28 साल पहले हमारे 3 स्पिनरों ने इंग्लैंड के खिलाफ कोहराम मचा दिया था, इस बार क्या होगा?

1993 की भारत इंग्लैंड टेस्ट सीरीज में तीनों स्पिनर ने मिलकर 46 विकेट लिए थे.

1993 की भारत इंग्लैंड टेस्ट सीरीज में तीनों स्पिनर ने मिलकर 46 विकेट लिए थे.

Cricket Diary: क्रिकेट डायरी के इस अंक में हम भारत और इंग्लैंड सीरीज (India Vs England) की बात कर रहे हैं. लेकिन बात 28 साल पहले खेली गई सीरीज को याद करते हुए होगी. स्पिनरों के दबदबे की शुरुआत वाली उस सीरीज का कमाल क्या 2021 में भी फिरकी गेंदबाज दोहरा पाएंगे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 5, 2021, 11:17 PM IST
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नई दिल्ली. आज से ठीक 28 साल पहले इंग्लैंड की टीम भारत के खिलाफ तीन टेस्ट मैचों की सीरीज का पहला मैच कोलकाता में खेल रही थी. 3 स्पिनरों और 2 मध्यम तेज गति के गेंदबाजों के साथ उतरी टीम इंडिया ने इंग्लैंड को चारों खाने चित कर दिया था. टीम इंडिया के 3 स्पिनरों की फिरकी में उलझकर इंग्लैंड को फॉलोओन तक खेलना पड़ा था. वो सीरीज भारत ने 3-0 से जीतकर सूपड़ा साफ कर दिया था. ये जीत उसे तब मिली थी, जब वह इससे पहले तीन में से दो सीरीज हार चुकी थी. और जिम्बाब्वे जैसी टीम से उसे ड्रॉ सीरीज खेलनी पड़ी थी. अब 28 साल के बाद फिर से इंग्लैंड की टीम भारत में टेस्ट सीरीज खेलने आ चुकी है और पहले दिन के खेल पर नजर डालें तो कहानी काफी बदली नजर आती है.

पहले टेस्ट के पहले दिन इंग्लिश बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों की चुनौती का बखूबी जवाब दिया. खासकर ऑस्ट्रेलिया में भारतीय गेंदबाजों के प्रदर्शन को देखते हुए इंग्लैंड की बल्लेबाजी की तारीफ करनी होगी. भारत इस मैच में दो तेज गेंदबाज और तीन स्पिनरों के साथ उतरा है. देसी पिच के मिजाज को देखते हुए भारत अक्सर 3 स्पिनरों के साथ उतरता रहा है. इस टेस्ट में पहले दिन जिस तरह इंग्लैंड ने मुकाबला किया है, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि अभी तक स्पिनर उतने असरदार नहीं रहे हैं. जितने 1993 में खेली गई सीरीज में रहे थे. उस सीरीज में अनिल कुंबले, वेंकटपति राजू और राजेश चौहान ने मिलकर पिच पर तूफान ला दिया था. वो पूरी सीरीज ही स्पिनरों के नाम रही थी. ऐसा भी कहा जाता है कि वहीं से घरेलू मैचों में भारत के स्पिनरों का दबदबा शुरू हुआ था. हालांकि उस सीरीज से इस सीरीज की तुलना काफी जल्दबाजी होगी, लेकिन फिर भी अगर इन्हें देखें तो कुछ दिलचस्प आंकडे सामने आते हैं.

तब पहले टेस्ट में 20 में से 17 विकेट सिर्फ स्पिनरों ने लिए थे

1993 के पहले टेस्ट में स्पिनरों के दबदबे का हाल ये था कि भारत की ओर से लिए गए 20 विकेट में 17 विकेट स्पिनरों ने लिए. मध्यम तेज गति के गेंदबाजों को सिर्फ 3 विकेट मिले. इस मैच में अभी देखना होगा कि भारतीय स्पिनर क्या कमाल करते हैं. हालांकि पहले दिन इंग्लैंड ने उनका डटकर सामना किया है.
जब तेज गेंदबाज कामयाब तो स्पिनर क्यों

भारत ने हाल में ऑस्ट्रेलिया को उसके ही घर में अपने नए नवेले तेज गेंदबाजों के सहारे मात दी है. फिर भारत में आते ही स्पिनरों पर जोर क्यों. जाहिर है ये सवाल आम क्रिकेट प्रेमी के मन में होगा. माना जाता है कि चेन्नई की पिच स्पिनरों को मदद करती है. ऐसे में टीम मैनेजमेंट ने स्पिन तिकडी को ही आजमाने का फैसला किया हो. उसने ये फैसला इंग्लैंड की टीम के स्पिन अटैक को देखते हुए लिया हो. क्योंकि इंग्लिश टीम का पेस अटैक भारत की टक्कर का है, लेकिन उनकी टीम का स्पिन आक्रमण भारत के मुकाबले कमजोर पडता है.

हालांकि टीम मैनेजमेंट सोच रहा होगा कि वॉशिंगटन सुंदर की जगह रिस्ट स्पिनर कुलदीप यादव को मौका दिया जा सकता था. वह जोखिम लेते हैं और विकेट चटकाने में मदद करते हैं. पहले दिन के मैच को देखें तो टीम के स्पिनर एकविकेट ले सके. यहां तक कि वह रन रोकने में भी कामयाब नहीं हो सके.



तब तीन अलग अलग शैली के स्पिनर के साथा खेले अब दो

भारत इस टेस्ट में तीन स्पिनर के साथ उतरी है. इसमें रविचंद्रन अश्विन और वॉशिंगटन सुंदर ऑफ स्पिनर हैं. वहीं शाहबाज नदीम लेफ्ट आर्म स्पिनर हैं. लेकिन 1993 में जो 3 स्पिनर उतरे थे, वो तीनों अलग अलग थे. अनिल कुंबले लेग स्पिनर थे, वेंकटपति राजू लेफ्ट आर्म तो राजेश चौहान ऑफ स्पिन करते थे.

तब राजेश चौहान ने डेब्यू किया था, अब शाहबाज नदीम ने

इन दोनों सीरीज में एक और समानता है. तब पहले टेस्ट में राजेश चौहान ने डेब्यू किया था. अब 2021 की सीरीज में शाहबाज नदीम ने डेब्यू किया है.
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