आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग में शामिल एक और खिलाड़ी पर से आजीवन बैन हटा, लेकिन मैदान अभी भी दूर

अंकित चव्हाण राजस्थान की ओर से खेलते थे. (PTI)

अंकित चव्हाण राजस्थान की ओर से खेलते थे. (PTI)

आईपीएल (IPL 2013) स्पॉट फिक्सिंग (Spot Fixing) में शामिल अंकित चव्हाण पर लगे आजीवन बैन को 7 साल कर दिया गया है. बीसीसीआई लोकपाल ने खिलाड़ी की सजा को कम कर दिया है. हालांकि बीसीसीआई की ओर अब तक खिलाड़ी को आधिकारिक तौर पर खेलने का पत्र नहीं मिला है.

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नई दिल्ली. टी20 लीग आईपीएल (IPL 2013) में स्पॉट फिक्सिंग (Spot Fixing) ने बड़ा विवाद पैदा कर दिया था. इसके बाद बीसीसीआई की ओर से तीन खिलाड़ियों एस श्रीसंत, अंकित चव्हाण और अजित चंडिला पर आजीवन बैन लगा था. श्रीसंत सजा कम होने के बाद वे मैदान पर उतर चुके हैं. इस बीच अंकित चव्हाण का दावा है कि बीसीसीआई के लोकपाल डीके जैन ने भी उसकी सजा को घटाकर 7 साल कर दिया है. लेकिन बीसीसीआई की ओर से उन्हें अब तक तक इस बारे में आधिकारिक पत्र नहीं मिला है.

35 साल के अंकित चव्हाण ने क्रिकबज से बात करते हुए कहा, ‘ मैंने मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन से इस मसले पर सपोर्ट करने के लिए कहा है. लोकपाल ने एक महीने पहले 3 मई को यह फैसला सुनाया. ऐसे में मेरे पर लगा बैन सितंबर 2020 में खत्म हो गया है.’ उन्होंने कहा कि मैंने लोकपाल के आदेश के साथ बीसीसीआई को पत्र लिखा था, लेकिन उनकी ओर से अब तक कोई जवाब नहीं आया है. इस कारण मैंने एमसीए से मदद मांगी है, ताकि फिर से मैदान पर वापसी कर सकूं.

मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन की बैठक 11 जून को

मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन की अपेक्स काउंसिल की बैठक 11 जून को होने जा रही है. बैठक के एजेंडा में अंकित चव्हाण का मामला भी है. लेकिन एसोसिएशन के सूत्र ने कहा कि अंकित के पत्र के कारण हमने इसे एजेंडा में शामिल कर लिया है. लेकिन हम इस मामले पर कुछ नहीं कर सकते, यह हमारे अधिकार क्षेत्र के बाहर है. फैसला बीसीसीआई को ही करना है. ऐसे में अंकित का मामला लंबा हो सकता है.
कोर्ट के आदेश पर श्रीसंत से हटा था बैन

बीसीसीआई ने तेज गेंदबाज एस श्रीसंत पर भी आजीव बैन लगाया था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उनकी सजा को कम दिया गया था. श्रीसंत 2007 टी20 वर्ल्ड कप और 2011 वनडे वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम में शामिल थे. मौजूदा सीजन में मुश्ताक अली ट्रॉफी के लिए उन्हें केरल की टीम में जगह भी मिली थी. लेकिन कोरोना के कारण रणजी ट्रॉफी का आयोजन नहीं हो सका.

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