राजस्थान रॉयल्स के तेज गेंदबाज़ चेतन सकारिया के पिता का कोविड-19 से निधन

चेतन सकारिया ने राजस्‍थान रॉयल्‍स के लिए शानदार प्रदर्शन किया था (PTI)

चेतन सकारिया ने राजस्‍थान रॉयल्‍स के लिए शानदार प्रदर्शन किया था (PTI)

राजस्थान रॉयल्स (Rajasthan Royals) के तेज गेंदबाज चेतन सकारिया (Chetan Sakariya) के पिता का कोविड-19 (COVID-19) संक्रमण की वजह से निधन हो गया. चेतन के पिता कुछ दिनों से कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहे थे.

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नई दिल्ली. राजस्थान रॉयल्स के तेज गेंदबाज़ चेतन सकारिया के पिता का कोविड-19 संक्रमण की वजह से हो निधन गया. चेतन के पिता कुछ दिनों से कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहे थे. आईपीएल 2021 के स्थगित होने के बाद चेतन गुजरात के भावनगर पहुंचे, जहां उनके पिता का इलाज चल रहा था. इस तेज गेंदबाज ने आईपीएल के इस सीजन में मिले पैसे पिता के इलाज में लगा दिए थे. उन्‍हें पिछले सप्‍ताह ही मालूम चला था कि उनके पिता कोरोना से जंग लड़ रहे हैं.

इस उभरते गेंदबाज ने कहा था कि वह अपने पिता के बेहतर इलाज के लिए आईपीएल के इस सीजन से हुई पूरी कमाई को लगा देंगे. हालांकि उनके पिता बच नहीं सके. राजस्‍थान ने इस खिलाड़ी को 1.2 करोड़ रुपये में खरीदा था. उन्‍होंने इस सीजन में 7 मैच में 7 विकेट लिए थे, जिसमें एमएस धोनी, सुरेश रैना, केएल राहुल के विकेट शामिल हैं. सकारिया के परिवार की बात करें तो उनके पिता एक समय टेम्‍पो चलाते थे. मगर दो साल पहले उन्‍होंने यह नौकरी छोड़ दी थी.

भारत में कोरोना से हालात बेकाबू हो चुके हैं. पिछले चार दिनों से प्रतिदिन चार लाख से ज्यादा कोरोना वायरस केस आ रहे हैं और करीब चार हजार लोगों की मृत्यु भी हो रही है. अभी दो दिन पहले भारतीय क्रिकेटर वेदा कृष्णमूर्ति की बहन का निधन कोरोना वायरस की वजह से हुआ था. इससे दो हफ्ते ही वेदा की मां इसी बीमारी की वजह से चल बसी थी.

इससे पहले शनिवार को भारतीय हॉकी को एक ही दिन में दोहरा झटका लगा है. साल 1980 में मॉस्को ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम के दो सदस्य एमके कौशिक और रविंदर पाल सिंह का कोरोना वायरस संक्रमण के चलते निधन हो गया था.
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कौशिक भारतीय टीम के दिग्गज खिलाड़ियों में शुमार रहे जिन्होंने 1980 में मॉस्को में स्वर्ण पदक जीता था. हरियाणा के इस पूर्व भारतीय हॉकी खिलाड़ी ने 1980 के ओलंपिक में तीन गोल दागे थे, जिनमें से एक फाइनल मुकाबले में भारत ने स्पेन को आठवें ओलंपिक खिताब के लिए हराया था. उन्हें साल 1998 में अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया था, साल 2002 में उन्हें प्रतिष्ठित द्रोणाचार्य अवॉर्ड से सम्मानित किया गया.

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