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प्रवीण कुमार तो बच गए, लेकिन इस खिलाड़ी ने डिप्रेशन की वजह से की खुदकुशी, इनके करियर तबाह!

प्रवीण कुमार रहे हैं डिप्रेशन के शिकार

प्रवीण कुमार रहे हैं डिप्रेशन के शिकार

प्रवीण कुमार डिप्रेशन की वजह से अपनी जान लेने वाले थे लेकिन ये खिलाड़ी नहीं बच सके, किसी ने जिंदगी खत्म हुई तो किसी के करियर की 'मौत' हो गई

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    नई दिल्ली. प्रवीण कुमार (Praveen Kumar ) के हाथ में गेंद, हवा में घूमी और बल्लेबाज के स्टंप उड़ गए. साल 2008 में ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर ऐसी कमेंट्री दुनिया ने सुनी और मजबूत ऑस्ट्रेलियाई बैटिंग ऑर्डर को घुटने टेकते देखा. प्रवीण कुमार की कहर बरपाती स्विंग गेंदों ने भारत को ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक सीबी सीरीज जिताई. दूसरे फाइनल मैच में प्रवीण कुमार चार विकेट लेकर मैन ऑफ द मैच भी बने. लेकिन आपको बता दें टीम इंडिया (Team India) का ये चैंपियन गेंदबाज टीम इंडिया से बाहर निकलने के बाद खुद को खत्म करने के लिए चल पड़ा था. एक ताजा इंटरव्यू में प्रवीण कुमार ने खुद ये खुलासा करते हुए बताया कि डिप्रेशन की वजह से वो खुद की जान लेने वाले थे लेकिन उनके मासूम बच्चों की तस्वीर ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया. प्रवीण कुमार की किस्मत अच्छी थी कि उन्होंने खुद पर काबू कर लिया, लेकिन कुछ क्रिकेटर खुशकिस्मत नहीं रहे. एक क्रिकेटर ने तो डिप्रेशन की वजह से अपनी जान दे दी और कइयों के क्रिकेट करियर की डिप्रेशन की वजह से मौत हो गई. आइए आपको बताते हैं कि डिप्रेशन ने किन दिग्गज खिलाड़ियों के करियर तबाह कर डाले.

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    प्रवीण कुमार पिस्‍टल के साथ हाईवे पर पहुंच गए थे


    डेविड बेयरस्टो की खुदकुशी
    जॉनी बेयरस्टो ये एक ऐसा नाम है जिसने साल 2019 वर्ल्ड कप में रनों का अंबार लगा दिया और इंग्लैंड को पहली बार वर्ल्ड चैंपियन भी बनाया. लेकिन आपको पता है कि बेयरस्टो के पिता का जीवन डिप्रेशन ने ही छीन लिया. डेविड बेयरस्टो ने इंग्लैंड के लिए क्रिकेट खेला वो बेहतरीन खिलाड़ी थे लेकिन पत्नी जैनेट की बीमारी की वजह से वो डिप्रेशन का शिकार हो गए. डिप्रेशन की वजह से डेविड बेयरस्टो शराब पीकर गाड़ी चलाते हुए पकड़े गए, उनके घर में आर्थिक तंगी आ गई और 1997 में उन्होंने खुद को फांसी पर लटका दिया. नतीजा जॉनी बेयरस्टो के सिर से पिता का साया उठ गया.

    मार्कस ट्रेसकॉथिक के करियर का अंत
    इंग्लैंड (England) के लिए 76 टेस्ट मैच और 123 वनडे मैच खेलने वाले मार्कस ट्रेस्कॉथिक अपने जमाने के बेहतरीन ऑलराउंडर्स में से एक थे. लेकिन अचानक साल 2006 में उन्होंने महज 32 साल की उम्र में इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कह दिया, जिसकी वजह था डिप्रेशन. अचानक वो साल 2006 में भारत दौरा छोड़कर इंग्लैंड वापस लौट गए. बाद में एक इंटरव्यू में ट्रेस्कॉथिक ने बताया कि वो आज भी डिप्रेशन से जूझ रहे हैं. उन्हें दवाइयां लेकर नींद आती है. डिप्रेशन पर उन्होंने किताब भी लिखी है.

    #जीवनसंवाद: डिप्रेशन, आत्महत्या और प्रवीण कुमार!


    जोनाथन ट्रॉट ने लिया संन्यास
    इंग्लैंड के एक और खिलाड़ी जोनाथन ट्रॉट ने भी साल 2013 में एशेज सीरीज बीच में ही छोड़कर इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास ले लिया. ट्रॉट के संन्यास की वजह भी डिप्रेशन था. बता दें ट्रॉट ने जब इंटरनेशनल क्रिकेट छोड़ा था उनका टेस्ट औसत 44.1 और वनडे औसत 50 से भी ज्यादा था. उनके संन्यास ने इंग्लिश क्रिकेट को हिलाकर रख दिया था.

    एंड्रयू फ्लिंटॉफ भी डिप्रेशन की चपेट में आए
    इंग्लैंड के पूर्व ऑलराउंडर एंड्रयू फ्लिंटॉफ ने भी साल 2007 में डिप्रेशन का दंश झेला. फ्लिंटॉफ ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि साल 2006-07 में एशेज सीरीज में इंग्लैंड के क्लीन स्वीप के बाद वो मानसिक तनाव में आ गए थे. इसके बाद फ्लिंटॉफ ने ज्यादा शराब पीनी शुरू कर दी थी. साल 2007 वर्ल्ड कप के दौरान फ्लिंटॉफ अकसर शराब के नशे में धुत रहते थे. फ्लिंटॉफ ने इंग्लैंड के लिए 200 से ज्यादा इंटरनेशनल मैच खेले जिसमें उन्होंने 400 से ज्यादा विकेट और 7000 से ज्यादा रन बनाए.

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    ड्रयू फ्लिंटॉफ ने भी साल 2007 में डिप्रेशन का दंश झेला


    ये क्रिकेटर भी तनाव से जूझ रहे हैं
    भारत के लिए 7 टेस्ट मैच खेल चुके अभिनव मुकुंद ने भी पिछले साल खुलासा किया कि वो भी काफी समय तक मानसिक समस्या से जूझे. अभिनव मुकुंद ने खुले मंच पर कहा था कि अगर आप मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं तो क्रिकेट से ब्रेक लेने में कोई हर्ज नहीं है. बता दें अभिनव मुकुंद के अलावा हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के ग्लेन मैक्सवेल, पुकोवोस्की और निक मैडिनसन जैसे खिलाड़ियों ने भी डिप्रेशन की वजह से ब्रेक ले लिया था. मैक्सवेल तो ऑस्ट्रेलिया की टीम में थे और रनों की बरसात भी कर रहे थे लेकिन अचानक उन्होंने खुद को मानसिक तनाव से जूझता हुआ बताया और छोटा सा ब्रेक लिया. मैक्सवेल ने हालांकि अब वापसी कर ली है लेकिन अभी भी कई ऐसे क्रिकेटर हैं जो डिप्रेशन जैसी खतरनाक बीमारी से जूझ रहे हैं.

    टीम इंडिया से बुलावे का इंतजार कर रहा था गेंदबाज, फिर खुदकुशी करने निकल गया

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