5 भारतीय खिलाड़ी जो दमदार प्रदर्शन के बावजूद अचानक टीम इंडिया से 'गायब' हो गए

5 भारतीय खिलाड़ी जो दमदार प्रदर्शन के बावजूद अचानक टीम इंडिया से 'गायब' हो गए
भारतीय टीम के वो खिलाड़ी जो टैलेंटेड तो थे लेकिन उनका करियर जल्द ही खत्म हो गया

भारत (Team India) में एक से बढ़कर एक टैलेंटेड खिलाड़ी हैं लेकिन टीम इंडिया में जगह बरकरार रखने के लिए टैलेंट के साथ-साथ किस्मत का भी साथ चाहिए होता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: July 15, 2020, 11:18 PM IST
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नई दिल्ली. कहते हैं अगर आपके अंदर काबिलियत है तो आपको कोई आगे बढ़ने से नहीं रोक सकता. हालांकि क्रिकेट में ऐसा नहीं है, खासकर भारतीय क्रिकेट में. भारत में कई ऐसे क्रिकेटर हुए हैं जो बेहद टैलेंटेड थे और उन्होंने अपने दमदार प्रदर्शन के बल पर टीम इंडिया (Indian Cricket Team) में जगह भी बनाई. इंटरनेशनल क्रिकेट में भी उन्होंने अपना लोहा मनवाया लेकिन इसके बावजूद वो रातों-रात टीम इंडिया से गायब हो गए. आइए आपको बताते हैं पांच ऐसे क्रिकेटरों के बारे में जो गेंद और बल्ले से काबिल थे लेकिन फिर भी वो भारतीय क्रिकेट टीम में अपनी जगह बरकरार नहीं रख पाए.
विजय भारद्वाज- साल 1999 का एलजी कप कोई भारतीय क्रिकेट फैन नहीं भूल पाएगा. नैरोबी में भारत, साउथ अफ्रीका, जिम्बाब्वे और केन्या के बीच खेली गई इस सीरीज में टीम इंडिया की ओर से एक ऑलराउंडर ने डेब्यू किया था, जिनका नाम विजय भारद्वाज था. इस जबर्दस्त ऑलराउंडर ने सीरीज में कुल 10 विकेट हासिल किये थे और साथ ही 89 रन भी बनाए. जिसके बाद उन्हें मैन ऑफ द सीरीज अवॉर्ड मिला. लेकिन जल्द ही इस ऑलराउंडर का करियर खत्म हो गया. ये खिलाड़ी भारत के लिए महज 3 टेस्ट, 10 वनडे ही खेल पाया.
टीनू योहानन भारतीय क्रिकेट टीम में जगह बनाने वाले केरल के पहले खिलाड़ी थे. साल 2001 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट डेब्यू करने वाले योहानन अच्छी लाइन लेंग्थ के साथ गेंदबाजी करते थे लेकिन वो भारत के लिए सिर्फ 3 टेस्ट और 3 वनडे मैच ही खेल सके. उनका इंटरनेशनल करियर सिर्फ एक साल के अंदर खत्म हो गया.
उड़ीसा के स्विंग गेंदबाज देबाशीष मोहंती भी उन भारतीय गेंदबाजों में शामिल हैं जो बेहद टैलेंटेड होने के बावजूद ज्यादा वक्त तक टीम इंडिया में जगह बरकरार नहीं रख पाए. मोहंती ने साल 1997 में अपना वनडे और टेस्ट डेब्यू किया था लेकिन उनका टेस्ट करियर सिर्फ 2 टेस्ट मैचों तक ही सीमित रहा और महज 4 साल के अंदर उनका वनडे करियर भी खत्म हो गया. मोहंती ने भारत के लिए 45 मैचों में 57 विकेट झटके थे.
मध्य प्रदेश के बल्लेबाज अमय खुरसिया, जिन्होंने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 21 शतक ठोके थे, उन्हें टीम इंडिया में साल 1999 में डेब्यू का मौका मिला. लेकिन महज 2 साल के बाद 2001 में उनका इंटरनेशनल करियर खत्म हो गया. खुरसिया को भारत के लिए 12 वनडे मैच खेलने का मौका मिला.
मुंबई के तेज गेंदबाज अविष्कार साल्वी जिन्हें भारत का ग्लेन मैक्ग्रा कहा जाता था, उनका करियर भी महज 4 वनडे तक ही सीमित रहा. 11 अप्रैल 2003 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ डेब्यू करने वाले साल्वी का इंटरनेशनल करियर 18 नवंबर 2003 को खत्म हो गया. साल्वी उसके बाद अगले 10 सालों तक घरेलू क्रिकेट खेले लेकिन उन्हें कभी टीम इंडिया में मौका नहीं मिला.
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