बीसीसीआई लाएगा 'अपना डीआरएस सिस्टम', जानिए कैसे करेगा काम

रणजी ट्रॉफी सेमीफाइनल में चेतेश्वर पुजारा को नॉटआउट दिए जाने के विवाद के बाद अब बीसीसीआई एक नया डीआरएस सिस्टम लाने की तैयारी में है, जिसे लिमिटेड डीआरएस नाम दिया गया है. इसका इस्तेमाल नॉकआउट मुकाबलों में ही किया जाएगा.

News18Hindi
Updated: July 18, 2019, 8:53 PM IST
बीसीसीआई लाएगा 'अपना डीआरएस सिस्टम', जानिए कैसे करेगा काम
पिछले रणजी सत्र में डीआरएस को लेकर काफी विवाद हुआ था.
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Updated: July 18, 2019, 8:53 PM IST
क्रिकेट में डिसीजन रिव्यू सिस्टम (डीआरएस) पर विवाद कोई नई बात नहीं है. भारतीय घरेलू सिस्टम के पिछले रणजी सत्र में भी तब यह मामला उठा था जब सेमीफाइनल में चेतेश्वर पुजारा ने मैच विनिंग 131 रन की पारी खेली थी. सौराष्ट्र के लिए यह पारी खेलते हुए पुजारा के बल्ले का किनारा लगकर गेंद कर्नाटक के विकेटकीपर के हाथों में चली गई थी, लेकिन अंपायर ने इसे आउट नहीं दिया. इसके चलते कर्नाटक की टीम को हार का सामना करना पड़ा. इतना ही नहीं, पुजारा को पहली पारी में भी इसी तरह जीवनदान मिला था. इन दोनों ही मामलों में सैयद खालिद अंपायर थे.

इस विवाद के बाद अब बीसीसीआई एक नया डीआरएस सिस्टम लाने की तैयारी में है, जिसे लिमिटेड डीआरएस नाम दिया गया है. इसका इस्तेमाल नॉकआउट मुकाबलों में ही किया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासकों की समिति ने घरेलू क्रिकेट के आगामी सत्र के लिए लिमिटेड डीआरएस सिस्टम को मंजूरी दे दी है. सीओए को पिछले रणजी ट्रॉफी सत्र में बेहद खराब अंपायरिंग की कई शिकायतें मिली थीं.

बीसीसीआई के जनरल मैनेजर, क्रिकेट ऑपरेशंस सबा करीम ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा है कि सीओए ने इस बात को हरी झंडी दे दी है ताकि मैदान पर इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों. हम लिमिटेड डीआरएस लागू करने के लिए अंपायरों, मैच रेफरी, ऑफिशियल ब्रॉडकास्टर से बात करेंगे कि इसे कैसे लागू किया जाए.

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रणजी ट्रॉफी के आगामी सत्र में लिमिटेड डीआरएस सिस्टम लागू किया जाएगा.


लिमिटेड डीआरएस के क्या हैं मायने

इसका मतलब है कि टीवी अंपायर किसी खिलाड़ी के आउट होने के बाद टीवी रीप्ले के जरिये उस निर्णय की स्वतः समीक्षा कर सकता है. इसके आधार पर वह फैसला बदल सकता है और मैदानी अंपायर से इसकी सिफारिश कर सकता है.

भारतीय टीम के पूर्व विकेटकीपर सबा करीम ने कहा कि घरेलू मुकाबलों के लिए ब्रॉडकास्टर के पास अधिक तकनीक उपलब्‍ध नहीं है, इसलिए हमें मौजूदा संसाधनों का ही बेहतर से बेहतर इस्तेमाल करना होगा.
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बीसीसीआई भले ही इस नए सिस्टम को लाने की तैयारी कर रही है, लेकिन अभी ये देखना बाकी है कि लिमिटेड डीआरएस का ये प्रयोग कितना सफल रहता है.

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First published: July 18, 2019, 8:53 PM IST
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