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क्यों गंभीर को टीम में लेने के लिए मजबूर होंगे विराट? चैंपियन यूं ही नहीं कहते उन्हें

क्यों गंभीर को टीम में लेने के लिए मजबूर होंगे विराट? चैंपियन यूं ही नहीं कहते उन्हें

(BCCI)

(BCCI)

गौतम गंभीर ने आईपीएल-10 में गजब की परफॉर्मेंस से साबित किया है कि वे अब भी टीम इंडिया को बहुत कुछ दे सकते हैं.

    कोलकाता नाइटराइडर्स के कप्तान गौतम गंभीर की कहानी भी अजीब है. वनडे वर्ल्ड कप-2011 में भारत की ओर से दूसरे बेस्ट स्कोरर (9 मैच में 393 रन, सचिन ने 482 रन बनाए थे) रहे इस बैट्समैन पर से कुछ ही सालों में टीम इंडिया का विश्वास उठ गया. मैदान और मैदान के बाहर तमाम कॉन्ट्रोवर्सीज हुईं. टीम में मौका मिला, लेकिन फिर वही विवाद और टीम से बाहर. लेकिन, फिर क्या?  वही, जो एक चैंपियन करता है.


    गंभीर ने आईपीएल-10 में वापसी की. इस सत्र में 425 रन (दूसरे बेस्ट स्कोरर) बनने के साथ ही अब वे चैंपियंस ट्रॉफी के लिए सिलेक्ट होने वाली टीम में जगह पाने के सबसे बड़े दावेदार बन गए हैं. फॉर्म को देखते हुए विराट उन्हें टीम में लेना भी चाहेंगे. टीम का सिलेक्शन आज होना है.

     

    कहानी फिल्मी है ना...

    सफर की शुरुआत कुछ ऐसे होती है. वो वक्त होता है, जब सचिन तेंदुलकर की जगह वनडे में टीम इंडिया का ओपनर बनाया जाता है. वीरेंद्र सहवाग के साथ जोड़ी हिट होती है. लगातार परफॉर्मेंस और जुझारू खिलाड़ी होने की वजह से उन्‍हें चैंपियन बताया जाता है. लेकिन, इसी दौरान कभी छोटे भाई के तौर पर रिश्ते रखने वाले उभरते सितारे विराट कोहली से 2013 में आईपीएल-6 में मैदान पर झड़प हो जाती है.

     

    विवाद परफॉर्मेंस पर पड़ते हैं भारी

    शाहिद आफरीदी, मनोज तिवारी... यही नहीं, एमएस धोनी से भी मतभेद की खबरें सामने आती हैं और गौतम गंभीर को विलेन मान लिया जाता है. आईपीएल और डोमेस्टिक क्रिकेट में लगातार परफॉर्म करने के बावजूद बड़ी जद्दोजहद के बाद टीम इंडिया में वापसी (2016 में हुई इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज, एक मैच में 29 रन बनाए) होती है, लेकिन मौका कुछ खास नहीं मिलता. रिजल्ट वही होता है. फिर टीम से बाहर हो जाते हैं, लेकिन इस बार कुछ और भी घटता है. जिसकी किसी को उम्मीद नहीं होगी.




    (BCCI)



     

    कप्तानी भी छीन ली जाती है

    गंभीर को फरवरी, 2017 में अचानक एक दिन दिल्ली रणजी टीम की कप्तानी से हाथ धोना पड़ता है. उनकी जगह रिषभ पंत को ये जिम्मेदारी मिल जाती है. फिर शुरू होता है आईपीएल का त्योहार. फिर वही पुराने तेवर देखने को मिल रहे हैं. गौतम गंभीर ने अपनी कप्तानी में लिए गए कड़े फैसले और परफॉर्मेंस से एक बार फिर साबित कर दिया कि चैंपियन हमेशा चैंपियन ही होता है. आखिर कितने ऐसे खिलाड़ी मिलेंगे, जो इतने उतार-चढ़ाव के बाद खुद को संभाल पाते हैं. उंगली पर गिनती करें तो शायद एकाध ही मिलेंगे.

     

    दिलदार भी सबसे बड़े

    'शराबी' फिल्म में अमिताभ एक अनाथ बच्चे की पढ़ाई का खर्च उठाते हैं और उसे पुलिस ऑफिसर बनाते हैं. ऐसे ही तमाम प्रसंग बॉलीवुड की ढेरों फिल्मों देखने को मिल जाएगा. लेकिन रियल जिंदगी में दो-चार ही ऐसे मामले सामने आए होंगे. खैर, एक दिन अचानक गंभीर एक न्यूज पेपर के लिए लिखे अपने कॉलम में ऐलान करते हैं कि कुछ ही दिन पहले नक्सली हमले में मारे गए 25 सीआरपीएफ जवानों के बच्चों की पढ़ाई का खर्च वे उठाएंगे. अब ये कथित तौर पर विलेन फिर चैंपियन बन जाता है. यूपी के नवनियुक्त मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी भूरी-भूरी प्रशंसा करते हैं. यही नहीं,  गंभीर इसका मीडिया में ढिंढोरा पीटने से भी बचते हैं. शायद एक चैंपियन ऐसे ही जीता है. फिल्मी अंदाज में.

    Tags: Champions Trophy 2017, Gautam gambhir, IPL 2017, Kolkata Knight Riders, Sourav Ganguly

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