महेंद्र सिंह धोनी और विराट कोहली इसलिए नहीं बन सकते मैच फिक्सिंग का‌ शिकार!

महेंद्र सिंह धोनी और विराट कोहली इसलिए नहीं बन सकते मैच फिक्सिंग का‌ शिकार!
भारतीय कप्तान विराट कोहली जहां साउथ अफ्रीका के खिलाफ टी-20 सीरीज में हिस्सा ले रहे हैं, वहीं महेंद्र सिंह धोनी ने क्रिकेट से आराम लिया हुआ है. (AP)

बुकी (Bookies) आमतौर पर युवा खिलाड़ियों को निशाना बनाते हैं या फिर ऐसे खिलाड़ियों से संपर्क करते हैं जो अधिक सफल नहीं होते हैं और अधिक पैसों की चाहत रखते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 18, 2019, 7:58 PM IST
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नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट (Indian Cricket) में एक बार फिर मैच फिक्सिंग (Match Fixing) की खबरें लौट आईं हैं. तमिलनाडु प्रीमियर लीग (Tamilnadu Premier League) से लेकर कर्नाटक प्रीमियर लीग और टी-20 मुंबई लीग में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों की ओर से मैच फिक्सिंग की पेशकश को लेकर बीसीसीआई (BCCI) से शिकायत की गई है. यहां तक कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम की एक खिलाड़ी को भी मैच फिक्सिंग की पेशकश की गई थी, जिसकी जानकारी उनकी ओर से बीसीसीआई को दे दी गई है. भारतीय क्रिकेट पहले भी मैच फिक्सिंग की घटना से गुजर चुका है, जिसकी वजह से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक में भूचाल आ गया था.

भारतीय दिग्गजों पर लग चुका है प्रतिबंध
फिक्सिंग (Match Fixing) को लेकर मोहम्मद अजहरुद्दीन और अजय जडेजा जैसे भारतीय क्रिकेटरों पर प्रतिबंध भी लगाया जा चुका है. साल 2013 में बीसीसीआई (BCCI) ने इंडियन प्रीमियर लीग (Indian Premier League) की टीम राजस्‍थान रॉयल्स के खिलाड़ियों अजीत चंदीला, एस श्रीसंत और अंकित चव्हाण पर भी स्पॉट फिक्सिंग के लिए प्रतिबंध लगाया था. फिलहाल तमिलनाडु प्रीमियर लीग में स्पॉट फिक्सिंग की खबरें जोरों पर हैं. ये भी खबरें आ रहीं हैं कि ‌खिलाड़ियों के साथ अंपायर और कोच भी इस रैकेट का हिस्सा हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या क्रिकेटर फिक्सिंग के लिए आसान शिकार होते हैं. हालांकि बीसीसीआई की एंटी करप्‍शन यूनिट (BCCI Anti Corruption Unit) के चीफ अजीत सिंह (Ajeet Singh) ऐसा नहीं मानते.

स्टार खिलाड़ी के पास पाने से ज्यादा खोने को होता है



बीसीसीआई (BCCI) की एंटी करप्‍शन यूनिट (Anti Corruption Unit) के चीफ अजीत सिंह ने कहा है कि बुकी और फिक्सर महेंद्र सिंह धोनी (Mahendra Singh Dhoni) और विराट कोहली (Virat Kohli) जैसे बड़े खिलाड़ियों को फंसाने पर अपना वक्त जाया नहीं करते. बुकी आमतौर पर युवा खिलाड़ियों को निशाना बनाते हैं या फिर ऐसे खिलाड़ियों से संपर्क करते हैं जो अधिक सफल नहीं होते हैं और अधिक पैसों की चाहत रखते हैं. अजीत सिंह के अनुसार, अगर आप मुझसे पूछें तो एक स्टार खिलाड़ी के पास पाने से ज्यादा खोने को होता है.



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बीसीसीआई के पास इस साल मैच फिक्सिंग की पेशकश किए जाने की कई शिकायतें आईं हैं. (फाइल फोटो)


पैसों के लिए प्रतिष्ठा दांव पर नहीं लगा सकते
अजीत सिंह ने कहा कि कल्पना कीजिए कि विराट कोहली (Virat Kohli) और महेंद्र सिंह धोनी (Mahendra Singh Dhoni) इस मामले में फंसते हैं. ऐसे में बात सिर्फ पैसों की नहीं होती, बल्कि उस प्रतिष्ठा की भी होती है जो इन दिग्गज खिलाड़ियों ने बनाई होती है. ऐसे खिलाड़ी पैसों के लिए प्रतिष्ठा दांव पर नहीं लगा सकते. ये खिलाड़ी इन सभी से ऊपर होते हैं. अजीत सिंह ने कहा कि अगर आप आर्थिक रूप से बात करें तो क्या आपको लगता है कि उन्हें इसमें शामिल होने की जरूरत है? उन्हें जो भी विज्ञापन मिलते हैं वो उनकी प्रतिष्ठा और स्टार पावर की वजह से मिलते हैं. सट्टेबाजी से उन्हें इन पैसों का छोटा सा हिस्सा भी हासिल नहीं होगा.

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