करियर के दौरान 10-12 वर्षों तक तनाव में था, कई रात सो नहीं सका: सचिन तेंदुलकर

सचिन तेंदुलकर 200 टेस्ट खेलने वाले एकमात्र खिलाड़ी हैं. (sachin tendulkar twitter)

सचिन तेंदुलकर 200 टेस्ट खेलने वाले एकमात्र खिलाड़ी हैं. (sachin tendulkar twitter)

पूर्व भारतीय कप्तान सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) ने कहा कि वे भी करियर के दाैरान काफी समय तक तनाव से परेशान थे. लेकिन इससे परेशान होने की बजाय समाधान खोजने की जरूरत होती है. हर किसी के जीवन में ऐसी दिक्कत आती है.

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नई दिल्ली. सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) ने कहा कि अपने 24 साल के करियर के एक बड़े हिस्से को उन्होंने तनाव में रहते हुए गुजारा है और वह बाद में इस बात को समझने में सफल रहे कि मैच से पहले तनाव खेल की उनकी तैयारी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था. कोविड-19 के दौरान बायो-बबल में अधिक समय बिताने से खिलाड़ियों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहे असर के बारे में बात करते हुए मास्टर ब्लास्टर ने कहा कि इससे निपटने के लिए इसकी स्वीकार्यता जरूरी है.

सचिन तेंदुलकर ने एक कार्यक्रम में कहा, ‘समय के साथ मैंने महसूस किया कि खेल के लिए शारीरिक रूप से तैयारी करने के साथ आपको खुद को मानसिक रूप से भी तैयार करना होगा. मेरे दिमाग में मैदान में प्रवेश करने से बहुत पहले मैच शुरू हो जाता था. तनाव का स्तर बहुत अधिक रहता था.’ इंटरनेशनल क्रिकेट में शतकों का शतक लगाने वाले इस इकलौते खिलाड़ी ने कहा, ‘मैंने 10-12 वर्षों तक तनाव महसूस किया था. मैच से पहले कई बार ऐसा हुआ था, जब मैं रात में सो नहीं पाता था. बाद में मैंने यह स्वीकार करना शुरू कर दिया कि यह मेरी तैयारी का हिस्सा है. मैंने समय के साथ इस स्वीकार कर लिया कि मुझे रात में सोने में परेशानी होती थी. मैं अपने दिमाग को सहज रखने के लिए कुछ और करने लगता था.’

एक दिन पहले ही बैग तैयार कर लेता था

उन्होंने कहा इस ‘कुछ और’ में बल्लेबाजी अभ्यास, टेलीविजन देखना और वीडियो गेम्स खेलने के अलावा सुबह चाय बनाना भी शामिल था. रिकाॅर्ड 200 टेस्ट मैच खेलने वाले इस खिलाड़ी ने कहा, ‘मुझे मैच से पहले चाय बनाने, कपड़े इस्त्री करने जैसे कार्यों से भी खुद को खेल के लिए तैयार करने में मदद मिलती थी. मेरे भाई ने मुझे यह सब सिखाया था, मैं मैच से एक दिन पहले ही अपना बैग तैयार कर लेता था और यह एक आदत सी बन गई थी. मैंने भारत के लिए खेले अपने आखिरी मैच में भी ऐसा ही किया था.’
अच्छे-बुरे समय का सामना करना सामान्य बात

सचिन तेंदुलकर ने कहा कि खिलाड़ी को मुश्किल समय का सामना करना ही पड़ता है, लेकिन यह जरूरी है कि वह बुरे समय को स्वीकार करें. उन्होंने कहा, ‘जब आप चोटिल होते हैं तो चिकित्सक या फिजियो आपका इलाज करते हैं. मानसिक स्वास्थ्य के मामले में भी ऐसा ही है. किसी के लिए भी अच्छे-बुरे समय का सामना सामान्य बात है.’ उन्होंने कहा, ‘इसके लिए आपकों चीजों को स्वीकार करना होगा. यह सिर्फ खिलाड़ियों के लिए नहीं है बल्कि जो उसके साथ है उस पर भी लागू होती है. जब आप इसे स्वीकार करते है तो फिर इसका समाधान ढूंढने की कोशिश करते हैं.’

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होटल कर्मचारी के कारण चोट से उबर सका

उन्होंने चेन्नई के एक होटल कर्मचारी का जिक्र करते हुए कहा कि कोई भी किसी से भी सीख सकता है. उन्होंने बताया, ‘मेरे कमरे में एक कर्मचारी डोसा लेकर आया और उसे टेबल पर रखने के बाद उसने मुझे एक सलाह दी. उसने बताया कि मेरे एल्बो गार्ड (कोहनी को चोट से बचाने वाला) के कारण मेरा बल्ला पूरी तरह से नहीं चल रहा, यह वास्तव में सही तथ्य था. उसने मुझे इस समस्या से निजात दिलाने में मदद की.’

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