्लेबाजी की ही बात करें तो ओपनिंग से लेकर मिडिल ऑर्डर तक के ...अधिक पढ़ें

    नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया में खेली गई टेस्ट सीरीज में अगर टीम इंडिया की बल्लेबाजी की ही बात करें तो ओपनिंग से लेकर मिडिल ऑर्डर तक के कई बल्लेबाजों ने निराश किया। चाहे वो शिखर धवन हो या चेतेश्वर पुजारा या फिर सुरेश रैना। ये तीनों खिलाड़ी पूरी तरह फ्लॉप रहे और यही वजह है कि सभी मैच भी नहीं खेल सके।

    टीम इंडिया के ओपनर शिखर धवन ने करियर का आगाज मजबूत ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शतक लगाकर किया था। धवन के इस धमाकेदार शतक के बाद लगा कि टीम इंडिया को नया वीरेंद्र सहवाग मिल गया। लेकिन डेढ़ साल बाद ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ही शिखर हीरो से जीरो बन गए। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज में शिखर अपने प्रदर्शन से ज्यादा विवादों में रहे और नतीजा तीन टेस्ट के बाद प्लेइंग इलेवन से उन्हें बाहर होना पड़ा। शिखर ने 3 टेस्ट में 27.83 की औसत से 167 रन बनाए। जिसमें सिर्फ 1 अर्धशतक शामिल था।

    शिखर की तरह ही घरेलू सीरीज में करिश्माई प्रदर्शन के बाद चेतेश्वहर पुजारा को भी नया राहुल द्रविड़ कहा जाने लगा था। लेकिन इस सीरीज में ये सितारा भी शिखर से शून्य पर आ गया। पुजारा की इस नाकामी ने टीम इंडिया को बेसहारा कर दिया। पुजारा 3 मैच में 33.50 की औसत से 201 रन ही बना सके जिसमें इकलौता अर्धशतक था।

    आखिर में पुजारा को भी प्लेइंग इलेवन से बाहर किया गया, लेकिन जिस खिलाड़ी को मौका मिला उसने तो हद ही कर दी। सुरेश रैना की जो दोनों पारियों में खाता भी नहीं खोल सके। रैना की इस नाकामी ने जहां पुजारा को नया जीवनदान दिया, वहीं इस खिलाड़ी के लिए टेस्ट टीम के दरवाजे शायद हमेशा के लिए बंद कर दिए।

    Tags: Australia, Border Gavaskar Trophy, India, Shikhar dhawan

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