क्रिकेट डायरी: जिस खिलाड़ी की कप्तानी में भारत को इंग्लैंड के खिलाफ ही मिली पहली विजय, नाम पर होता है टूर्नामेंट

विजय हजारे ने 14 मैचों में कप्तानी की और टेस्ट दर्जा हासिल करने के 20 साल बाद पहली बार टीम को जीत दिलाई.

विजय हजारे ने 14 मैचों में कप्तानी की और टेस्ट दर्जा हासिल करने के 20 साल बाद पहली बार टीम को जीत दिलाई.

Cricket Diary Vijay Hazare: क्रिकेट के मैदान में एक ओर टीम इंडिया और इंग्लैंड टेस्ट सीरीज की गर्मी है तो भारत में घरेलू टीमें विजय हजारे ट्रॉफी के लिए जोर लगा रही हैं. कई बडे खिलाडी इस ट्रॉफी में अपना बल्ला चलाकर टीम इंडिया में जगह के लिए दावा ठोक रहे हैं. क्रिकेट डायरी में आज बात विजय हजारे की, जिनकी कप्तानी में ही टीम इंडिया को टेस्ट क्रिकेट में पहली जीत मिली थी, वह भी इंग्लैंड के खिलाफ.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 26, 2021, 7:58 PM IST
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नई दिल्ली: क्रिकेट के शुरुआती दिनों में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के दबदबे वाले दौर में कई खिलाड़ी ऐसे रहे, जिन्होंने मौका मिलने पर टीम इंडिया की विजय की पताका फहराई. जाहिर है ऐसा करने वाला हर खिलाड़ी भारतीय क्रिकेट में खास स्थान रखता है. ऐसे ही एक खिलाड़ी थे विजय हजारे. भारत को टेस्ट क्रिकेट में पहली जीत विजय हजारे की कप्तानी में इंग्लैंड के खिलाफ ही मिली थी. ये मैच तब मद्रास में खेला गया था. भारत को टेस्ट क्रिकेट खेलने का दर्जा 1932 में प्राप्त हुआ था. लेकिन पहली जीत उसे 20 साल बाद 1952 में मिली. तब टीम इंडिया के कप्तान विजय हजारे थे. उन्होंने उस दौर में टीम के लिए कमाल के रिकॉर्ड बनाए. अब उनके नाम पर घरेलू क्रिकेट में वनडे फॉर्मेट में विजय हजारे ट्रॉफी का आयोजन किया जाता है.

11 मार्च 1915 में महाराष्ट्र के सांगली में जन्मे विजय हजारे शुरुआत में क्रिकेट और फुटबॉल दोनों खेल में पारंगत थे. वह शुरुआत में मीडियम पेसर गेंदबाज थे, वह रिस्ट स्पिनर भी थे. हजारे ने अपनी पहली नौकरी महाराज विक्रम सिंह ऑफ देवास (मध्य प्रदेश) के यहां पर की. उन्हें सबसे पहले कोचिंग ऑस्ट्रेलियन स्पिनर क्लेरी ग्रिमेट ने दी. ग्रिमेट ही थे, जिन्होंने विजय हजारे से कहा कि वह अपनी बल्लेबाजी पर फोकस करें. इसके 22 जून 1946 को लॉड्र्स में विजय हजारे ने अपने करियर की शुरुआत की. उन्होंने भारत की ओर से 30 मैच खेले. इसमें उन्हेांने 47.65 की औसत से 2192 रन बनाए. इसमें सात शतक और 9 अर्धशतक शामिल हैं. इसके अलावा उन्हेांने 20 विकेट भी लिए.

डॉन ब्रेडमैन को दो बार किया बोल्ड

क्रिकेट में जब डॉन ब्रेडमैन के बल्ले का आतंक था, उस समय हर गेंदबाज उनका विकेट लेना चाहता था. लेकिन विजय हजारे उन विरले गेंदबाजों में से एक हैं, जिन्हेांने एक ही सीरीज में ब्रेडमैन को दो बार बोल्ड किया था. 1947-48 में ऑस्ट्रेलिया केदौरे पर गई टीम इंडिया में विजय हजारे को भी शामिल किया गया. उस दौरे में विजय हजारे ने दो शतक लगाए. इतना ही नहीं उन्हेांने उस सीरीज में डॉन ब्रेडमैन को दो बार बोल्ड किया.
विजय हजारे पहले भारतीय बल्लेबाज थे, जो टेस्ट क्रिकेट में 1000 रन के आंकड़े तक पहुंचे. उन्होंने ये आंकड़ा  25वीं पारी में ही हासिल कर लिया था. प्रथम श्रेणी मैचों में विजय हजारे ने 238 मैच खेले. इसमें उन्हेांने 58.38 की औसत से 18740 रन बनाए. इसमें 60 शतक और 73 अर्धशतक शामिल हैं.

टीम इंडिया को दिलाई पहली जीत

1951 में विजय हजारे टीम इंडिया के कप्तान बने. इंग्लैंड की टीम भारत के दौरे पर आई थी. पहले दो टेस्ट मैचों में विजय हजारे ने शतक बनाए. कानपुर में हुए टेस्ट में भारत को हार का सामना करना पडा. अंतिम टेस्ट तब के मद्रास में हुआ. इस मैच में भारत ने इंग्लैंड को पारी और 8 रनों से हराकर टेस्ट क्रिकेट में पहली जीत हासिल की. हजारे ने 14 टेस्ट मैचों में भारत के लिए कप्तानी की. इनमें 9 इंग्लैंड के खिलाफ और 5 वेस्ट इंडीज के खिलाफ थे. इन 14 टेस्ट में से 5 में भारत को हार का सामना करना पडा, 8 मैच ड्रॉ हुए. लेकिन एक मैच में उन्हें जीत भी मिली. अप्रैल 1953 में विजय हजारे ने अपना आखिरी मैच वेस्ट इंडीज के खिलाफ खेला था.  18 दिसंबर 2004 को आंत के कैंसर से उनका निधन हो गया.



2002-03 में हुई विजय हजारे ट्रॉफ की शुरुआत

क्रिकेट में विजय हजारे के शानदार योगदान को ध्यान में रखते हुए 2002-03 में रणजी ट्रॉफी की तर्ज पर वनडे फॉर्मेट में विजय हजारे ट्रॉफी की शुरुआत हुई. इस सीरीज को सबसे ज्यादा 5 बार तमिलनाडु ने जीता है. कोरोना के बाद शुरू हुए खेल के बाद घरेलू मैदान पर अभी ये सीरीज खेली जा रही है. अभी कर्नाटक इसकी चैंपियन है.
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