पहले 10 में 9 युवा क्रिकेटर बनना चाहते थे कोहली, अब बुमराह बने रोल मॉडल-लक्ष्मीपति बालाजी

लक्ष्मीपति बालाजी भारतीय पेस अटैक से बेहद प्रभावित हैं (फोटो AFP)

लक्ष्मीपति बालाजी भारतीय पेस अटैक से बेहद प्रभावित हैं (फोटो AFP)

चेन्नई सुपर किंग्स के गेंदबाजी कोच लक्ष्मीपति बालाजी ने कहा कि पहले हर कोई सुनील गावस्कर, सचिन तेंदुलकर या विराट कोहली बनना चाहता था लेकिन अब युवा भी जसप्रीत बुमराह, शमी, इशांत या उमेश यादव बनना चाहते हैं.

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नई दिल्ली. भारत के पूर्व तेज गेंदबाज और चेन्नई सुपर किंग्स के गेंदबाजी कोच लक्ष्मीपति बालाजी ने भारतीय बॉलरों की जमकर प्रशंसा की है. बालाजी का कहना है कि पहले भारत के लाखों युवाओं के लिए सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली जैसे बड़े सितारे रोल मॉडल होते थे और युवा क्रिकेटर उनकी तरह ही बनना चाहते थे. लेकिन अब समय बदला है. अब कई युवा क्रिकेटर जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी और इशांत शर्मा जैसा बनना चाहते हैं. बालाजी ने कहा कि आज रोटेशन नीति के चलते भारत के पास बड़ा टैलेंट पूल है. उन्होंने कहा कि आईपीएल जैसे टूर्नामेंट ने तेज गेंदबाजों को खुद को साबित करने, प्रदर्शन करने और राष्ट्रीय टीम में शामिल होने का अवसर दिया है. ऐसा कुछ 1980 और 90 के दशक में नहीं था जिसके चलते कई प्रतिभाशाली गेंदबाज चूक गए थे .

बालाजी ने क्रिकेटनेक्स्ट से बातचीत में कहा, "वर्तमान भारतीय पेस अटैक एक पीरियड में विकसित हुआ है. 1980 के दशक में कपिल देव एक रोल मॉडल थे और बाद में हमारे पास मनोज प्रभाकर और जवागल श्रीनाथ थे. इन लोगों ने 1980 और 1990 के दशक में तेज गेंदबाज के रूप में लय स्थापित की. पिछले पांच या छह वर्षों में डेब्यू करने वाले खिलाड़ियों की संख्या पर नजर डालें. यह संख्या बड़ी है. उनके पास सभी प्रारूपों में काफी मौके हैं. यदि आप प्रथम श्रेणी स्तर या आईपीएल में पहचान प्राप्त करने में सक्षम हैं, तो आपको नजरअंदाज नहीं किया जाएगा. कई खिलाड़ी 1980 और 1990 के दशक में चूक गए. हाल के दिनों में सबसे अच्छी चीज जो हुई है वह है खिलाड़ियों का रोटेशन. कोई भी अच्छी प्रतिभा शायद ही छूटती है."

बालाजी ने कहा कि पहले रोटेशन नीति की कोई व्यवस्था नहीं थी. एक तेज गेंदबाज टीम में तभी शामिल हो पाता था जब दूसरा कोई चोटिल हो. उन्होंने कहा कि टी20 क्रिकेट के उदय और आईपीएल जैसी टी20 लीगों के बढ़ने से तेज गेंदबाजों के लिए ध्यान आकर्षित करने के लिए बहुत सारे रास्ते बने. बालाजी ने आगे कहा कि तेज गेंदबाजों का एक बड़ा टैलेंट पूल देश में उभरते क्रिकेटरों के लिए रोल मॉडल के रूप में बल्लेबाजों के वर्चस्व को बदल रहा है. उन्होंने कहा कि पहले हर कोई सुनील गावस्कर, सचिन तेंदुलकर या विराट कोहली बनना चाहता था लेकिन अब युवा भी बुमराह, शमी, इशांत या उमेश यादव बनना चाहते हैं.

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बालाजी ने कहा, "भारत में तेज गेंदबाजों की मौजूदा इकाई एक बड़ा परिवर्तन है. इससे पहले, 10 में से नौ युवा विराट कोहली या सचिन तेंदुलकर या एमएस धोनी बनना चाहते थे. आजकल, वे जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी या जहीर खान की तरह बनना चाहते हैं.” उन्होंने कहा कि तेज गेंदबाजों के चलते ही आज भारत लगातार टेस्ट में 20 विकेट लेने में सक्षम है.

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