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लॉर्ड्स के मैदान पर खेले एक शॉट ने बदल दी एबी डिविलियर्स की जिंदगी, फिर नहीं थमे गेंदबाजों के आंसू!

क्या है एबी डिविलियर्स के करियर का टर्निंग प्वाइंट

क्या है एबी डिविलियर्स के करियर का टर्निंग प्वाइंट

एबी डिविलियर्स (AB de Villiers) को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में शूमार किया जाता है, उनके नाम 47 इंटरनेशनल शतक हैं

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    नई दिल्ली. टैलेंट किस चिड़िया का नाम है...ये आप साउथ अफ्रीका के धुरंधर बल्लेबाज एबी डिविलियर्स (AB de Villiers) से पूछिये. इस बल्लेबाज को दुनिया मिस्टर 360 डिग्री के नाम से जानती है. जिसका मतलब है कि मैदान का ऐसा कोई कोना नहीं है जहां एबी डिविलियर्स शॉट नहीं खेल सकते. डिविलियर्स की काबिलियत का आप इस बात से अंदाजा लगाइए कि वो एक ही गेंद पर कम से कम 4 शॉट खेलकर उसे बाउंड्री पार पहुंचा सकते हैं. जाहिर सी बात ये है टैलेंट ना सचिन तेंदुलकर के पास था और ना ही मौजूदा दौर के सबसे बड़े बल्लेबाजों में से एक विराट कोहली के पास. कहते हैं प्रतिभा आपको जन्म से ही मिलती है, बस उसे निखारना आपके हाथ में होता है. एबी डिविलियर्स ने जब साल 2004 में इंटरनेशनल क्रिकेट में कदम रखा तो वो इसी प्रतिभा के साथ उतरे थे लेकिन उनके खेल में वो बात नहीं थी जो आपको आज दिखती है. यकीनन डिविलियर्स अनुभव के साथ बेहतर हुए हैं लेकिन उनके करियर में बड़े बदलाव की एक वजह साल 2008 में खेला गया लॉर्ड्स टेस्ट भी है. डिविलियर्स ने इस मुकाबले में एक ऐसा शॉट खेला था जो उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट बन गया.

    डिविलियर्स के 'मिस्टर 360 डिग्री' बनने की कहानी
    साउथ अफ्रीका के इस बल्लेबाज (AB de Villiers) ने 17 दिसंबर 2004 को इंग्लैंड के खिलाफ पोर्ट एलिजाबेथ में टेस्ट डेब्यू किया था. डिविलियर्स पहले टेस्ट में 28 और 14 रनों की पारी ही खएल सके थे. डरबन टेस्ट की दूसरी पारी में उन्होंने नाबाद 52 रनों की पारी खेली और यहां से लोगों को पता चला कि डिविलियर्स नाम का खिलाड़ी अच्छी बल्लेबाजी भी कर सकता है. साल 2005 में सेंचुरियन के मैदान पर डिविलियर्स के बल्ले से पहला टेस्ट शतक निकला और साल 2008 में अहमदाबाद टेस्ट में इस बल्लेबाज ने नाबाद दोहरा शतक ठोक ये बता दिया कि डिविलियर्स दुनिया के किसी भी मैदान पर बल्लेबाजी कर सकता है.

    लॉर्ड्स टेस्ट में बदला डिविलियर्स का करियर
    क्रिकेट का मक्का कहे जाने वाले लॉर्ड्स के मैदान पर साउथ अफ्रीका और इंग्लैंड की भिड़ंत थी. इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 8 विकेट पर 593 रनों का विशाल स्कोर बना दिया. जवाब में साउथ अफ्रीका ने पहली पारी में 83 रनों पर 4 विकेट गंवा दिये और फिर क्रीज पर आए एबी डिविलियर्स. इस युवा बल्लेबाज ने एश्वेल प्रिंस के साथ मोर्चा संभाला. डिविलियर्स (AB de Villiers) ने गजब का धैर्य और संयम दिखाते हुए 100 से ज्यादा गेंद खेली और वो पूरी तरह सेट हो गए. हालांकि जब डिविलियर्स 42 रन पर थे तो उन्होंने इंग्लैंड के स्पिनर मॉन्टी पनेसर की गेंद पर एक गंदा शॉट खेला और वो आउट हो गए. डिविलियर्स ने जितनी मेहनत की थी वो सब बेकार हो गई.

    ड्रेसिंग रूम में लगी क्लास
    डिविलियर्स (AB de Villiers) सिर झुकाए ड्रेसिंग रूम में पहुंचे और फिर कुछ ऐसा हुआ जिसने इस खिलाड़ी की सोच ही बदल दी. साउथ अफ्रीका के कप्तान ग्रेम स्मिथ और कोच मिकी आर्थर उनसे पास गए और उन्हें सीधे तौर पर कहा- 'तुम्हारे अंदर जितना टैलेंट है, तुम वो नहीं दिखा रहे हो. हमें तुमसे तुम्हारे टैलेंट के मुताबिक परिणाम चाहिए. तुम अपना टैलेंट खराब कर रहे हो.' ग्रेम स्मिथ और मिकी आर्थर की इस बातचीत ने डिविलियर्स को अंदर से झकझोर कर रख दिया. डिविलियर्स ने अंदर ही अंदर उस गलती को कभी ना दोहराने की कसम ली जो उन्होंने मॉन्टी पनेसर की गेंद पर की थी.

    बदल गए डिविलियर्स
    लॉर्ड्स टेस्ट साउथ अफ्रीका की टीम ने किसी तरह ड्रॉ करा लिया लेकिन दूसरे टेस्ट में साउथ अफ्रीका ने 10 विकेट से जीत दर्ज की. इस जीत के हीरो रहे एबी डिविलियर्स (AB de Villiers) जिन्होंने लॉर्ड्स की गलती से सबक लेते हुए हेडिंग्ले के मैदान पर इंग्लैंड के गेंदबाजों की धज्जियां उड़ा दी. डिविलियर्स ने 174 रनों की जबर्दस्त पारी खेली. स्मिथ और आर्थर के शब्दों ने डिविलियर्स पर जादू सा कर दिया और इस बल्लेबाज को अपनी असल ताकत का अंदाज हुआ.

    लॉर्ड्स टेस्ट के बाद कितना बदले डिविलियर्स
    लॉर्ड्स टेस्ट के बाद डिविलियर्स (AB de Villiers) ने गेंदबाजों को जैसे खून के आंसू रुला दिये. उनके आंकड़े इस बात की तस्दीक भी करते हैं. डिविलियर्स ने लॉर्ड्स टेस्ट (2008) तक 41 टेस्ट खेले थे और इस दौरान उन्होंने 39.59 की औसत से 2613 रन बनाए, जिसमें महज 5 शतक शामिल थे. लॉर्ड्स टेस्ट के बाद डिविलियर्स ने 17 शतक और 33 अर्धशतक ठोक डाले और उन्होंने 57.49 के औसत से 6152 रन बनाए. टेस्ट ही नहीं वनडे में भी डिविलियर्स ने जैसे कोहराम मचा दिया.

    लॉर्ड्स टेस्ट के बाद उन्होंने (AB de Villiers) 161 वनडे मैच खेले जिसमें उन्होंने 60 से ज्यादा की औसत से 7430 रन कूटे. इस दौरान उनके बल्ले से 22 शतक निकले. इस दौरान डिविलियर्स ने महज 31 गेंदों में वनडे शतक ठोक वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया. सबसे तेज 150 और अर्धशतक जमाने का वर्ल्ड रिकॉर्ड भी डिविलियर्स के नाम है. ये आंकड़े साफ तौर पर कहते हैं कि कैसे डिविलियर्स ने साल 2008 के लॉर्ड्स टेस्ट में खेले उस खराब शॉट से सबक लिया और अपने करियर को पूरी तरह बदल दिया.

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