पूर्व BCCI अध्यक्ष श्रीनिवासन की बेटी रूपा 'हितों के टकराव' की दोषी, छोड़ना पड़ सकता TNCA अध्यक्ष पद ?

BCCI के पूर्व अध्यक्ष एन श्रीनिवासन की बेटी रूपा गुरुनाथ को हितों के टकराव के मामले में तमिलनाडु क्रिकेट संघ के अध्यक्ष का पद छोड़ना पड़ सकता है. (TNCA Twitter)

BCCI के पूर्व अध्यक्ष एन श्रीनिवासन की बेटी रूपा गुरुनाथ को हितों के टकराव के मामले में तमिलनाडु क्रिकेट संघ के अध्यक्ष का पद छोड़ना पड़ सकता है. (TNCA Twitter)

तमिलनाडु क्रिकेट एसोसिएशन(TNCA) बीसीसीआई के एथिक्स ऑफिसर के इस आदेश को कोर्ट में चुनौती दे सकता है. रूपा गुरुनाथ के खिलाफ 'हितों के टकराव' की शिकायत मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के पूर्व आजीवन सदस्य संजीव गुप्ता ने की थी.

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नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड(BCCI) के पूर्व अध्यक्ष एन श्रीनिवासन की बेटी रूपा गुरुनाथ को बोर्ड के एथिक्स ऑफिसर जस्टिस (रिटायर्ड) डीके जैन ने हितों के टकराव का दोषी पाया है. जस्टिस जैन ने गुरुवार को इस संबंध में एक आदेश पारित किया. रूपा इस समय तमिलनाडु क्रिकेट एसोसिएशन की अध्यक्ष हैं. वो इंडिया सीमेंट्स लिमिटेड (ICL) की फुलटाइम डायरेक्टर हैं. आईपीएल फ्रेंचाइजी चेन्नई सुपर किंग्स लिमिटेड (CSKCL) के आईसीएल से करीबी रिश्ता होने के कारण रूपा को हितों के टकराव का दोषी पाया गया. हालांकि, तमिलनाडु क्रिकेट एसोसिएशन इस आदेश को कोर्ट में चुनौती दे सकता है.

बीसीसीआई के एथिक्स ऑफिसर ने 13 पेज के अपने आदेश में कहा है कि सीएसकेसीएल इंडिया सीमेंट्स लिमिटेड समूह का ही हिस्सा है. सीएसकेसीएल के पास आईपीएल फ्रेंचाइजी चेन्नई सुपरकिंग्स का स्वामित्व है. रूपा के खिलाफ हितों के टकराव की शिकायत इंदौर के संजीव गुप्ता ने की थी. वो मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के पूर्व आजीवन सदस्य हैं. उन्होंने पिछले साल ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. संजीव ने इससे पहले क्रिकेट सलाहकार समिति में शामिल सौरव गांगुली, सचिन तेंदुलकर और वीवीएस लक्ष्मण पर भी हितों के टकराव के आरोप लगाए थे.

'बचाव पक्ष की दलील में दम नहीं'

रिटायर्ड जस्टिस जैन ने अपने आदेश में आगे लिखा कि सभी तथ्य ये दिखाते हैं कि इंडिया सीमेंट्स ग्रुप के तहत अलग-अलग यूनिट्स का एक जाल जैसा बुना हुआ था. इसमें चेन्नई सुपर किंग्स लिमिटेड भी शामिल है. इन सभी यूनिट्स का मैनेजमेंट और बागडोर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर आईसीएल के बोर्ड के पास है. ऐसे में बचाव पक्ष की इस दलील में कि आईसीएल की सीएसकेसीएल में किसी तरह की कोई हिस्सेदारी में सच्चाई नहीं है.
रूपा गुरुनाथ आईसीएल की फुलटाइम डायरेक्टर

उन्होंने कहा कि तथ्यों के आधार पर अगर देखें तो प्रतिवादी (रूपा गुरुनाथ) का आईसीएल की फुलटाइम डायरेक्टर और प्रमोटर के रूप में, आईसीएल शेयरहोल्डर्स ट्रस्ट एवं सीएसकेसीएल के डायरेक्टरों से करीबी रिश्ता है और जिसका बीसीसीआई से फ्रेंचाइजी करार भी है. यह बीसीसीआई के संविधान के नियम 38(1) (i)के तहत हितों के टकराव का सीधा सा मामला है.

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क्या है बीसीसीआई संविधान का नियम 38 (1) (i)

बीसीसीआई संविधान का नियम 38 (1) (i) प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हितों के टकराव से जुड़ा है. इस नियम के तहत जब बीसीसीआई, कोई सदस्य, आईपीएल या कोई फ्रेंचाइजी किसी कंपनी से करार में शामिल होती है, जिसमें संबंधित व्यक्ति या उसके रिश्तेदार या करीबी सहयोगी का कोई हित हो, तो इसे बीसीसीआई के नियमों के खिलाफ माना जाता है. इसलिए जैन ने रूपा गुरुनाथ को अप्रत्यक्ष रूप से हितों के टकराव का दोषी पाया. क्योंकि सीएसकेसीएल ने बीसीसीआई के साथ फ्रेंचाइजी के रूप में करार किया है और रूपा का इस कंपनी से संबंध है.

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जस्टिस जैन का बोर्ड से करार 7 जून को खत्म हो रहा

बीसीसीआई के एथिक्स ऑफिसर क रूप में रिटायर्ड जस्टिस जैन का ये फैसला उनके अंतिम आदेश में से एक हो सकता है. क्योंकि उनका बोर्ड से करार 7 जून को खत्म हो रहा है. अब तक बीसीसीआई ने उनका करार बढ़ाने का कोई फैसला नहीं लिया है. ऐसे में ये देखना भी दिलचस्प होगा कि रूपा गुरूनाथ के मामले में बीसीसीआई क्या रुख अपनाती है. क्या बोर्ड रूपा को टीएनसीए के अध्यक्ष पद से हटने के लिए कहती है या नहीं. बोर्ड के पास राज्य क्रिकेट संघ को इस आदेश के खिलाफ नए एथिक्स अधिकारी या कोर्ट में अपील करने की अनुमति देने का अधिकार है.

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