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बतौर सलेक्टर आपको ऐसे फैसले लेने होंगे, जो दिग्गजों के खिलाफ होंगे: एमएसके प्रसाद

धोनी की रिटायरमेंट से निपटने को एमएसके प्रसाद ने काफी मुश्किल चरण बताया. (MS Dhoni/Instagram)

प्रसाद ने कहा कि ऐसे कई उदाहरण हैं जब वह भारतीय क्रिकेट टीम के भविष्य के हित के लिए खेल के दिग्गजों के खिलाफ गए. चयन समिति के लिए सबसे महत्वपूर्ण चरणों में से एक पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की रिटायरमेंट से निपटना था.

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    नई दिल्ली. पूर्व भारतीय सलेक्टर एमएसके प्रसाद (MSK Prasad) का टीम इंडिया के साथ बतौर इंडियन टीम चीफ सलेक्टर कार्यकाल विवादों से भरा हुआ रहा था. कई बार इस पूर्व क्रिकेटर और उनकी समिति को उनके आश्चर्यजनक फैसलों के लिए सोशल मीडिया पर आलोचना का सामना करना पड़ा. आईसीसी वनडे वर्ल्ड कप 2019 के लिए अंबाती रायडू की जगह विजय शंकर को चुने जाने के उनके फैसले की भी जमकर आलोचना हुई थी. हाल ही में प्रसाद ने चयनकर्ता के रूप में अपने कार्यकाल के बारे में विस्तार से बात की.

    46 वर्षीय इस पूर्व चयनकर्ता ने खुलासा किया कि चयनकर्ताओं के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने सभी की भावनाओं और प्यार को किनारे रखते हुए कुछ मुश्किल फैसले लिए. प्रसाद ने कहा कि ऐसे कई उदाहरण हैं जब वह भारतीय क्रिकेट टीम के भविष्य के हित के लिए खेल के दिग्गजों के खिलाफ गए. चयन समिति के लिए सबसे महत्वपूर्ण चरणों में से एक पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) की रिटायरमेंट से निपटना था.

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    एमएसके प्रसाद ने क्रिकेट डॉट कॉम से बात करते हुए कहा, ''एक चयनकर्ता के रूप में आपकी यात्रा के दौरान भारतीय क्रिकेट के भविष्य के हित में आपको खेल के दिग्गजों के खिलाफ भी कुछ कड़े फैसले लेने होते हैं. सही उत्तराधिकारी की पहचान करना चयनकर्ता का सबसे महत्वपूर्ण काम है. आपको चयनकर्ता के रूप में निष्पक्ष होना होगा और कठोर निर्णय लेने के बारे में भावुक नहीं होना चाहिए.'' उन्होंने आगे कहा, ''और चयन समिति होने का कारण उत्तराधिकारी बनाना है. कोई दूसरा धोनी या सचिन (तेंदुलकर) नहीं हो सकता, क्योंकि वे बहुत ही अनोखे हैं और उनका योगदान अमूल्य है. कोई भी इस पर सवाल नहीं उठा सकता है.''

    एमएसके प्रसाद और उनकी समिति को भारतीय क्रिकेट टीम में उनके योगदान के लिए उतनी प्रशंसा और मान्यता नहीं मिली, जितनी के वह हकदार थे? पूर्व चयनकर्ता से जब इस बारे में सवाल किया गया तो प्रसाद ने कहा कि उनका काम पूरी दुनिया के सामने है. इस साल की शुरुआत में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट सीरीज की बात करते हुए प्रसाद ने कहा कि मुख्य खिलाड़ियों की अनुपस्थिति में युवाओं को प्रदर्शन करते हुए देखने से ज्यादा फायदेमंद कुछ नहीं है.

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    उन्होंने कहा, ''आपको वह करने की जरूरत है, जो आपको करना है. हमारा काम वहां दिख रहा है. अगर भारतीय टीम के सात सुपरस्टार अहम मैच में नहीं खेलते हैं और सात युवा उनकी जगह कदम रखते हैं. ये सभी इंडिया ए की तरफ से हैं और मैच जीतते हैं. यह हमारी कड़ी मेहनत के लिए एक बड़ी तारीफ है.''

    पूर्व चयनकर्ता ने भारत के विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने पर भी उत्साह व्यक्त किया. भारतीय टीम में चुने गए अधिकांश खिलाड़ियों ने चयनकर्ता के रूप में एमएसके प्रसाद के कार्यकाल में पदार्पण किया था. उन्होंने कहा, ''इसके लिए कोई दो तरीके नही हैं. इससे आपको जितनी संतुष्टि और खुशी मिलती है. चयन की दृष्टि से हमने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया.हमने इस भारतीय टीम को विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल खेलने में मदद करने में अपनी छोटी सी भूमिका निभाई. यह टीम पूरी तरह से इसकी हकदार है, क्योंकि वे पिछले चार सालों से नंबर एक है. अब, मैं फाइनल देखने का इंतजार नहीं कर सकता.''
    Published by:Mridula Bhardwaj
    First published: