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युवराज सिंह के बाद इस भारतीय ओपनर को भी हुआ कैंसर, फिर भी हिम्मत नहीं हारी, ठोका शानदार शतक

News18Hindi
Updated: February 14, 2020, 2:52 PM IST
युवराज सिंह के बाद इस भारतीय ओपनर को भी हुआ कैंसर, फिर भी हिम्मत नहीं हारी, ठोका शानदार शतक
युवराज सिंह ने आईसीसी वर्ल्ड कप 2011 के बाद खुलासा किया था कि उन्हें कैंसर है. (फाइल फोटो)

इससे पहले भारतीय क्रिकेट टीम (Indian Cricket Team) के पूर्व ऑलराउंडर युवराज सिंह (Yuvraj Singh) भी कैंसर (Cancer) से लड़कर मैदान पर वापसी कर चुके हैं.

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  • Last Updated: February 14, 2020, 2:52 PM IST
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नई दिल्ली. कैंसर (Cancer) शब्द सुनते ही मानो आंखों के आगे अंधेरा छा जाता है. जिंदगी एकदम से बदल जाती है. सबकुछ धुंधला सा जाता है. भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ऑलराउंडर युवराज सिंह (Yuvraj Singh) कैंसर की जंग लड़ चुके हैं. और जीत भी चुके हैं. युवराज ने आईसीसी वर्ल्ड कप 2011 में टीम इंडिया को चैंपियन बनाया. मैन ऑफ द टूर्नामेंट रहे और उसके बाद खुलासा किया कि उन्हें कैंसर है. हालांकि उसके बाद उन्होंने इलाज के बाद कैंसर को हराकर मैदान पर फिर से वापसी की. मगर कैंसर को हराकर मैदान पर वापसी करने वाले युवराज अकेले भारतीय खिलाड़ी नहीं हैं.

दरअसल, इस खिलाड़ी को 15 साल की उम्र में ब्लड कैंसर हो गया था. छोटी सी उम्र में दूसरे स्टेज का कैंसर होने के बाद उनकी जिदंगी मानो क्रिकेट के मैदान को पीछे छोड़कर अस्पतालों के कमरों तक में सिमट गई. मगर उन्होंने हार नहीं मानी और पूरी तरह ठीक होने के तीन साल बाद जब रणजी ट्रॉफी (Ranji Trophy) में डेब्यू किया तो शानदार शतक ठोककर न केवल विरोधी टीम के हौसले तोड़े, बल्कि कैंसर को भी एक तरह से ठेंगा दिखा दिया. उत्तराखंड के ओपनर कमल सिंह कनियाल (Kamal Singh Kaniyal) ने बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र के खिलाफ रणजी ट्रॉफी डेब्यू करते हुए शानदार 101 रन की पारी खेली. 160 गेंदों की पारी में उन्होंने 17 चौके भी जड़े.

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कमल सिंह कनियाल ने 19 साल की उम्र में रणजी डेब्यू किया. (फाइल फोटो)


15 साल का था जब...

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कमल सिंह कनियाल (Kamal Singh Kaniyal) ने बताया, 'पिता के साथ ब्लड चैकअप के लिए गया था. प्लेटलेट्स काउंट तेजी से गिरते देख डॉक्टर ने पिता को सलाह दी कि आगे के इलाज के लिए नोएडा चले जाएं. तब मेरी उम्र 15 साल थी. नोएडा में सारे टेस्ट किए. और जब रिपोर्ट आई तो पिता का माथा सन्न रह गया. मुझे ब्लड कैंसर था. हालांकि मेरे परिवार ने मुझे बीमारी के बारे में ज्यादा कुछ नहीं बताया. तब मैं जल्दी-जल्दी बीमार हो जाया करता था और प्लेटलेट्स तेजी से गिरते थे. नोएडा के अस्पताल में मुझे बताया गया कि मेरे खून में संक्रमण है. मगर मैंने डॉक्टरों को कहते सुना कि मुझे कैंसर (Cancer) है. मैंने खुद से कहा कि अब मेरा इलाज शुरू हो गया है और मुझे चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है. मैं क्रिकेट खेल सकूंगा या नहीं, तब ये बातें मेरे दिमाग में नहीं थी.' कमल के पिता सेना के रिटायर्ड हवलदार हैं. उन्होंने कभी भी कमल को नकारात्मक नहीं होने दिया.

आधे शरीर में घुस गया था कैंसर
कमल सिंह कनियाल (Kamal Singh Kaniyal) ने कहा, 'जब मुझे इसका पता चला तो कैंसर दूसरी स्टेज पर पहुंच चुका था. मुझे बताया गया कि मेरा 47 प्रतिशत शरीर इससे प्रभावित हो चुका है. उत्तर प्रदेश के लिए अंडर14 वर्ग के ट्रायल में 40 दावेदारों के बीच से चुने गए, जबकि अंडर 16 के ट्रायल में 60 दावेदारों के बीच से चुने गए कमल सिंह कनियाल कभी अंतिम टीम में जगह नहीं बना सके. कैंसर ने ये भी सुनिश्चित कर दिया कि अगले साल भी उनके लिए करने को बहुत कुछ नहीं है.
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उत्तराखंड के कमल सिंह ने महाराष्ट्र के खिलाफ ओपनिंग करते हुए रणजी ट्रॉफी में अपना डेब्यू शतक के साथ किया. (फाइल फोटो)


कीमोथेरेपी के पांच राउंड
कमल कनियाल (Kamal Singh Kaniyal) के अनुसार, डॉक्टरों ने कहा कि रिकवरी के अवसर अच्छे हैं. कीमोथेरेपी के पांच राउंड हुए. मुझे बिल्कुल भी नहीं पता था कि इसका क्या मतलब होता है. मेरे आसपास सकारात्मक लोग रहते थे, जो मुझे खुश और प्रोत्साहित रखते थे. मेरा परिवार मुझे टाइगर कहता था. लड़का बहुत ही बहादुर है, बस ये लाइन सुनकर जोश आ जाता था.

छह महीने बाद डॉक्टरों ने कहा- अब तुम ठीक हो
कैंसर (Cancer) का इलाज छह महीने तक चला. इसके बाद डॉक्टरों ने कहा कि अब तुम ठीक हो, लेकिन घर पर एहतियात बरतनी होगी. इसके बाद मुझे पूरी तरह ठीक होने में एक साल का वक्त लग गया. इस घातक बीमारी से उबरने के बाद कमल ने जो पहला काम किया, वो मैदान पर उतरने का था.

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रणजी ट्रॉफी में महाराष्ट्र के खिलाफ उत्तराखंड को 270 रनों का लक्ष्य मिला है.


1 दोहरे शतक समेत तीन सेंचुरी, कुल 800 रन... ऐसे पहुंचे रणजी ट्रॉफी टीम में
जब उत्तराखंड की टीम अंडर19 मुकाबले खेल रही थी तब कमल सिंह ने टीम में वापसी की. तब तक उत्तराखंड की खुद की क्रिकेट एसोसिएशन बन चुकी थी. तीन साल पहले लोढ़ा समिति की सिफारिशों से पहले उत्तराखंड एसोसिएशन का पूर्णकालिक सदस्य नहीं था. मगर समिति की सिफारिशों ने उसके लिए रास्ते खोल दिए और स्‍थानीय क्रिकेटरों को उत्तर प्रदेश की दया पर निर्भर नहीं रहना पड़ा. कमल सिंह ने अंडर19 मुकाबलों में एक दोहरे शतक, दो शतक और तीन अर्धशतक की मदद से बनाए 800 से ज्यादा रनों की बदौलत रणजी टीम में स्‍थान हासिल किया.

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कमल सिंह कनियाल ने उत्तराखंड के लिए अंडर19 टूर्नामेंट में बेहतरीन प्रदर्शन कर रणजी टीम में जगह बनाई.


आगे का किसने देखा है...
अंडर19 टूर्नामेंट में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए कमल सिंह ने रणजी टीम में जगह बनाई. बारामती में महाराष्ट्र के खिलाफ डेब्यू करते हुए शतक लगाने के बाद जब उनसे भविष्य को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'आगे का किसने देखा है. जैसा चल रहा है, चलता रहे.'

उत्तराखंड को 270 रनों का लक्ष्य
रणजी ट्रॉफी के इस मुकाबले में महाराष्ट्र की टीम पहले खेलते हुए 49.4 ओवर में 247 रनों पर सिमट गई. जवाब में उत्तराखंड ने 38 ओवर में ऑलआउट होने से पहले 251 रन बनाए. कमल सिंह कनियाल के अलावा सौरभ रावत ने 49 रन की पारी खेली. इसके बाद महाराष्ट्र ने दूसरी पारी में 313 रन बनाए और उत्तराखंड को 270 रनों का लक्ष्य दिया.

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First published: February 14, 2020, 2:52 PM IST
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