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1054 dots in 7 matches indian women cricketers now need to change 5 things

'7 मैच में 1054 डॉट्स गेंद', भारतीय वीमंस क्रिकेटर्स को अब 5 चीजें बदलने की जरूरत

भारतीय महिला टीम वर्ल्ड कप 2022 के फाइनल में जगह नहीं बना सकी थी. (AP)

भारतीय महिला टीम वर्ल्ड कप 2022 के फाइनल में जगह नहीं बना सकी थी. (AP)

भारतीय महिला क्रिकेट टीम एक बार वर्ल्ड कप जीतने में नाकाम रहीं. महिला टीम ने 2005 और 2017 में मिताली राज की कप्तानी में जरूर फाइनल तक का सफर पूरा किया है लेकिन अब तक चैंपियन नहीं बन सकीं. भारतीय टीम को अगर वर्ल्ड कप का ताज पहनना है तो उसे तुरंत ही 5 चीजों पर गौर करने की जरूरत है.

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नई दिल्ली. बीसीसीआई (BCCI) पर भारतीय महिला क्रिकेट को बढ़ावा नहीं देने का आरोप लगाया जा सकता लेकिन समस्या इससे इतर भी है. वीमंस वर्ल्ड कप 2022 (Womens World Cup 2022) में भारतीय टीम सेमीफाइनल तक का सफर पूरा नहीं कर पाई थी. आप टीम इंडिया को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ एक नोबॉल के चलते नॉकआउट स्टेज में ही बाहर होने के लिए जिम्मेदार ठहरा सकते हैं. लेकिन कारण कुछ और भी है. पुरानी बल्लेबाजी स्टाइल, ज्यादा संख्या में डॉट गेंद खेलना, प्लेइंग 11 में लगातार बदलाव करना, तेज नहीं भागना और थोड़ी सी उदासीन कप्तानी के चलते एक बार फिर टीम इंडिया वर्ल्ड कप का ताज पहनने में असफल रही.

बल्लेबाजी के दौरान डॉट गेंदे कम करनी होगी
ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसी टॉप की टीमें अब व्हाइट गेंद क्रिकेट को ज्यादा तवज्जो दे रही है. भारतीय टीम ने उस रास्ते पर अभी कदम रखा लेकिन बहुत धीमी गति से चल रही हैं. न्यूजीलैंड के खिलाफ ही मुकाबले को लें तो भारतीय टीम को 261 रनों का लक्ष्य मिला. लेकिन पहले ही 20 ओवर में टीम ने 85 डॉट गेंदे खेली. इसके अलावा 153 गेंदों पर कोई भी रन बनाने में असफल रही. पिछले साल भी भारतीय टीम ने इंग्लैंड के खिलाफ 181 डॉट गेंदे खेली थी. कोई भी आने वाले खतरे की आहट सुनने को तैयार नहीं था.

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मैदान पर तेज भागने की जरूरत
सिर्फ मैदान पर चौके-छक्के से काम नहीं चलता है. किसी भी खिलाड़ी को रन बनाने के लिए तेज दौड़ने की जरूरत होती है. वर्ल्ड कप 2022 में भारतीय महिला टीम का रवैया भी थोड़ा सुस्त रहा. टीम ने सात मुकाबलों में 1054 डॉट गेंदें खेलीं. दूसरे शब्दों में कहें तो तीन वनडे मुकाबलों के बराबर गेंदें छोड़ी. टूर्नामेंट में सबसे दबदबे वाले ऑस्ट्रेलियाई टीम ने राउंड-रॉबिन लीग में 959 डॉट गेंदों की खपत की, जो भारत से 95 कम है. दिलचस्प बात यह है कि जब पावर हिटिंग की बात आती है, तो भारतीय टीम अन्य टीमों से कहीं आगे है. भारतीय बैटर्स ने टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा 15 छक्के लगाए.

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चुस्त-दुरस्त फील्डिंग नहीं
पूरे टूर्नामेंट के दौरान भारतीय टीम की फील्डिंग अप्रभावशाली रही. विकेटों के बीच तेज दौड़ने की जरूरत थी. रन आउट के भी मौके छोड़े. सीनियर्स बैटर्स तो दो-तीन रन बनाने के लिए जूझ रही थीं. दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अहम मुकाबले में शेफाली वर्मा के रन आउट ने इस समस्या को उजागर किया.

टीम चुनते समय अनुभवी खिलाड़ियों का भी ध्यान रखना जरूरी
जेमिमा रोड्रिगेज और अनुभवी तेज गेंदबाज शिखा पांडे के वर्ल्ड कप से बाहर होने से कुछ लोग नाराज भी थे. उनकी फार्म में कमी के चलते दोनों खिलाड़ियों को नजरअंदाज किया गया. पिछले साल जुलाई में इंग्लैंड में खराब प्रदर्शन के बाद जेमिमा ने वनडे टीम में अपना स्थान खो दिया. उन्होंने शतक जड़कर फॉर्म में वापसी के संकेत जरूर दिए लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी.

शेफाली वर्मा को ड्रॉप करना, हरमनप्रीत का सही से उपयोग नहीं करना
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में पूर्व भारतीय कप्तान अंजुम चोपड़ा कहती हैं, “मुझे अब भी लगता है कि जेमी को कम से कम 18 सदस्यीय टीम में जरूर होना चाहिए था. लेकिन उन्हें प्लेइंग 11 में जगह बनाने में काफी मशक्कत करनी होती. यास्तिका भाटिया ने 3 पर बल्लेबाजी करते हुए मौके का पूरा फायदा उठाया. शिखा के लिए भी यही है. झूलन गोस्वामी के साथ गेंदबाजी करते हुए अगर वह बेहतरीन फॉर्म में होतीं तो निश्चित रूप से एक अच्छी जोड़ी होतीं. शिखा का अनुभव काम आ सकता था लेकिन इसके लिए आपको मेघना सिंह को छोड़ना पड़ता. मेघना ने पिछले 5-7 महीनों में जबरदस्त प्रदर्शन किया था.”

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हरमनप्रीत कौर ने टूर्नामेंट में 318 रन बनाए. उनसे ज्यादा रन भारत की तरफ से सिर्फ स्मृति मंधाना (327) बनाए. हरमनप्रीत कौर ऑलराउंडर हैं और समय-समय पर गेंदबाजी में भी कमाल दिखाती हैं. लेकिन आश्चर्यजनक रूप से उनका उपयोग दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ किया गया. इस मैच से पहले उनसे गेंदबाजी नहीं कराई गई. अंजुम चोपड़ा का मानना है कि हरमप्रीत कौर से पूरे टूर्नामेंट में गेंदबाजी कराई जानी चाहिए थी.

कोच की समस्या अब भी पहेली, 5 साल में चार बार हुआ बदलाव
पिछले 5 साल में महिला टीम के 4 कोच बदले गए हैं. बड़ौदा के पूर्व क्रिकेटर तुषार अरोठे जिन्होंने भारतीय टीम को 2017 विश्व कप में टीम को फाइनल में पहुंचाया, उन्होंने महिला टी20 वर्ल्ड कप से पद छोड़ दिया. उनके ट्रेनिंग के तरीके पर खिलाड़ियों को एतराज रहा. बीसीसीआई को वरिष्ठ खिलाड़ियों, विशेषकर टी20 कप्तान हरमनप्रीत कौर से उनके प्रशिक्षण के तरीकों के बारे में शिकायतें मिलीं.

मिताली राज और कोच रमेश पोवार के बीच विवाद भी सुर्खियों में रहा. (AP)

भारतीय महिला टीम के वर्तमान कोच रमेश पोवार ने अगस्त 2018 में अरोठे की जगह ली थी. कुछ महीने बाद, मिताली के साथ मतभेद के बाद पोवार को उसी पद से बर्खास्त कर दिया गया था. इसके बाद भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज डब्ल्यू वी रमन को मुख्य कोच नियुक्त किया गया था. उनके कार्यकाल के दौरान भारत टी20 विश्व कप 2020 में उपविजेता रहा. हालांकि आश्चर्यजनक रूप से रमन को क्रिकेट सलाहकार समिति (CAC) मुख्य कोच के रूप में बरकरार नहीं रखा गया. इसके बाद रमेश पोवार को फिर जिम्मेदारी दे दी गई.

Tags: BCCI, Harmanpreet kaur, Indian Womens Cricket, Mithali raj, Smriti mandhana

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