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  • भारत-बांग्लादेश मैच में झगड़े पर सचिन तेंदुलकर का बड़ा बयान, कहा-हर कोई आक्रामक है, रोजर फेडरर भी

भारत-बांग्लादेश मैच में झगड़े पर सचिन तेंदुलकर का बड़ा बयान, कहा-हर कोई आक्रामक है, रोजर फेडरर भी

सचिन तेंदुलकर ने देश भर के 12 हजार डॉक्‍टर्स से बात करके उनके साथ खेलों से जुड़ी चोटों को लेकर अपनी जानकारी और अनुभव साझा किए.

साउथ अफ्रीका (South Africa) में खेले गए अंडर19 वर्ल्ड कप (Under19 World Cup) के फाइनल के बाद बांग्लादेश (Bangladesh) खिलाड़ी भारतीय खिलाड़ियों से उलझ पड़े थे.

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    नई दिल्ली. भारत और बांग्लादेश (India vs Bangladesh) के बीच साउथ अफ्रीका में खेले गए अंडर19 वर्ल्ड कप के फाइनल (Under19 World Cup Final) में दुनिया ने क्रिकेट का रोमांच तो देखा, लेकिन मैच के बाद दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच हाथापाई भी देखी. मैच के बाद बांग्लादेश के खिलाड़ी भारतीय खिलाड़ियों से उलझ पड़े और उसके बाद मैदान का नजारा ऐसा हो गया मानो मैच नहीं कोई जंग लड़ी जा रही हो. हालांकि आईसीसी (ICC) ने इसके बाद बांग्लादेश के तीन और भारत के दो खिलाड़ियों को दोषी पाया था. अब खिलाड़ियों के बीच इस तरह की भिड़ंत को लेकर दिग्गज क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने भी अपनी राय जाहिर की है.

    चिल्लाने का मतलब आक्रामकता नहीं
    हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) ने कहा कि कोई भी किसी को व्यक्तिगत रूप से सिखाने के प्रयास कर सकता है, लेकिन ये सब इस बात पर निर्भर करता है कि किसी व्यक्ति का चरित्र कैसा है. महत्वपूर्ण मौकों पर खिलाड़ियों को कुछ बातों पर नियंत्रण रखना होता है. आपको ये नहीं भूलना चाहिए कि पूरी दुनिया आपको देख रही है. खिलाड़ी आक्रामक हो सकते हैं, लेकिन चिल्लाने और खराब बातें कहने का ये मतलब बिल्कुल भी नहीं है कि आप आक्रामक हैं. सचिन ने कहा, 'आपके खेल में आक्रामकता होनी चाहिए, फिर चाहे गेंदबाजी हो या बल्लेबाजी, लेकिन ये आक्रामकता आपनी टीम की मददगार होनी चाहिए न कि उसके खिलाफ.'

    फेडरर भी आक्रामक हैं, लेकिन शारीरिक हावभाव महत्वपूर्ण
    अंडर19 वर्ल्ड कप फाइनल के बाद भारत के आकाश सिंह और रवि बिश्नोई व बांग्लादेश के तौहीद, शमीम हुसैन और रकीबुल हसन पर आईसीसी ने कड़ी कार्रवाई की थी. इस मामले में सचिन तेंदुलकर ने कहा, 'हर कोई आक्रामक है. अगर कोई कुछ नहीं कहता और कुछ नहीं करता तो इसका ये मतलब नहीं है कि वो आक्रामक नहीं है. हम सभी मैदान पर जाकर जीतना चाहते हैं. इसका एक तरीका होता है. आप सीमा नहीं लांघ सकते. मेरी तरह अन्य खिलाड़ी भी जीतना चाहते हैं.' इस बीच सचिन ने सवाल किया कि क्या आप मुझे ये बताने की कोशिश कर रहे हैं कि रोजर फेडरर आक्रामक नहीं हैं. या फिर वो जीतना नहीं चाहते? दरअसल, वह हर अंक जीतना चाहते हैं, लेकिन उनके शारीरिक हावभाव बेहद मायने रखते हैं.

    जिम में जाकर बल्लेबाजी बेहतर नहीं होती
    सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) मौजूदा टीम के फिटनेस स्तर को लेकर भी काफी प्रभावित हैं. उन्होंने कहा, 'ऐसा नहीं है कि फिटनेस आपके कौशल को बढ़ा देती है, लेकिन अगर आप किसी चीज में माहिर हैं तो आप उसे ज्यादा लंबे समय तक जारी रख पाएंगे. मुझे नहीं लगता कि अगर आप शारीरिक रूप से फिट हैं तो आपकी गेंद थोड़ी और ज्यादा आउटस्विंग होगी. इसके लिए तो आपको अपनी गेंदबाजी को ही निखारना होगा. उसी तरह अगर किसी को बल्लेबाजी सीखनी है तो उसे बल्लेबाजी ही सीखनी होगी. उसकी जगह खिलाड़ी जिम में जाकर बेहतर बल्लेबाज बनने की उम्मीद नहीं कर सकता.'



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