होम /न्यूज /खेल /वर्ल्ड कप 2011 जीतना नेहरा के लिए खास, बोले-खुशी है चोटिल होने पर घर नहीं लौटा, मुझे धोनी ने रोका

वर्ल्ड कप 2011 जीतना नेहरा के लिए खास, बोले-खुशी है चोटिल होने पर घर नहीं लौटा, मुझे धोनी ने रोका

आशीष नेहरा 2011 विश्व कप जीतने वाली टीम का हिस्सा थे. लेकिन चोट के कारण वो सिर्फ तीन मैच ही खेले थे. ( ashish nehra/twitter)

आशीष नेहरा 2011 विश्व कप जीतने वाली टीम का हिस्सा थे. लेकिन चोट के कारण वो सिर्फ तीन मैच ही खेले थे. ( ashish nehra/twitter)

2011 वनडे वर्ल्ड कप (2011 ODI World Cup) जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज आशीष नेहरा (Ashis ...अधिक पढ़ें



    नई दिल्ली. पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज आशीष नेहरा (Ashish Nehra) भी 2011 का वनडे वर्ल्ड कप (2011 ODI World cup) जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे. वो चोट के कारण टूर्नामेंट में पाकिस्तान के खिलाफ सेमीफाइनल समेत सिर्फ तीन मैच ही खेल पाए थे. हालांकि, सेमीफाइनल में उन्होंने शानदार गेंदबाजी की. उन्होंने 10 ओवर में सिर्फ 33 रन देकर दो विकेट लिए थे. इसी मैच में उनकी ऊंगली में चोट लग गई थी, जिसके कारण वो श्रीलंका के खिलाफ फाइनल नहीं खेले. इसका उन्हें बहुत मलाल नहीं है. 2011 वर्ल्ड कप जीत के 10 साल पूरे होने पर 41 साल के इस पूर्व गेंदबाज ने हमारी सहयोगी वेबसाइट क्रिकेट नेक्स्ट से खास बातचीत में पुरानी यादें ताजा कीं और उस वर्ल्ड कप से जुड़े अपने अनुभव और किस्से साझा किए. आप भी पढ़िए इस इंटरव्यू से जुड़े खास अंश.

    आप 2011 के वर्ल्ड कप को किस तरह देखते हैं?
    बीते 10 साल बहुत तेजी से गुजर गए. जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं तो ऐसा लगता कि नहीं है कि 2011 वर्ल्ड कप को बीते 10 साल हो गए हैं. जब आप अकेले बैठते हैं और उस टूर्नामेंट के बारे में सोचते हैं तो आपको शानदार पल याद आते हैं.

    आपको टूर्नामेंट को लेकर क्या-क्या याद है ?
    जब आप विश्व कप जैसा टूर्नामेंट जीतते हैं. हालांकि, मेरे लिए तो वो वर्ल्ड कप खास नहीं था. क्योंकि मैं पीठ और दूसरी चोटों से परेशान था. आखिर में मुझे इस बात की खुशी है कि मैं विश्व कप जीतने वाली टीम का हिस्सा था. मैं शुरुआती मुकाबले नहीं खेल पाया था. वहीं, पाकिस्तान के खिलाफ सेमीफाइनल में फील्डिंग के दौरान हाथ की उंगली में चोट लग गई थी. इसी वजह से मैं फाइनल नहीं खेल पाया. मेरे लिए तो पूरा टूर्नामेंट उतार-चढ़ाव भरा रहा. भारतीय टीम के लिए इससे बेहतर विश्व कप नहीं हो सकता था. जब आप घर में खेलते हैं, तो लोग घरेलू फायदे को लेकर बात करते हैं और ऐसा क्रिकेट में होता भी है. क्रिकेट ऐसा खेल है कि घर और बाहर खेलने में बहुत फर्क आ जाता है. जब आप अच्छा खेलते हैं तो किसी भी टीम को हरा सकते हैं. लेकिन घर में खेलने का दबाव भी होता है. जब आप एयरपोर्ट, होटल जाते हैं तो वहां मौजूद लोग आपसे कहते हैं कि किसी भी सूरत में वर्ल्ड कप जीतना है. इसलिए 2011 में हम पर दबाव तो बहुत था. लेकिन यादें भी बड़ी हैं.

    आपने 2011 वर्ल्ड कप में तीन मैच ही खेले और इसमें से एक पाकिस्तान के खिलाफ सेमीफाइनल था. आप इसे किस तरह देखते हैं, क्योंकि ये आपका आखिरी वनडे भी साबित हुआ ?

    ये दोनों देशों के बीच एक मैच से ज्यादा था. किसी ने भी ये नहीं सोचा था कि भारत और पाकिस्तान वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में आमने-सामने होंगे. इस मैच को लेकर बहुत ज्यादा बातें हो रही थी. टूर्नामेंट में इससे बड़ा कोई मुकाबला नहीं हुआ था. हमने सेमीफाइनल में बड़ा स्कोर नहीं किया था (269/9). लेकिन सभी गेंदबाजों ने अच्छी बॉलिंग की. युवराज सिंह पांचवें गेंदबाज थे और हर गेंदबाज ने दो-दो विकेट लिए. एक समय पाकिस्तान के बल्लेबाजों ने अच्छी पार्टनरशिप कर ली थी. हमारे ऊपर दबाव था. हालांकि, जब आप दिन और रात लगातार प्रैक्टिस करते हैं तो इस तरह के मुकाबलों के लिए अनुभवी हो जाते हैं और हमने पाकिस्तान के खिलाफ इसी अनुभव का इस्तेमाल किया.

    गंभीर की पारी, धोनी का सिक्स और सचिन के आंसू: भूले नहीं होंगे वर्ल्ड कप फाइनल की वो रात
    IPL 2021: तीसरा खिताब जीतने के लिए इस प्लेइंग XI के साथ उतर सकती है कोलकाता नाइट राइडर्स

    क्या आपको लगता है कि वर्ल्ड कप में सिर्फ तीन मैच से ज्यादा खेल सकते थे ?
    वर्ल्ड कप से पहले जब भारतीय टीम साउथ अफ्रीका में वनडे सीरीज खेल रही थी तो मैं बैक इंजरी के कारण टीम से अंदर-बाहर हो रहा था. वर्ल्ड कप से ठीक पहले ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हमने बेंगलुरु में एक प्रैक्टिस मैच खेला. इसमें मैंने 2 ओवर गेंदबाजी की. इसके बाद न्यूजीलैंड के खिलाफ चेन्नई में हुए अभ्यास मैच में 7.1 ओवर में 55 रन देकर दो विकेट लिए. इस जगह मुझे लग गया था कि मैं वर्ल्ड कप नहीं खेल पाऊंगा. लेकिन प्रवीण कुमार (Praveen Kumar) चोटिल हो गए. उनकी जगह श्रीसंत टीम में आए. प्रैक्टिस मैच के बाद मैंने महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) और सचिन तेंदुलकर(Sachin Tendulkar) को कहा कि मुझे लगता है कि मैं ये वर्ल्ड कप नहीं खेल पाऊंगा, क्योंकि पीठ की चोट ज्यादा तकलीफ दे रही है. तब धोनी ने कहा था कि मुझे कुछ हफ्ते इंतजार करने चाहिए क्योंकि प्रवीण पहले ही चोटिल हो गए हैं और जहीर खान को छोड़ दें, तो टीम की तेज गेंदबाजी आक्रमण में अनुभव नहीं है. इसलिए मुझे खेलना होगा.

    अब मुझे लगता है कि मैंने घर वापस न जाकर अच्छा किया. एक खिलाड़ी के लिए हर मैच अहम होता है. मेरे लिए ऐसा नहीं था कि मैं वर्ल्ड कप फाइनल खेल रहा हूं. मैं हर मैच में कुछ न कुछ अलग ही करता. क्योंकि हर ओवर में वही 6 गेंद होती है. मेरे लिए व्यक्तिगत तौर पर टूर्नामेंट भले ही बहुत अच्छा न रहा, लेकिन मुझे इस बात की खुशी है कि मैं वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम का हिस्सा बना.

    Tags: Ashish nehra, Cricket news, ICC ODI World Cup 2011, Icc world cup 2011

    टॉप स्टोरीज
    अधिक पढ़ें