कोरोना से जंग में आगे आए ऋषभ पंत, ग्रामीण इलाकों में पहुंचाएंगे ऑक्सीजन सिलेंडर और कोविड किट

ऋषभ पंत ने ऑक्सीजन सिलेंडर मुहैया कराने के लिए एक संगठन को दान दिया है.

ऋषभ पंत ने ऑक्सीजन सिलेंडर मुहैया कराने के लिए एक संगठन को दान दिया है.

दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान ऋषभ पंत (Rishabh Pant) ने कहा कि उन्होंने हेमकुंट फाउंडेशन को दान देने का फैसला किया है जो देश-भर में कोरोना संक्रमित लोगों को बेड, कोविड-राहत किट और ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध करने में मदद करेगा. उन्होंने कहा कि वह विशेष रूप से ग्रामीण भारत और गैर-मेट्रो शहरों को सहायता प्रदान करने वाले संगठनों के साथ काम करेंगे.

  • Share this:

नई दिल्ली. कोविड-19 के खिलाफ जंग में कई खिलाड़ी आगे आ रहे हैं और इस लिस्ट में नया नाम भारत के विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत (Rishabh Pant) का है. आईपीएल टीम दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान पंत ने शनिवार को कहा कि वह कोरोना से संक्रमित मरीजों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर, बेड और COVID-19 राहत किट खरीदने में मदद करेंगे. उन्होंने इसके लिए हेमकुंट फाउंडेशन को पैसे दान करने का फैसला किया है.

23 साल के पंत ने अपने इस फैसले की जानकारी सोशल मीडिया पर दी. उन्होंने एक पोस्ट शेयर किया जिसमें बताया कि वह फाउंडेशन के साथ मिलकर काम करेंगे और दान करेंगे जो देश में कोरोना संक्रमितों को ऑक्सीजन सिलेंडर, बेड और कोरोना रिलीफ किट उपलब्ध कराएगी.


पंत ने लिखा, 'हमारा देश बड़ी परेशानी में है और मैं इससे बहुत प्रभावित हुआ हूं. मैंने व्यक्तिगत नुकसान करीब से देखा है और इसलिए उन परिवारों का दर्द समझ सकता हूं जिन्होंने पिछले एक साल में काफी कुछ खो दिया है. मैं उन सभी लोगों की आत्मा के लिए प्रार्थना करता हूं जो हमें छोड़कर चले गए.'
इसे भी पढ़ें, कोरोना से जंग: विराट-अनुष्का ने दिए 2 करोड़ रुपये, सोशल मीडिया पर तारीफ

उन्होंने आगे लिखा, 'मैंने खेल से जो सबसे महत्वपूर्ण पहलू सीखा है, उनमें से एक है- टीम के रूप में साथ काम करने की शक्ति. मैं इस मुश्किल वक्त में फ्रंटलाइन वर्कर को सलाम करता हूं, जो पिछले एक साल में भारत की मदद करने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं. देश को इस मुश्किल समय से पार पाने में हम सभी के सामूहिक प्रयासों की जरूरत है. मैं हेमकुंट फाउंडेशन का साथ दे रहा हूं जो देश भर में संक्रमित लोगों को बेड, कोविड-राहत किट और ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध करने में मदद करेगा. मैं विशेष रूप से ग्रामीण भारत और गैर-मेट्रो शहरों को सहायता प्रदान करने वाले संगठनों के साथ काम करने के लिए उत्सुक हूं, जिनमें प्रमुख शहरों की तुलना में चिकित्सा बुनियादी ढांचे की क्षमता नहीं है.'

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज