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क्या अब भी रवि शास्त्री  को कुछ भी नहीं कहेगा बीसीसीआई?

विमल कुमार@Vimalwa | News18Hindi
Updated: March 5, 2020, 7:43 AM IST
क्या अब भी रवि शास्त्री  को कुछ भी नहीं कहेगा बीसीसीआई?
न्यूजीलैंड दौरे पर भारतीय टीम को वनडे और टेस्ट सीरीज में क्लीन स्वीप का सामना करना पड़ा. (फाइल फोटो)

किसी सीरीज में भारतीय टीम (Indian Team) के खिलाड़ियों की नाकामी के बीच टीम इंडिया (Team India) के हेड कोच (Head Coach) रवि शास्‍त्री (Ravi Shastri) हर बार बच निकलते हैं.

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क्राइस्टचर्च. समय से दो दिन पहले टेस्ट मैच और सीरीज़ के ख़त्म होने से टीम इंडिया (Team India) के बल्लेबाज़ों और गेंदबाज़ों की भारत में जबरदस्त आलोचना हो रही है और होनी भी चाहिए. लेकिन, खिलाड़ियों की इस नाकामी के बीच में हर बार कोच रवि शास्त्री (Ravi Shastri) कैसे बच निकलते हैं? आखिर, इतनी करारी हार के बाद बीसीसीआई अध्यक्ष (BCCI President) सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) उनसे बात भी नहीं करेंगे? सीरीज़ हारने के बाद कोच मीडिया के सामने नहीं आए. पहले टेस्ट मैच में हारने के बाद भी नहीं आए थे. दूसरे टेस्ट से ठीक पहले जब वो प्रेस से रुबरु हुए तो वो भी इसलिए क्योंकि एक सीनियर पत्रकार ने उनसे निजी तौर पर गुज़ारिश की थी. मगर, प्रेस कांफ्रेंस में रवि का अंदाज़ वही निराला रहा. बातें उन्होंने वैसी ही की जैसे ये लगा कि वो अब भी कमेंटेटर ही हैं कोच नहीं.

धर्मशाला में क्यों नहीं रखा अभ्यास शिविर?
सवाल ये भी है कि कोच के तौर पर शास्त्री (Ravi Shastri) ने बोर्ड से इस बात की ज़िद क्यों नहीं कि टीम को कम से कम 2-3 अभ्यास मैच मिलें ताकि हरी पिचों और मौसम से अभ्यस्त हुआ जा सके? क्रिकेट की इतनी बेहतरीन समझ रखने वाले कोच ने न्यूज़ीलैंड रवाना होने से पहले बीसीसीआई को ये प्लान क्यों नहीं दिया कि या तो धर्मशाला या फिर रोहतक में कैंप लगाया जाए जहां न्यूज़ीलैंड के बेहद करीब वाली पिचें और मौसम मिल सकता है.

अहम मौकों पर टीम के बचाव में नहीं आते रवि शास्‍त्री



पूरे दौरे पर अक्सर नैट प्रेक्टिस में हेड कोच दिखे, लेकिन ज्यादातर मौकों पर बल्लेबाज़ों की समस्या विक्रम राठौड़ सुलझाते और बात-चीत करते दिखे तो गेंदबाज़ों के साथ भरत अरुण जो कि गेंदबाज़ी कोच हैं. कई बार ये समझना मुश्किल हुआ कि आखिर शास्त्री (Ravi Shastri) की इस टीम में भूमिका है तो क्या है. मैंने जॉन राइट को भी टीम इंडिया के साथ काम करते देखा है, ग्रेग चैपल को भी देखा, डंकन फ्लेचर को भी देखा और अनिल कुंबले को भी. कोच की हस्ती और योग्यता कैसी भी रही हो, नतीजे कैसे भी रहें हों लेकिन नैट प्रैक्टिस के दौरान ये ज़ाहिर हो जाता था कि हेड कोच की भूमिका टीम में एक ख़ास होती है. एक बात चैपल और शास्त्री में सामान्य है और ये कि हारने के बाद या फिर बुरे समय में जब टीम गुज़र रही होती है तो बचाव करने के लिए वो नहीं आते हैं. जबकि राइट और कुंबले इस मामले में बिल्कुल अलग थे. वो हमेशा उस वक्त प्रेस से बात-चीत करते जब टीम संकट के दौर से गुज़रती. रविचंद्रन अश्विन जैसे सीनियर खिलाड़ी का प्रेस कांफ्रेस तक में बचाव नहीं करना भी थोड़ा अजीब लगा. जरूरी नहीं है कि कप्तान की हर बात पर हामी ही भरी जाए. सार्वजनिक तौर पर कोच-कप्तान की अलग राय होना अंत्तराष्ट्रीय क्रिकेट में कोई अजीब बात नहीं है. कोहली और शास्त्री के बीच बहुच अच्छा तालमेल और दोस्ताना संबध हैं ये बहुत अच्छी बात है लेकिन कुछ मौके पर कोच को कप्तान के साथ ये बात करने की भी जरूरत होती है जिसे वो नज़रअंदाज़ कर रहा होता है.



श्रीलंका-वेस्टइंडीज को हराने से महान टीम नहीं बन जाती टीम इंडिया
बहरहाल, पिछले कई सालों से रवि शास्त्री (Ravi Shastri) ये दावा कर रहे हैं कि मौजूदा टीम भारतीय इतिहास की सबसे शानदार टीम है. इतिहास रचने वाली टीम है. लेकिन, श्रीलंका के ख़िलाफ़ दो बार लगातार टेस्ट सीरीज़ जीतना या फिर वेस्टइंडीज़ को घर या कैरेबियाई ज़मीं पर पीटना आपको सर्वकालीन महान टीम का दर्जा नहीं दिला सकता. आज के दौर में अगर साउथ अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूज़ीलैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे मुल्कों में 4 सीरीज़ खेलकर आप तीन गंवा दें, तो आप भी कोई महानतम नहीं बल्कि एक अच्छी टीम भर ही हैं. कोई शास्त्री को ये बात बताए क्योंकि वो न तो अख़बार पढ़ते हैं और न ही टीवी देखते हैं. लेकिन, ख़बर उन्हें हर बात की होती है!  इतना ही नहीं आईसीसी टूर्नामेंट में भी शास्त्री-कोहली की जोड़ी के पास न तो टी20 वर्ल्ड कप की ट्राॅफी है न ही वन-डे वर्ल्ड कप की. इत्तेफाक से 2019 वर्ल्ड कप के दौरान भी शास्त्री ने प्रेस से कोई बात नहीं की थी. हां, इस दौरान बीच-बीच में उन्हें जब अपने ‘मन की बात ‘ करनी हो तो वो कुछ पत्रकारों से साथ संवाद कर लेते है.

शास्‍त्री से सवाल क्यों नहीं?
अगर वर्ल्ड कप के बाद सिर्फ बैटिंग कोच संजय बांगड़ को बलि का बकरा बनाया गया तो न्यूज़ीलैंड में हार के बाद हेड कोच रवि शास्‍त्री (Ravi Shastri) से गंभीर सवाल तो हो ही सकते हैं. ये तो पूछा जा ही सकता है कि आखिर कमी किस बात की रही. तैयारी में कमी का बहाना इसलिए नहीं बनाया जा सकता है कि हर दौरे पर टीम इंडिया के पहुंचने से पहले भारत ए टीम टेस्ट स्पेशलिस्ट के साथ पहुंच जाती है. आखिर, इतने पैसे ए टीम के शेडो दौरे पर खर्च करने की क्या जरूरत है जब नतीजा वही आना है.

इंतज़ार कीजिए, शायद अब नए मुख्य चयनकर्ता ही शास्त्री से सवाल पूछेंगे. बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली शायद ही सीधे-सीधे इस मामले में कूदें. लेकिन, इतना तय है कि अगर टी20 वर्ल्ड कप और उसके बाद ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज़ में अगर टीम इंडिया फिर से नाकाम होती है तो कोच की छुट्टी होना तय है.

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First published: March 5, 2020, 7:39 AM IST
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