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‘स्टेन-गन’ की फायरिंग में छुपा है भारत के लिए वर्ल्ड कप में कामयाबी का राज

भारतीय टीम (bcci)

भारतीय टीम (bcci)

डेल स्टेन ने आईपीएल में आरसीबी के लिए जो किया वह दिखाता है कि वर्ल्ड कप मे भारत के गेंदबाज भी टीम के लिए काफी अहम रहने वाले हैं

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    वर्ल्ड कप के लिए टीम इंडिया चुनी गई, तो सबसे पहले नजर थी उन खिलाड़ियों पर, जिनकी वजह से कप जीता जा सकता है. नजर गई बॉलिंग अटैक पर, जहां हर बॉलर मैच जिताने की काबिलियत रखता है. टीम इंडिया को देखकर समझ आता है कि अगर वर्ल्ड कप जीते, तो उसमें बॉलिंग अटैक का सबसे बड़ा रोल होगा. बल्कि पिछले कुछ साल में जो कामयाबी भारतीय टीम ने पाई है, उसमें भी बॉलिंग अटैक का सबसे बड़ा हाथ है, चाहे वो तेज गेंदबाज हों या स्पिनर्स.

    गेंदबाज कभी बल्लेबाज की तरह लाइमलाइट में नहीं रहते... और ये कामयाबी किसी एक गेंदबाज की नहीं, बल्कि पूरे दल की है, इसलिए उनके बारे में उतनी बात नहीं हुई, जितनी होनी चाहिए.

    टीम की कामयाबी अच्छे गेंदबाज से जुड़ी है

    अच्छे गेंदबाज का क्या मतलब है, वो आरसीबी से पूछिए. उनके साथ डेल स्टेन जुड़े, तो अचानक टीम में कुछ बदला-बदला दिखाई दे रहा है. लगातार हार झेलने के बाद पिछले दोनों मैच विराट कोहली की कप्तानी वाली आरसीबी टीम ने जीते हैं. इन दोनों जीत में गेंदबाजी आक्रमण की शुरुआत अहम बात रही है. उस गेंदबाजी आक्रमण में डेन स्टेन के आने का फर्क दिखाई देता है.

    पहले केकेआर के खिलाफ मैच. स्टेन ने क्रिस लिन को शुरुआत में ही आउट करके विपक्षी टीम पर दबाव बना दिया. उसके बाद सीएसके यानी चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ भी उन्होंने ऐसा ही किया. शुरू में ही शेन वॉटसन और सुरेश रैना के विकेट लेकर दबाव बना दिया. भले ही धोनी की वजह से मैच आखिरी गेंद तक गया. लेकिन धोनी से पहले ऐसा कोई मौका नहीं आया, जब आरसीबी हावी न हो. इसकी वजह यही थी कि स्टेन ने पहले ही ओवर मे दो झटके दे दिए थे. इससे समझ में आता है कि फॉरमेट कोई भी हो, विकेट लेना कितना अहम है. विकेट लेने के लिए उस तरह का गेंदबाज टीम में होना कितना अहम है, जो विकेट ले सके.

    स्टेन ने अब तक सीजन में दो मैच ही खेले हैं

    डेल स्टेन कुछ ही दिन पहले आरसीबी से जुड़े हैं. उन्होंने नैथन कूल्टर नाइल की जगह ली है, जो तमाम वजहों से टूर्नामेंट का हिस्सा नहीं बन पा रहे हैं. पिछले साल भी वो चोट की वजह से बाहर हो गए थे. उनके बाहर होने ने ही स्टेन के लिए दरवाजे खोले थे. स्टेन ने अब आने के बाद आरसीबी के लिए दरवाजे खोल दिए हैं. डेल स्टेन नौ साल पहले भी आरसीबी के लिए खेले थे. तब वो सबसे तेज गेंदबाजों में एक गिने जाते थे. अब भी वो तेज हैं. लेकिन तब 150 के आसपास की रफ्तार से वो 130 के आसपास आ गए हैं. लेकिन प्रभावशाली अब भी हैं. लेट स्विंग से लेकर, सटीक लाइन-लेंथ और अनुभव.. सब कुछ स्टेन के पास है.

    अनुभव ही था, जिससे उन्होंने दो विकेट लिए. आउट स्विंगर पर शेन वॉटसन को आउट किया. उसके बाद सुरेश रैना आए. वो शायद शॉर्ट पिच गेंद की उम्मीद कर रहे थे. स्टेन ने उनके दिमाग को सही तरीके से पढ़ा. बैकफुट पर खड़े रैना को परफेक्ट यॉर्कर से आउट किया. स्टेन का उदाहरण बताता है कि वर्ल्ड कप में टीम इंडिया के गेंदबाजों ने सही तरीके से अपना काम अंजाम दिया, तो क्या कुछ हो सकता है. टीम के पास ऐसे गेंदबाज हैं, जो अपने दम पर मैच जिता सकें. चाहे वो जसप्रीत बुमराह हों या भुवनेश्वर कुमार.. मोहम्मद शमी, कुलदीप यादव या युजवेंद्र चहल. ये सब मैच जिता सकते हैं. ये चले तो टीम चलेगी. आईपीएल में स्टेन का कमाल यही इशारा करता है.

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