पाकिस्तान नहीं अब भारत है तेज गेंदबाजों की 'फैक्ट्री'! पारस महाम्ब्रे के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत

न्यूजीलैंड में अंडर 19 वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम इंडिया के गेंदबाजी कोच हैं महाम्ब्रे

विमल कुमार@Vimalwa | News18Hindi
Updated: February 26, 2018, 11:51 AM IST
पाकिस्तान नहीं अब भारत है तेज गेंदबाजों की 'फैक्ट्री'! पारस महाम्ब्रे के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत
पाकिस्तान नहीं भारत है तेज गेंदबाजों की 'फैक्ट्री'? पारस महाम्ब्रे के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत
विमल कुमार@Vimalwa | News18Hindi
Updated: February 26, 2018, 11:51 AM IST
टीम इंडिया की अंडर 19 ब्रिगेड ने न्यूजीलैंड में वर्ल्ड कप जीतकर इतिहास रचा और इसकी सबसे बड़ी वजह रहे उसके तेज गेंदबाज. शिवम मावी, कमलेश नागरकोटी, ईशान पोरेल जैसे तेज गेंदबाज. जिन्होंने अपनी रफ्तार से विरोधी बल्लेबाजों को क्रीज पर जरा भी टिकने नहीं दिया था और भारत बिना कोई मैच हारे चौथी बार वर्ल्ड चैंपियन बना. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन तेज गेंदबाजों के पीछे के मास्टरमाइंड कौन थे? आखिर ये तेज गेंदबाज वर्ल्ड कप के लिए तैयार कैसे हुए? इन सभी सवालों के जवाब हमारे स्पोर्ट्स एडिटर विमल कुमार को अंडर 19 टीम के बॉलिंग कोच पारस महाम्ब्रे से मिले. जिन्होंने न्यूज 18 के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में कई अहम खुलासे किए.

सवाल- सब लोग सोच रहे थे कि अंडर 19 टीम के तेज गेंदबाज 145 किमी/घंटा की रफ्तार से गेंद फेंक रहे हैं. जबकि साउथ अफ्रीका में ईशांत शर्मा, मोहम्मद शमी जैसे गेंदबाज भी इतनी तेज गेंद नहीं फेंक रहे थे. जैसे-जैसे टूर्नामेंट आगे बढ़ता गया तो सबने देखा कि हमारे तेज गेंदबाजों की गेंदें जादू सरीखी लग रही थी. आप इन युवा गेंदबाजों के प्रदर्शन को कैसे आंकते हैं?

कमलेश नागरकोटी
कमलेश नागरकोटी


पारस महाम्ब्रे: मेरा ध्यान कभी भी इन गेंदबाजों की स्पीड पर नहीं था. ये गेंदबाजी का सिर्फ एक हिस्सा था. मैं उनकी गेंदों से बहुत खुश था. जिस तरह से उनकी गेंदें बल्लेबाजों के बल्ले पर लग रही थी. साथ ही किस तरह से वो पिच से बाउंस ले रहे थे.

मुझे लगता है कि सोच में कुछ बदलाव हुआ है. युवा तेज गेंदबाज तेज गेंदें फेंकना चाहते हैं जो गजब है. तेज गेंदों के लिए आपकी तकनीक और फिटनेस भी अच्छी होनी चाहिए जो कि इन युवा गेंदबाजों को अच्छी तरह से पता है. टीम इंडिया का फिटनेस लेवल काफी ऊपर है और यही जूनियर खिलाड़ी भी कर रहे हैं.  वैसे बीसीसीआई को भी इसका श्रेय जाना चाहिए. ये सभी तेज गेंदबाज नेशनल क्रिकेट एकेडमी गए जहां इन्हें तराशा गया. वर्ल्ड कप से पहले इन तेज गेंदबाजों पर काम किया गया.

सवाल- इन तेज गेंदबाजों पर क्या काम किया गया?
पारस महाम्ब्रे: इन तेज गेंदबाजों को वर्ल्ड कप से पहले एनसीए के फिजियो योगेश परमार के पास भेजा गया. यहां पर इन गेंदबाजों को परखा गया. इनकी कमजोरियों पर काम करने का प्लान बनाया गया. इसके बाद एनसीए के ट्रेनर आनंद दाते ने सभी खिलाड़ियों के लिए अलग फिटनेस प्रोग्राम बनाया. राहुल द्रविड़ समेत सभी लोग इनके संपर्क में थे. इन खिलाड़ियों की ट्रेनिंग पर हर तरह से नजर रखी गई.

राहुल द्रविड़ और शिवम मावी
राहुल द्रविड़ और शिवम मावी


हम हमेशा से चाहते थे कि ये खिलाड़ी सही समय पर अपना सबसे अच्छा प्रदर्शन करें. वर्ल्ड कप हमारे लिए बहुत बड़ा टूर्नामेंट था. हम चाहते थे कि जैसे ही टूर्नामेंट शुरू हो ये सभी तेज गेंदबाज और स्पिनर्स अपना बेस्ट प्रदर्शन करें. ये सब काम एनसीए में शुरू हुआ और उसका नतीजा आपको वर्ल्ड कप में देखने को मिला.

सवाल- भारतीय गेंदबाज हमेशा से स्विंग के लिए जाने जाते थे. अब आपको क्या लगता है, क्या अब स्विंग की जगह स्पीड ने ले ली है या फिर दोनों का बैलेंस होगा. टीम इंडिया के पास बहुत सारे तेज गेंदबाज हो गए हैं जो कि 140 किमी/घंटा की रफ्तार से गेंदें फेंकते हैं. एक तरह से ये स्तर सेट हो गया है कि अगर आप 140/घंटा की तेज रफ्तार से गेंद फेंकते हैं तो ही आपको टीम इंडिया में जगह मिलेगी?

पारस महाम्ब्रे: नहीं ऐसा बिलकुल नहीं है कि हर तेज गेंदबाज को 140 किमी/घंटा की रफ्तार से गेंदें फेंकनी होगी. मुझे लगता है कि हर गेंदबाज अलग होता है. यही टीम इंडिया में नजर आता है. भुवनेश्वर कुमार अलग हैं, ईशांत शर्मा, उमेश यादव और शमी अलग हैं. भुवनेश्वर की अपनी ताकत है जिस पर वो ध्यान लगाते हैं. सिर्फ तेजी जरूरी नहीं है.

भुवनेश्वर को ही देख लें वो दूसरे गेंदबाजों से थोड़े धीमे हैं लेकिन उन्हें गेंद का इस्तेमाल करना आता है. ये बेहद ही जरूरी है. आपने देखा हो कि कई गेंदबाज थे जो 150 किमी/घंटा से ज्यादा की रफ्तार से गेंद फेंकते थे लेकिन उनके पास स्विंग नहीं थी ऐसे में उन्हें पढ़ना आसान रहता था. आप किसी भी बल्लेबाज से पूछ लें तो वो यही कहेगा कि ग्लेन मैग्रा को शॉन टेट से खेलना मुश्किल है. जबकि टेट मैग्रा से तेज गेंद फेंकते थे. तो ऐसे में सिर्फ तेजी नहीं आपके अंदर कला और कौशल होना भी जरूरी है.

सवाल- भारतीय तेज गेंदबाजों की सफलता या कहें उनके उत्थान की आप क्या वजह मानते हैं?

पारस महाम्ब्रे: भारतीय तेज गेंदबाजों की सफलता की कोई एक वजह नहीं है. आईपीएल ने इसमें बड़ा रोल अदा किया है. ज्यादातर युवा खिलाड़ी आईपीएल देखते हैं. कुछ किस्मत वाले गेंदबाजों को आईपीएल के बड़े-बड़े गेंदबाजों के साथ जुड़ने का मौका मिल जाता है. वो अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों से सीखते हैं. एक युवा खिलाड़ी के तौर पर आपको नेट्स पर बड़े-बड़े इंटरनेशनल गेंदबाजों की तैयारियों को देखने का मौका मिलता है. वो कैसे मैच के लिए तैयारी करते हैं, क्या वर्कआउट करते हैं. युवा गेंदबाजों को बड़े-बड़े कोचों से सीखने का मौका मिलता है. साथ ही फिटनेस के बारे में भी युवा समझते हैं.

सवाल- ईशान पोरेल के पैरों में चोट लग गई थी इसके बाद उन्होंने खुलासा किया कि उन्होंने आपसे बात की थी. ईशान पोरेल को आपने कैसे राह दिखाई, उन्हें चोट भी लग गई थी और उन्हें आईपीएल कॉन्ट्रैक्ट भी नहीं मिला जबकि उनके साथी खिलाड़ियों को बड़ी रकम मिली.

ईशान पोरेल
ईशान पोरेल


पारस महाम्ब्रे:  मैंने सिर्फ एक बॉलिंग कोच के तौर पर काम नहीं किया बल्कि मैंने हर खिलाड़ी के साथ एक रिश्ता बनाया और उसे समझा. जब ईशान पोरेल को चोट लगी थी तो मैं जानता था कि उनके मन में क्या चल रहा होगा, क्योंकि ये सब मेरे साथ भी हो चुका है. आप देखेंगे कि पोरेल वर्ल्ड कप के पहले से ही अच्छी फॉर्म में थे. वो फर्स्ट क्लास खेल चुके थे और उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया था. ऐसे में अगर आपको वर्ल्ड कप के पहले ही मैच में चोट लग जाए तो कभी-कभी इससे आपका दिल टूट जाता है. मुझे लगा कि यही वक्त है कि उन्हें समझाना चाहिए और उनका हौसला बढ़ाना चाहिए.

सवाल- हमने हमेशा से सुना है और देखा भी है कि पाकिस्तान को तेज गेंदबाजों की फैक्ट्री कहा जाता था और हिंदुस्तान में स्पिनर्स ही निकलते थे. अब ऐसा लग रहा है कि हिंदुस्तान के पास पाकिस्तान से ज्यादा तेज गेंदबाज हैं. क्या आपको लगता है कि हालात बदल गए हैं?

पारस महाम्ब्रे: अब जो भी युवा गेंदबाज आ रहे हैं वो पहले से ही काफी कुछ जानते हैं. पैसा ने भी एक अहम रोल अदा किया है. अब अगर तेज गेंदबाज चोटिल हो जाएं तो बीसीसीआई और राज्य की खेल एसोसिएशन मदद करती है. गेंदबाजों के मन में एक सुरक्षा का भाव है. बीसीसीआई जो युवा खिलाड़ियों को पैसा दे रही है वो उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहा है. हम फिटनेस ट्रेनिंग को देखते हैं लेकिन जितना पैसा बीसीसीआई सिस्टम में लगा रही है उसका भी इसमें काफी बड़ा रोल है. मैं बहुत खुश हूं कि ये युवा खिलाड़ी इतना ज्यादा पैसा कमा रहे हैं.

ये भी पढ़ें-IPL 11 के शेड्यूल का ऐलान, 7 अप्रैल को मुंबई और चेन्नई के बीच होगा पहला मैच

 
News18 Hindi पर Bihar Board Result और Rajasthan Board Result की ताज़ा खबरे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें .
IBN Khabar, IBN7 और ETV News अब है News18 Hindi. सबसे सटीक और सबसे तेज़ Hindi News अपडेट्स. Sports News in Hindi यहां देखें.
पूरी ख़बर पढ़ें
अगली ख़बर