Sunday Special: देश में खेलों में हर तरह से हावी है चीन, भारतीय कंपनियों पर भी है प्रभाव

Sunday Special: देश में खेलों में हर तरह से हावी है चीन, भारतीय कंपनियों पर भी है प्रभाव
क्रिकेट से लेकर खेल के सामान और एप तक में भी चीनी कंपनी का पैसा लगा हुआ है (फाइल फोटो)

देश में खेलों की आधी स्‍पॉन्‍सरशिप चीनी कंपनियों के पास है. फिर चाहे वो टीम इंडिया की जर्सी हो या बैडमिंटन. प्रो कबड्डी लीग में भी चीनी प्रभाव है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 23, 2020, 7:27 AM IST
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नई दिल्‍ली. लद्दाख सीमा पर भारत और चीन के बीच तनाव के बाद देशभर में चीनी कंपनियों का बहिष्‍कार किया जा रहा है. इसका असर खेल पर भी नजर आ रहा है. देश में खेल टूर्नामेंट, खेल उपकरणों, एप हर किसी में चीनी कंपनी का हाथ है. चीनी बाजार क्रिकेट में काफी अधिक फैला हुआ है. आईपीएल 2020 (IPL 2020), टीम इंडिया, आईसीसी (icc), एप हर कहीं चीनी कंपनियां हावी है. हालांकि आईपीएल की मुख्‍य प्रायोजक के रूप में बीसीसीआई और वीवो के बीच करार खत्‍म हो गया है और अब ड्रीम इलेवन आईपीएल के इस सीजन की टाइटल स्‍पॉन्‍सर बन गई है. मगर इसके बावजूद अधिकतर जगहों पर इसका प्रभाव है.

बीसीसीआई को वीवो से सालाना 440 करोड़ रुपये मिलते थे जिसके साथ उसका करार 2022 में खत्म होने वाला था. पिछलें 10 साल में आईपीएल की टाइटल स्‍पॉन्‍सरशिप वैल्‍यू 1000 हजार प्रतिशत तक बढ़ी है. बीसीसीआई (BCCI) और वीवो के बीच 2022 तक के लिए 2199 करोड़ रुपये का करार हुआ था. यानी वीवो से बीसीसीआई को हर साल 440 करोड़ मिलते थे. अगर चीनी कंपनियों की भारत में खेलों में भागीदारी की बात करें तो करीब 50 फीसदी स्‍पॉन्‍सरशिप इन्‍हीं के पास हैं.

क्रिकेट में चीनी कंपनियों का प्रभाव
1. टीम इंडिया (Team India) की जर्सी की मौजूदा स्‍पॉन्‍सर बायजू है. इससे पहले टीम इंडिया की जर्सी पर ओप्‍पो का नाम नजर आता था. बीसीसीआई और ओप्‍पो के बीच 2017 में 1 हजार 79 करोड़ का पांच साल तक के लिए करार हुआ था, मगर ओप्‍पो ने पिछले साल ही यह स्‍पॉन्‍सरशिप भारतीय कंपनी बायजू को ट्रांसफर कर दी. मगर बायजू की बात करें तो इसमें भी चीनी कंपनी टेंसेंट का पैसा लगा है.
2. ड्रीम इलेवन एप भी आईपीएल की आधिकारिक पार्टनर है और अब तो टाइटल स्‍पॉन्‍सर भी बन गई है.  यही नहीं स्विगी भी इसकी एसोसिएट स्‍पॉन्‍सर है. दोनों में चीनी कंपनी का ही निवेश है. यहां तक कि ड्रीम इलेवन में भी 10 प्रतिशत से कम चीन के हिस्‍सेदारी है.



टीम इंडिया की जर्सी में भी चीनी कंपनी का प्रभाव है


3. टीम इंडिया के घरेल मैचों की टाइटल स्‍पॉन्‍सरशिप पेटीएम के पास है और मीडिया रिपोर्ट्स के मानें तो इसमें भी चीनी कंपनी की 37 फीसदी हिस्‍सेदारी है.

4. सिर्फ आईपीएल या फिर टीम इंडिया में ही चीनी कंपनी का प्रभाव नहीं है, बल्कि आईसीसी की ग्‍लोबल पार्टनर भी चीनी कंपनी ही है. पिछले साल की आईसीसी ने घोषणा की थी कि चीनी कंपनी ओप्‍पो 2023 तक उसकी ग्‍लोबल पार्टनर रहेगी. यानी आईसीसी के इवेंट्स की ऑफिशियल पार्टनर चीनी कंपनी ही है.

5. आईपीएल फ्रेंचाइजी रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर , चेन्‍नई सुपर किंग्‍स, किंग्‍स इलेवन पंजाब, दिल्‍ली कैपिटल्‍स, राजस्‍थान रॉयल्‍स और मुंबई इंडियंस में भी चीनी कंपनी का प्रभाव है.

बाकी खेलों में भी चीनी प्रभाव
सिर्फ क्रिकेट में भी चीनी कंपनी हावी नहीं है, बल्कि प्रो कबड्डी लीग की स्‍पॉन्‍सर भी चीनी कंपनी ही है. वीवो ने इस लीग के लिए 60 करोड़ रुपए सालाना की डील की थी.

खेल सामान पर चीन का दबदबा
टूर्नामेंट या लीग में ही चीनी कंपनी का दबदबा नहीं है, बल्कि खेल सामान पर भी उसका प्रभाव है. वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2019 से फरवरी 2020 तक भारत ने चीन से करीब 91 हजार 872 लाख रुपये के स्‍पोर्ट्स उपकरण और खेल से जुड़े उत्‍पाद मंगाए.

भारतीय ओलिंपिक संघ
चाइनीज स्‍पोर्ट्स ब्रांड ली निंग ओलिंपिक्‍स के लिए स्‍पॉन्‍सर है. यही नहीं पीवी सिंधु और किदांबी श्रीकांत का भी ली लिंग से चार के लिए करीब 50 और 35 करोड़ रुपये का करार है.

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आधी स्‍पॉन्‍सरशिप चीनी कंपनियों के पास
देश में खेलों की आधी स्‍पॉन्‍सरशिप चीनी कंपनियों के पास है. 2018 में एडवरटाइजिंग फर्म ग्रुप एंड मीडिया कंपनी की प्रकाशित आंकड़ो के अनुसार चीन की बीबीके इलेक्‍ट्रोनिक्‍स अधिकार वाली मोबाइल कंपनियों की भारत में खेले जाने वाले लगभग सभी बड़े इवेंट्स में कुल स्‍पॉन्‍सरशिप की हिस्‍सेदारी 50 फीसदी है.
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