बांस का बैट बढ़ा सकता है गेंदबाजों का सिरदर्द, स्टडी में दावा-बिग हिटिंग के लिए है BEST

इंग्लिश विलो को टक्कर देने आए बांस के बने क्रिकेट बैट (प्रतीकात्मक तस्वीर)

इंग्लिश विलो को टक्कर देने आए बांस के बने क्रिकेट बैट (प्रतीकात्मक तस्वीर)

क्रिकेट के बल्लों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक अंग्रेजी विलो को एक मजबूत प्रतियोगी मिल गया है. ब्रिटेन के एक शोध पर विश्वास किया जाए तो उनका दावा है कि बांस से बने क्रिकेट बैट न केवल विलो के लिए एक विकल्प हैं बल्कि इनका स्वीट स्पॉट भी कहीं बेहतर है.

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नई दिल्ली. क्रिकेट के बल्लों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक इंग्लिश विलो को एक मजबूत प्रतियोगी मिल गया है. अगर ब्रिटेन के एक शोध पर विश्वास किया जाए तो उनका दावा है कि बांस से बने क्रिकेट बैट न केवल विलो का लिए एक विकल्प हैं बल्कि इनका स्वीट स्पॉट भी कहीं बेहतर है. इसके साथ ही यह ज्यादा टिकाऊ भी हैं. कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के अध्ययन के अनुसार विलो की तुलना में बांस 22 फीसदी अधिक कड़ा है. ऐसे में गेंद बल्ले पर आने के बाद कहीं ज्यादा गति के साथ जाएगी. साथ ही इन बल्लों के स्वीट स्पॉट (वह जगह, जहां बॉल लगने के बाद गेंद तेज गति से दूर उड़ती हुई जाती है) भी कहीं ज्यादा बेहतर हैं.

कैम्ब्रिज सेंटर फॉर नेचुरल मैटेरियल इनोवेशन के डॉ. दर्शील शाह ने कहा, ''यह एक बल्लेबाज का सपना है. बांस के क्रिकेट बैट का स्वीट स्पॉट यॉर्कर पर चौके मारना कहीं आसान बनाता है. लेकिन यह सभी प्रकार के स्ट्रोक के लिए रोमांचक है.'' खेल इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी जर्नल में प्रकाशित हुआ यह अध्ययन बताता है कि एक क्रिकेट बैट को चीरे हुए बांस से निर्मित किया जा सकता है. यह पारंपरिक विलो से बने एक की तुलना में काफी अधिक घनत्व वाला है.

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हालांकि, विलो बैट के समान आयाम वाले बांस के बैट अधिक भारी होते हैं, लेकिन डॉ. शाह खुद एक अंडर-19 क्रिकेटर रह चुके हैं, वह कहते हैं कि वे इसे अनुकूल करने के लिए काम कर रहे हैं. शोधकर्ताओं का यह भी दावा है कि चीरे हुए बांस का उपयोग कर बल्ला बनाने से क्रिकेट अधिक टिकाऊ खेल बन जाएगा और साथ ही इसकी वैश्विक अपील को भी बढ़ेगी.
अध्ययन में कहा गया, ''चीरे हुए बांस के उपयोग से क्रिकेट अधिक टिकाऊ खेल बन सकता है, घटती विलो आपूर्ति के सामने खेल के वैश्विक स्तर पर बढ़ने से बल्लों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में बांस के बल्ले एक अच्छा विकल्प हो सकते हैं. तथ्य यह है कि यह सस्ता है. जल्दी बढ़ता है (विलो के लिए आवश्यक 15 वर्षों की तुलना में बांस को परिपक्व होने के लिए सात वर्षों की आवश्यकता है) और प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है.

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डॉ. दर्शील शाह ने गार्डियन को दिए एक इंटरव्यू में कहा, ''यह उन देशों में भी प्रचलित है जो चीन, जापान, दक्षिण अमेरिका की तरह क्रिकेट को भी अपना रहे हैं.''

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