गावस्कर के बाद टेस्ट क्रिकेट में सहवाग जैसा सलामी बल्लेबाज नहीं देखा: सौरव गांगुली

सौरव गांगुली ने सहवाग को बतौर ओपनर खेलने के लिए कहा था (Virender Sehwag/Instagram)

सौरव गांगुली ने सहवाग को बतौर ओपनर खेलने के लिए कहा था (Virender Sehwag/Instagram)

साल 2004 में वीरेंद्र सहवाग ने पाकिस्तान के खिलाफ तिहरा शतक ठोककर इतिहास रच दिया था. उन्होंने 364 गेंदों में 309 रन की पारी खेली. वीरेंद्र सहवाग ने भारत के लिए 104 टेस्ट, 251 वनडे और 19 टी20 इंटरनेशनल मैच खेले हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 10, 2021, 11:50 AM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के अध्यक्ष और पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) ने भारतीय क्रिकेट को वीरेंद्र सहवाग (Virender Sehwag) जैसा ओपनर दिया. सहवाग ने अजय जडेजा के नेतृत्व में 1999 में पाकिस्तान के खिलाफ वनडे डेब्यू किया था, लेकिन गांगुली के नेतृत्व में इस बल्लेबाज ने सही चमक हासिल की. टेस्ट में छठे नंबर पर बल्लेबाजी कर रहे सहवाग ने 2002 में इंग्लैंड के खिलाफ पहली बार ओपनिंग की. बाद की कहानी सब जानते हैं कि किस तरह ओपनर बनने के बाद वह विस्फोटक बल्लेबाज बने.

वह इतने बड़े खिलाड़ी थे, लेकिन बल्लेबाजी मध्यक्रम में उन्हें मौका नहीं मिल रहा था. ऐसे में गांगुली ने इंग्लैंड दौरे पर उनसे कहा था कि रिजर्व खिलाड़ियों में बैठने का कोई औचित्य नहीं है. तुम्हें ओपन करना चाहिए. शुरू में वह इससे सहमत नहीं थे. उन्होंने कहा था कि मैंने कभी ओपनिंग नहीं की है और मैं मध्यक्रम का बल्लेबाज हूं. लेकिन गांगुली के समझाने के बाद सहवाग ओपन किया और वहीं से वह महान खिलाड़ी बन गए.

ICC T20 World Cup: आईपीएल वेन्यू पर ही खेले जाएंगे टी20 वर्ल्ड कप 2021 के मैच-रिपोर्ट

हाल ही में रिपब्लिक बांग्ला टीवी पर एक इंटरव्यू के दौरान सौरव गांगुली ने कहा कि सुनील गावस्कर के बाद टेस्ट क्रिकेट में मैंने दूसरा कोई इतना बड़ा ओपनर नहीं देखा. गांगुली ने इस दौरान सहवाग की जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा, ''सुनील गावस्कर के बाद टेस्ट मैच में सबसे बेहतरीन ओपनर बनकर उभरे. टेस्ट क्रिकेट में सलामी बल्लेबाज के रूप में सुनील गावस्कर का योगदान सबसे बड़ा है लेकिन इसके बाद वीरेंद्र सहवाग ही थे जिन्होंने ओपनिंग करते हुए कई मैच विनिंग पारियां खेली.''
गांगुली उन गिने चुने खिलाड़ियों में हैं, जिन्होंने हर भूमिका को बखूबी निभाया. जब उन्होंने कप्तानी संभाली तो टीम मैच फिक्सिंग कांड से जूझ रही थी. वह देश के ऑल टाइम बेस्ट कप्तान बने. रिटायर होने के बाद गांगुली शानदार कमेंटेटर बने. वह बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष बने. अब वह बीसीसीआई के अध्यक्ष हैं.

Road Safety World Series: तूफानी फिफ्टी जड़ने के बाद केविन पीटरसन बोले-भारत के खिलाफ खेलने के लिए तैयार

सौरव गांगुली ने 2000 के दशक में टीम इंडिया की कमान संभाली. भारत इस वक्त ऑस्ट्रेलिया के खराब दौरे से गुजर रहा था. टीम इंडिया तीन टेस्ट हार चुकी थी और केवल एक टेस्ट जीत सकी थी. भारत 0-2 से दक्षिण अफ्रीका से हारा था. इस पर गांगुली ने कहा, ''मैंने यह सीखा कि यदि मुझे जिम्मेदारी दी जाएगी तो मैं अपना बेस्ट दूंगा. 1999 (2000) में जब सचिन तेंदुलकर ने कप्तानी छोड़ी तो मुझे पता नहीं था कि मैं चार्ज संभालने वाला हूं. मेरी और सचिन की उम्र लगभग बराबर थी. कोई भी सचिन के अलावा अन्य किसी को कप्तान नहीं देखना चाहता था. लेकिन सचिन कप्तान नहीं बने रहना चाहते थे. लिहाजा मैंने कप्तानी संभाली और बाकी सब जानते हैं.''
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज