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जब बच्‍चे बोर्ड एग्‍जाम देंगे तब टीम इंडिया के लिए वर्ल्‍ड कप खेलेगी ये 16 साल की लड़की

भाषा
Updated: January 13, 2020, 8:20 AM IST
जब बच्‍चे बोर्ड एग्‍जाम देंगे तब टीम इंडिया के लिए वर्ल्‍ड कप खेलेगी ये 16 साल की लड़की
ऋचा घोष.

बंगाल की 16 साल की ऋचा घोष (Richa Ghosh) छक्‍के लगाने में महेंद्र सिंह धोनी (Mahendra Singh Dhoni) की फैन हैं. वह टी20 वर्ल्‍ड कप में उनके जैसा ही खेलना चाहती हैं.

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कोलकाता: बंगाल की युवा महिला क्रिकेटर ऋचा घोष (Richa Ghosh) को अगले महीने से ऑस्‍ट्रेलिया में होने वाले आईसीसी महिला टी20 वर्ल्‍ड कप (ICC Women T20 World Cup) के लिए भारतीय टीम (Indian Team) में चुना गया है. उनकी उम्र की अधिकतर लड़कियां जब फरवरी में अपनी बोर्ड की परीक्षा की तैयारी कर रही होंगी तब सिलिगुड़ी की 16 साल की यह लड़की भारत की महिला टीम के साथ अपने पहले अंतरराष्ट्रीय दौरे पर होगी. अब बंगाल के अंशकालिक अंपायर अपने पिता मानवेंद्र घोष को देखकर ऋचा ने साढ़े चार की उम्र में बल्ला उठाया था और चैलेंजर ट्राफी में अच्छे प्रदर्शन की बदौलत राष्ट्रीय टीम में जगह बनाई.

ऋचा ने पिता से सीखा क्रिकेट
ऋचा ने पीटीआई से कहा, ‘मैंने कभी नहीं सोचा था कि यह सब इतनी जल्द होगा. इस पर विश्वास करना मुश्किल हैं और मैं अब तक इस अहसास से उबर नहीं पाई हूं. मेरे पहले आदर्श हमेशा मेरे पिता रहे जिनसे मैंने क्रिकेट सीखा. इसके बाद सचिन तेंदुलकर जो हमेशा मेरे आदर्श रहेंगे.’

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16 साल की ऋचा घोष को टी20 वर्ल्ड कप के लिए पहली बार टीम में मौका दिया गया है. बंगाल की इस युवा दाएं हाथ की बल्लेबाज को वुमेन टी20 चैलेंजर में शानदार प्रदर्शन के दम पर मौका दिया गया है.


धोनी की तरह छक्‍के लगाना है पसंद
लेकिन जब छक्के जड़ने की बात आती है तो वह महेंद्र सिंह धोनी की प्रशंसक है. ऋचा ने कहा, ‘वह (धोनी) जिस तरह छक्के मारते हैं वह मुझे पसंद है और मैं भी ऐसा ही करने का प्रयास करती हूं. गेंदबाज चाहे कोई भी हो, जब आपके हाथ में बल्ला होता है तो आप कुछ भी कर सकते हो.’

झूलन और ऋद्धिमान साहा से मिलती है मददबंगाल की टीम में ऋचा को झूलन गोस्वामी का साथ मिलता है जबकि वह हमेशा क्रिकेट पर भारत की पुरुष टीम के विकेटकीपर ऋद्धिमान साहा के साथ बात करती हैं जो उनके गृह नगर सिलिगुड़ी के ही रहने वाले हैं. उन्होंने कहा, ‘झूलन दी ने हमेशा टीम में मेरा समर्थन किया जबकि ऋद्धि दा (साहा) से मुझे हमेशा मदद मिली. वह व्यस्त रहते हैं लेकिन हम बात करते रहते हैं. मैं समर्थन के लिए उनकी, अपने कोचों और बंगाल क्रिकेट संघ की आभारी हूं.’

लड़कों के क्‍लब से सीखा क्रिकेट
खेल के प्रति ऋचा की गंभीरता को देखते हुए उनके पिता ने स्थनीय बाघा जतिन क्लब में उसे भेजना शुरू किया और वह तब क्लब में एकमात्र लड़की थी. ऋचा ने लंबा सफर तय किया और 2012-13 में उन्हें बंगाल की सीनियर टीम के शिविर में बुलाया गया. बंगाल की महिला टीम के कोच शिव शंकर पाल ने कहा, ‘किसी भी कोच के लिए उसका होना शानदार है, वह प्रतिभा भगवान से तोहफे में मिली है. लेकिन वह काफी युवा है और हमें सुनिश्चित करना होगा कि वह लंबा रास्ता तय करे.’

बंगाल के ट्रेनर और विकेटकीपिंग कोच राहुल देब ने कहा कि वह आसानी से छक्के जड़ सकती है और शानदार क्षेत्ररक्षक भी है.

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First published: January 13, 2020, 8:20 AM IST
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