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DDCA अध्यक्ष पद का मामला उलझा, रजत शर्मा पर लोकपाल के आदेश को शीर्ष परिषद ने किया खारिज


Updated: November 19, 2019, 10:19 PM IST
DDCA अध्यक्ष पद का मामला उलझा, रजत शर्मा पर लोकपाल के आदेश को शीर्ष परिषद ने किया खारिज
रजत शर्मा ने शनिवार को डीडीसीए अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था

एक दिन पहले ही लोकपाल के आदेश के बाद रजत शर्मा (Rajat Sharma) ने वापस से डीडीसीए अध्यक्ष पद का कार्यभार संभाला था

  • Last Updated: November 19, 2019, 10:19 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) की शीर्ष परिषद ने लोकपाल न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) बीडी अहमद के उस फैसले को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने रजत शर्मा (Rajat Sharma)  को डीडीसीए (DDCA) का अध्यक्ष बने रहने की स्वीकृति दी थी. शर्मा ने शनिवार को अपना इस्तीफा देते हुए कहा था कि वह संस्था में चल रही ‘खींचतान और दबावों’ में पद पर बने रहने में असमर्थ हैं.

लोकपाल ने हालांकि शर्मा का इस्तीफा नामंजूर कर दिया था और उन्हें अगली सुनवाई तक अपने पद पर बने रहने को कहा था. इसके साथ ही उन्होंने सुनवाई के लिए 27 नवंबर की तारीख तय की थी. लोकपाल का यह फैसला शीर्ष परिषद को पसंद नहीं आया, जिसके 15 में से नौ सदस्यों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके लोकपाल के फैसले को खारिज कर दिया और डीडीसीए में खेल के संचालन को प्रभावित करने वाले मुद्दों को भी उठाया.


लोकपाल के कार्यकाल पर भी सवाल

शीर्ष परिषद ने शर्मा को लिखे पत्र में कहा कि शीर्ष परिषद केसदस्यों की राय यह है कि आप डीडीसीए के अध्यक्ष के रूप दोबारा पदभार ग्रहण नहीं कर सकते हैं और आपको फिर से पद ग्रहण करने का जो ईमेल भेजा गया था उसे निरस्त माना जाएगा. उन्होंने कहा कि कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 168 (1) में यह स्पष्ट है कि निदेशक का इस्तीफा कंपनी को मिलने के बाद से ही प्रभावी होगा. कंपनी अधिनियम में कहीं भी इस बात का जिक्र नहीं है कि कंपनी को इस्तीफा सौंपने के बाद उसे वापस लिया जा सकता है. परिषद के लोकपाल के कार्यकाल पर भी सवाल उठाया.


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लोकपाल ने रजत शर्मा का इस्तीफा नामंजूर कर दिया था और उन्हें अगली सुनवाई तक अपने पद पर बने रहने को कहा था.


30 जून के बाद लिया गए सभी फैसले निरस्त
पत्र में कहा गया कि कि लोकपाल का कार्यकाल एक साल का था जो 30 जून 2018 से 29 जून 2019 तक प्रभावी था और संघ के नियम के अनुसार उनके कार्यकाल को सिर्फ एजीएम में बढ़ाया जा सकता है. ऐसे में माननीय लोकपाल के द्वारा 30 जून 2019 के बाद लिया गया हर फैसला निरस्त माना जाएगा. शर्मा के इस्तीफे के बाद मुख्य कार्यकारी अधिकारी रवि चोपड़ा (Ravi Chopra) और दो सदस्यीय क्रिकेट सलाहकार समिति में शामिल सुनील वाल्सन और यशपाल शर्मा ने भी इस्तीफा दे दिया था. परिषद के मुताबिक लोकपाल के निर्देश पर चोपड़ा सोमवार को फिर से अपने पद से जुड़ गए थे.




सीईओ का भी विरोध
शीर्ष परिषद के निदेशकों में शामिल संजय भारद्वाज ने कहा कि लोकपाल के आदेश के अनुसार सब कुछ वैसे ही बरकरार रहेगा जैसा 12 नवंबर से पहले था. सीईओ ने चार नवंबर को इस्तीफा दिया था और उसे अध्यक्ष ने स्वीकार कर लिया था, लेकिन अब लोकपाल के आदेश के बाद सीईओ फिर से अपने कार्यालय से जुड़ रहे हैं जिसका हमने विरोध किया.




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First published: November 19, 2019, 10:19 PM IST
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