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chandrakant pandit as coach helped madhya pradesh for maiden ranji trophy title mumbai and saurashtra had also tasted success

Ranji Trophy 2022: मध्य प्रदेश को रणजी जिताने वाला अनोखा कोच, मुबई-सौराष्ट्र को भी बना चुका है चैंपियन

Ranji trophy final: मुंबई और विदर्भ को रणजी ट्रॉफी का चैम्पियन बनाने वाले चंद्रकांत पंडित की कोचिंग में मध्य प्रदेश की टीम ने भी खिताब जीत लिया है. (PC-BCCI Twitter)

Ranji trophy final: मुंबई और विदर्भ को रणजी ट्रॉफी का चैम्पियन बनाने वाले चंद्रकांत पंडित की कोचिंग में मध्य प्रदेश की टीम ने भी खिताब जीत लिया है. (PC-BCCI Twitter)

Ranji Trophy Final: मध्य प्रदेश की क्रिकेट टीम पहली बार रणजी ट्रॉफी जीत की चैम्पियन बन गई है. उसने फाइनल में 41 बार की चैम्पियन मुंबई को हराया. मध्य प्रदेश टीम की इस सफलता में कोच चंद्रकांत पंडित का भी बड़ा हाथ है. वो 2 साल पहले ही इस टीम से जुड़े थे. लेकिन, इतने कम वक्त में ही उन्होंने मध्य प्रदेश की टीम का कायालपट कर चैम्पियन बना दिया. वो इससे पहले 2017-18 और 2018-19 में विदर्भ को लगातार दो सीजन में रणजी ट्रॉफी का चैम्पियन बना चुके हैं. इससे पहले 2016 में उनकी कोचिंग में मुंबई रणजी ट्रॉफी जीती थी.

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नई दिल्ली. 23 साल पहले जो ख्वाब अधूरा रह गया था, वो अब पूरा हो गया है. मध्य प्रदेश की क्रिकेट टीम पहली बार रणजी ट्रॉफी जीती है. मध्य प्रदेश के चैम्पियन बनने की बुनियाद तो उसी दिन पड़ गई थी, जब मध्य प्रदेश ने 41 बार के चैम्पियन मुंबई के खिलाफ फाइनल में पहली पारी में बड़ी बढ़त हासिल कर ली थी. मुंबई के 374 रन के जवाब में मध्य प्रदेश ने पहली पारी में 536 रन बनाए थे. मध्य प्रदेश ने पहली पारी के आधार पर 162 रन की बढ़त हासिल की थी. मध्य प्रदेश के चैम्पियन बनने में अगर किसी एक शख्स का सबसे बड़ा योगदान है, तो वो टीम के कोच चंद्रकांत पंडित. जिस टीम को नॉक आउट राउंड पहुंचने के लिए भी ऐड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ता था, उसे 2 साल में ही चंद्रकांत पंडित ने घरेलू क्रिकेट का सरताज बना दिया.

चंद्रकांत पंडित का घरेलू क्रिकेट में नाम बड़े अदब से लिया जाता है. एक खिलाड़ी और कोच के रूप में वो किसी परिचय के मोहताज नहीं है. 60 साल के साल चंद्रकांत पंडित ने भारत के लिए 5 टेस्ट और 36 वनडे खेले हैं. फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उनका रिकॉर्ड शानदार रहा है. उन्होंने 138 मैच में 22 शतक और 42 अर्धशतक की मदद से 8 हजार से अधिक रन बनाए हैं. वहीं, एक कोच के तौर पर भी उनका प्रदर्शन लाजवाब रहा है. चंद्रकांत पंडित ने 3 साल पहले विदर्भ, जोकि घरेलू क्रिकेट टीम में उस वक्त बहुत मजबूत नहीं मानी जाती थी, उसे लगातार 2 सीजन (2017-18 और 2018-19) रणजी ट्रॉफी का चैम्पियन बनाया. इससे दो साल पहले, उनकी देखरेख में ही मुंबई भी रणजी ट्रॉफी जीती थी. यानी 6 साल के भीतर ही वो 3 बार रणजी ट्रॉफी जीतने वाली टीम का हिस्सा रह चुके हैं.

पंडित कोच बनने से पहले MP की तरफ से खेले हैं
अंतरराष्ट्रीय करियर खत्म होने पर चंद्रकांत कुछ सालों तक मध्य प्रदेश के लिए घरेलू क्रिकेट भी खेले हैं. उनकी कप्तानी में ही मध्य प्रदेश की टीम 1999 में पहली बार रणजी ट्रॉफी के फाइनल में पहुंची थी. हालांकि, तब कर्नाटक ने फाइनल में उसे हराकर चैम्पियन बनने का सपना तोड़ दिया. कुछ साल मध्य प्रदेश की तरफ से खेलने के बाद चंद्रकांत ने कोचिंग में हाथ आजमाने का फैसला लिया और उनकी इस पारी की शुरुआत भी धमाकेदार रही. उनकी देखरेख में 2003 और 2004 में मुंबई ने लगातार दो साल रणजी ट्रॉफी का खिताब जीता.

इसके बाद तो पंडित ने बतौर कोच सफलता के कई मुकाम हासिल किए और आज फिर वो इतिहास रचने वाले हैं. वो बतौर कप्तान जो काम नहीं कर पाए थे, आज वो सपना एक कोच के तौर पर पूरा होने जा रहा है.

पंडित सख्त मिजाज कोच माने जाते हैं
चंद्रकांत पंडित की गिनती सख्त मिजाज कोच के रूप में होती है. वो टीम के लिए जो रणनीति तैयार करते हैं उसमें कप्तान या किसी खिलाड़ी का बहुत ज्यादा दखल नहीं होता है. अनुशासन उनकी कोचिंग का सबसे अहम हिस्सा है और वो इसमें कोई समझौता नहीं करते हैं. जब पंडित विदर्भ के कोच थे, तो कर्नाटक के खिलाफ रणजी ट्रॉफी के एक सेमीफाइनल मैच के दौरान उन्होंने विदर्भ के खिलाड़ियों के फोन अपने पास रख लिए थे. ऐसा उन्होंने इसलिए किया था, क्योंकि उन्हें इस बात का डर था कि खिलाड़ी रात में फोन देख सकते हैं. ऐसे में उनका फोकस मैच से हट सकता है.

इसके अलावा उन्हें लेकर ऐसे किस्से भी मशहूर हैं कि वो एक खिलाड़ी को टीम के लिए बनाए नियम तोड़ने के कारण थप्पड़ भी जड़ चुके हैं. हालांकि, इसमें कितनी सच्चाई है, यह किसी को मालूम नहीं. लेकिन, यह बताता है कि चंद्रकांत अपने काम और लक्ष्य को लेकर कितने संजीदा रहते हैं और इसी वजह से एक कोच के तौर पर उनका करियर अब तक चमकदार रहा है.

कोच के रूप में टीम चुनने में पूरी आजादी चाहते हैं
चंद्रकांत पंडित टीम चुनने में पूरी आजादी चाहते हैं और फिर वही नतीजे देते हैं, जिसकी उनसे अपेक्षा की जाती है. विदर्भ और मध्य प्रदेश की टीम इसका ताजा उदाहरण हैं. दोनों ही क्रिकेट एसोसिएशन ने उन्हें कोच के रूप में टीम चुनने के लिए आजादी है और आज उसके नतीजे नजर आ रहे हैं.

युवा खून और अनुभव से तैयार की चैम्पियन टीम
पंडित 2 साल पहले ही मध्य प्रदेश की क्रिकेट टीम के कोच बने थे. उन्हें मोटी कीमत देकर कोच बनाया गया था. शुरुआत में मनमाफिक नतीजे नहीं मिले तो उन्हें करोड़ों रुपये की फीस देने पर भी हंगामा मचा. लेकिन वो चुपचाप अपने काम में जुटे रहे और 2 साल के भीतर चैम्पियन टीम तैयार कर दी. टीम में कई ऐसे खिलाड़ी थे, जिनका कद और नाम बड़ा था. लेकिन वो पंडित की प्लानिंग में फिट नहीं बैठते थे, तो उनमें से कुछ को उन्होंने बाहर का रास्ता दिखाया दिया. इसके बाद उन्होंने नए खिलाड़ियों को मौका दिया. कई चौंकाने वाले फैसले किए. खिलाड़ियों को अनुशासन से कोई समझौता न करने का सीधा सा मैसेज दिया. उनकी यही सख्ती और अनुशासन का फॉर्मूला काम कर गया और जो टीम 6 साल से क्वार्टर फाइनल में नहीं पहुंच पा रही थी. उसने रणजी ट्रॉफी जीतकर इतिहास रच दिया.

Tags: Madhya pradesh news, Prithvi Shaw, Ranji Trophy

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