10 साल के थे विराट कोहली, जब चेन्नई के ड्रेसिंग रूम में फूट-फूटकर रोए थे सचिन तेंदुलकर

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चेन्नई की इस क्रिकेट पिच पर आज भले ही विराट कोहली की कप्तानी में इंडियन क्रिकेट टीम ने रिकॉर्ड बना दिया हो, लेकिन कभी यही चेपक पिच सचिन और करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों के आंखों में आंसू की वजह बनी थी.

  • Pradesh18
  • Last Updated: December 21, 2016, 3:00 PM IST
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भारत ने इंग्लैंड को चेन्नई में खेले गए पांचवें और अंतिम टेस्ट में एक पारी और 75 रन से हरा दिया. भारत ने इस जीत के साथ सीरीज पर 4-0 से कब्जा जमा लिया है.

भारत की चेपक पर यह 14वीं टेस्ट जीत है. इस जीत के साथ ही किसी भी मैदान पर भारत की यह सर्वाधिक जीत है. इस सूची में दिल्ली का फिरोजशाह कोटला मैदान दूसरे स्थान पर है, जहां भारत ने 13 मुकाबलों में जीत दर्ज की है.

चेन्नई की इस क्रिकेट पिच पर आज भले ही विराट कोहली की कप्तानी में इंडियन क्रिकेट टीम ने रिकॉर्ड बना दिया हो, लेकिन कभी यही चेपक पिच सचिन और करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों के आंखों में आंसू की वजह बनी थी.



वो 31 जनवरी का 1999 का दिन था. टीम इंडिया के मौजूदा कप्तान विराट कोहली की उम्र उस वक्त सिर्फ 10 साल होगी. करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों की निगाहें चेन्नई पर टिकी हुई थीं. परमाणु परीक्षण के बाद पहली बार भारत और पाकिस्तान की टीम आमने-सामने थी.
चेन्नई के मुश्किल विकेट पर भारत को जीत के लिए 271 रन का टारगेट मिला था. वसीम अकरम, वकार युनूस और सकलेन मुश्ताक जैसे गेंदबाजों के सामने लक्ष्य बेहद मुश्किल नजर आ रहा था.

30 जनवरी को खेल खत्म हुआ तो भारत के सामने मुश्किलें कम नहीं थीं. 40 रन पर भारत के दो विकेट गिर चुके थे. सारी उम्मीदें सचिन तेंदुलकर पर टिकी थी, जो पहली पारी में खाता भी खोल नहीं पाए थे.

मैच के चौथे दिन के पहले सत्र में ही भारत की सारी उम्मीदें खत्म होती दिखीं. 82 रन पर मेजबान टीम की आधी पारी पवेलियन लौट चुकी थी. चेन्नई की उमस में बल्लेबाजी सचिन के लिए भी आसान नहीं थी. फिर भी मौसम और गेंदबाज से लड़ते हुए वह विकेट पर डटे हुए थे.

भारत का पांचवां विकेट सौरव गांगुली के रूप में गिरा, तो विकेट कीपर बल्लेबाज नयन मोंगिया सचिन का साथ देने के लिए मैदान पर उतरे. मोंगिया के साथ सचिन की जोड़ी जम गई. धीरे-धीरे भारत लक्ष्य की तरफ कदम बढ़ाने लगा. पहले 100, फिर 150 और 200 रन का स्कोर भी भारत ने पार कर लिया.

भारत जीत से 53 रन दूर था, तब मोंगिया ने सचिन का साथ छोड़ दिया. फिर भी सचिन क्रीज पर थे, तो जीत का भरोसा भी था. सचिन ने सुनील जोशी के साथ मिलकर स्कोर 254 रन तक पहुंचाया.

लक्ष्य जितना करीब आ रहा था, सचिन के लिए विकेट पर खड़ा होना उतना मुश्किल साबित हो रहा था. सचिन कमर में खिंचाव की वजह से बेहद दिक्कत महसूस कर रहा था. हर गेंद पर दर्द बढ़ता जा रहा था, लेकिन सचिन उसे अपनी बल्लेबाजी पर हावी होने नहीं दे रहे थे.

दर्द से बेहाल सचिन कुछ शानदार शॉट्स खेलकर लक्ष्य की तरफ तेजी से कदम बढ़ा रहे थे. अब भारत को जीत के लिए 16 रन की दरकार थी और चार विकेट शेष थे.

फिर वो हुआ जिसकी आशंका किसी को नहीं थी. सकलेन मुश्ताक की 'दूसरा' को पढ़ने में सचिन नाकाम रहे और गेंद हवा में उछली. मिड ऑफ पर वसीम अकरम ने मौका नहीं गंवाया और सचिन भारी मन से धीरे-धीरे पवेलियन लौट रहे थे.

चेपक में कुछ देर के लिए पिन ड्रॉप साइलेंस था. दर्शकों को यकीन नहीं हुआ कि लाजवाब बल्लेबाजी कर रहे सचिन आउट भी हो सकते थे. खैर, कुछ पलों बाद दर्शकों को अहसास हुआ कि उनका हीरो ड्रेसिंग रूम में जाकर उनकी आंखों से ओझल हो जाएगा, तो स्टेडियम के सारे दर्शक उनके सम्मान में खड़े थे.

क्रिकेट प्रेमियों को यकीन था कि पुछल्ले बल्लेबाज इस छोटे से लक्ष्य को हासिल कर लेंगे. लेकिन क्रिकेट का खेल हमेशा से दर्शकों की 'फिरकी' लेता है. उस मैच में भी ऐसा हुआ. सचिन के आउट होने के बाद भारत ने शेष तीन विकेट चार रन के भीतर गंवा दिए. लक्ष्य के इतना करीब पहुंचने के बाद भी भारत 12 रन से मैच हार गया.

चेन्नई टेस्ट में सचिन तेंदुलकर ने शानदार शतक के बावजूद पाकिस्तान की जीत हुई. सचिन प्रजेंटेशन में नहीं पहुंचे. जब इसके बारे में तत्कालीन बीसीसीआई अध्यक्ष राजसिंह डूंगरपुर से पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'वह ड्रेसिंग रूम में रो रहा है.'

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