अमित मिश्रा: सुपर स्टार ना सही, मगर किसी प्रेरणा से कम भी नहीं!

अमित मिश्रा: सुपर स्टार ना सही, मगर किसी प्रेरणा से कम भी नहीं!
अभ्‍यास सत्र के दौरान विराट कोहली के साथ अमित मिश्रा (फाइल फोटो)

2003 में डेब्‍यू करने वाले अमित मिश्रा (Amit Mishra) ने अभी तक भारत की तरफ से सिर्फ 36 वन-डे, 22 टेस्ट और 10 टी20 ही खेले.

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नई दिल्‍ली. लेग स्पिनर अमित मिश्रा (Amit Mishra). ये नाम सुनते ही आपके जहन में पहली तस्वीर क्या उभरती है? टीम इंडिया (Team India) का पूर्व खिलाड़ी? रिटायर हो गया है ना? अरे नहीं अभी आईपीएल में दिल्ली के लिए तो खेलता है ना? एक आम क्रिकेट प्रेमी के लिए इस खिलाड़ी का नाम सुनते ही शायद कुछ ऐसे ही ख़्याल आते हैं. शायद ही कोई इस बात को लेकर अमित मिश्रा को याद करता है कि अरे यार, वही मिश्रा ना जिसने आईपीएल (IPL) में एक या दो नहीं बल्कि रिकॉर्ड तीन बार हैट्रिक जमाई है. शायद ही कोई आपको ये कहे कि अरे यार मिश्रा को कौन नहीं जानता है, आईपीएल में सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाला भारतीय गेंदबाज़ तो वही है. कोई ये भी नहीं कहेगा कि मिश्रा ने आईपीएल इतिहास में सिर्फ लसित मलिंगा के बाद सबसे ज़्यादा विकेट हासिल किए हैं. भारतीय क्रिकेट शायद ही अमित मिश्रा को एक ऐसे जुझारु खिलाड़ी के तौर पर याद करे कि बार-बार ग़लत तरीके से नज़रअंदाज़ किए जाने के बावजूद ये गेंदबाज़ उम्मीद का दामन नहीं छोडता है.

लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान मैनें मिश्रा से यही सवाल किया तो उनका कहना था “जब मैं बचपन में दिल्ली के लिए खेलने की कोशिश कर रहा था तो मुझे कभी सलेक्ट नहीं किया गया. कुछ भी वजह बताकर इनकार कर दिया जाता था. जब हरियाणा ने मुझे मौका दिया तो यही लोग कॉल करके बुलाने लगे. शुरु से ही मुझे एक-एक स्थान के लिए संघर्ष की आदत सी पड़ गई.

अनिल कुंबले का उत्तराधिकारी माना जाता था
कितनी हैरान करने वाली बात हैं ना अमित मिश्रा ने अपने वन-डे करियर की शुरुआत 2003 में ही कर डाली थी, जब उन्हें अनिल कुंबले (Anil Kumble) जैसे दिग्गज का उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जाने लगा था. जिस समय रवींद्र जडेजा और अश्विन जैसे खिलाड़ी अपने जिले की टीमों में भी स्थान बनाने के लिए जूझ रहे थे, उस समय मिश्रा रिकी पोटिंग जैसे गेंदबाज़ों के खिलाफ अपना हुनर साबित कर रहे थे.
करीब 5 साल के इंतज़ार के बाद मिश्रा को पहली बार टेस्ट क्रिकेट खेलने का मौका मिला. 2008 में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ टेस्ट सीरीज इत्तेफाक से कुंबले की आखिरी सीरीज़ थी. 37 साल के मिश्रा ने तमाम कमबैक करने के बावजूद अब तक सिर्फ 36 वन-डे, 22 टेस्ट और 10 टी20 ही भारत के लिए खेले.



जिम्‍बाब्‍वे के ख़िलाफ 2013 में 5 मैचों की वन-डे सीरीज़ में मिश्रा ने कमाल की गेंदबाज़ी करते हुए 15 विकेट लिए और मैन ऑफ द सीरीज़ बने, लेकिन भारत लौटते ही अगले मैच में उन्हें ड्रॉप कर दिया गया. मैं सोचता हूं कि अक्सर मेरे साथ ही ऐसा क्यों हुआ कि अच्छा खेल, संतोषजनक खेल दिखाने के बावजूद मुझे मौक नहीं मिले, लेकिन मैनें कभी दिल छोटा नहीं किया. हर बार नाइंसाफी को मैनें चुनौती के तौर पर देखा और भाग्यशाली रहा कि आईपीएल में लगातार खुद को साबित करता रहा.

करोड़ों खर्च करती हैं फ्रेंचाइजी

ये बात तो सही है कि अगर मिश्रा में दम नहीं होता तो साल दर साल निर्मम तरीके से पेशेवर फ्रेंचाइजी इस गेंदबाज़ पर हर साल करोड़ों रुपये तो नहीं खर्च करते, लेकिन भारत के लिए वापसी करना मिश्रा का एक तरह से पूरे जीवन का मकसद ही बन गया. मुझको करीब से जानने वालों को पता है कि आप जितना मुझे नीचा दिखाने की कोशिश करेंगे तो मैं एक कदम बेहतर तरीके से वापसी करुंगा. आज भले ही युवा युजवेंद्र चहल, कुलदीप यादव और अश्विन-जडेजा जैसे खिलाड़ियों की मौजूदगी से मिश्रा के लिए एक और वापसी की उम्मीद मुश्किल तो जरूर है लेकिन असंभव नहीं. आखिर ऐसा होता तो मिश्रा अभी भी 500 और इंटरनेशनल विकेट का सपना नहीं देखते. चलते-चलते हमने मिश्रा से ये पूछ डाला कि अगर कभी उन्हें अपनी आत्मकथा लिखनी पड़ी तो उसका टाइटल क्या रखेंगे? “हार के बाद भी जीत है”… कुछ सेकंड सोचने के बाद मिश्रा ने जवाब दिया. वाकई में जिस समय कोरोना के चलते हम सभी लोग लॉकडाउन से परेशान हैं, इस लेग स्पिनर के जीवन संघर्ष से हमें भी थोड़ी प्रेरणा मिल सकती है.

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