गौतम गंभीर: खुद पर नहीं था यकीन, फिर इस टीम के खिलाफ ठोके 310 रन और बदल गई जिंदगी

गौतम गंभीर: खुद पर नहीं था यकीन, फिर इस टीम के खिलाफ ठोके 310 रन और बदल गई जिंदगी
जानिए कैसे बदला गंभीर का करियर

गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) के क्रिकेट करियर में ऐसा भी दौर था जब उन्हें अपने टैलेंट पर शक था, उन्हें खुद पर यकीन नहीं था. फिर ऐसा क्या हुआ गंभीर के करियर में जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा

  • Share this:
नई दिल्ली. गौतम गंभीर...क्रिकेटर नहीं एक लड़ाका थे. आखिरी दम तक हार ना मानना, अपने कंधों पर जिम्मेदारी लेकर टीम के बारे में सोचना. मुश्किल मौकों पर खुद को साबित करना. ये थी गौतम गंभीर की वो खासियतें जो उन्हें दुनिया के दूसरे क्रिकेटरों से जुदा करती थीं. बाएं हाथ के इस ओपनिंग बल्लेबाज (Gautam Gambhir) ने 13 सालों तक भारतीय क्रिकेट की सेवा की और इस दौरान उन्होंने फैंस को दो ऐसे अनमोल तोहफे दिये जो चाहकर भी नहीं भुलाए जा सकते हैं. गौतम गंभीर ने साल 2007 में पहले टी20 वर्ल्ड कप में धुआंधार बल्लेबाजी कर टीम इंडिया को चैंपियन बनाया. इस टूर्नामेंट में गंभीर ने भारत की ओर से सबसे ज्यादा 37.83 की औसत से 227 रन बनाए. फाइनल मैच में गंभीर ने पाकिस्तान के खिलाफ 54 गेंदों में 75 रनों की पारी खेली.

वहीं आईसीसी वनडे वर्ल्ड कप 2011 में एक बार फिर खिताबी मुकाबले में गंभीर का बल्ला चला. श्रीलंका के खिलाफ गंभीर (Gautam Gambhir) ने 97 रनों की पारी खेली और टूर्नामेंट में 43 से ज्यादा कीऔसत से 393 रन बनाए. गंभीर की ये दो पारियां कई शतकों पर भारी हैं, क्योंकि उन्होंने बेहद दबाव भरे मैचों में खुद को बल्ले से साबित किया था. वैसे आपको बता दें गौतम गंभीर हमेशा से ऐसे खिलाड़ी नहीं रहे. जो गंभीर मैदान पर भरोसेमंद बल्लेबाज दिखते थे, वही गंभीर कभी खुद पर ही भरोसा नहीं करते थे. आइए आपको बताते हैं गंभीर के करियर का वो टर्निंग प्वाइंट जिसने उनकी ही नहीं इस देश के क्रिकेट की भी किस्मत बदली

गंभीर को था खुद की काबिलियत पर शक!
3 नवंबर 2004 को टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू करने वाले गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) वनडे टीम का अहम हिस्सा बने हुए थे. सफेद गेंद से उनकी बल्लेबाजी बिलकुल सही थी लेकिन इस बल्लेबाज को लाल गेंद के खिलाफ थोड़ी परेशानी होती थी. गंभीर अपनी पहले टेस्ट की दोनों पारियों में फेल रहे. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वो 2 पारियों में महज 4 रन बना सके. हालांकि इसके बाद गंभीर ने साउथ अफ्रीका और बांग्लादेश के खिलाफ अच्छी पारियां खेली. इसके बाद वो फिर अगली 3-4 सीरीज में फ्लॉप रहे. मतलब गंभीर टेस्ट क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रहे थे और अंदर ही अंदर उन्हें खुद की काबिलियत पर शक होने लगा था. गंभीर को लगने लगा था कि शायद वो टेस्ट क्रिकेट नहीं खेल पाएंगे.
ऐसे बदल गया गंभीर का करियर


गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) साल 2008 में श्रीलंका दौरे के लिए चुने गए. ये एक मुश्किल दौरा था क्योंकि विरोधी टीम में मुरलीधरन और अजंता मेंडिस जैसे स्पिनर थे, जिनके खिलाफ रन बनाना आसान काम नहीं था. खुद की काबिलियत पर शक कर रहे गंभीर ने तो श्रीलंका के खिलाफ 3 मैचों की टेस्ट सीरीज में कमाल ही कर दिया. गंभीर ने इस सीरीज में 51.66 की औसत से 310 रन बनाए. वो वीरेंद्र सहवाग के बाद सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी बने. बस इस सीरीज में अच्छा प्रदर्शन करने के साथ ही उन्हें ये यकीन हो गया कि वो टेस्ट क्रिकेट भी खेल सकते हैं.

खुद गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) ने एक इंटरव्यू में ये बात कही थी कि साल 2008 में श्रीलंका दौरा उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट रहा. उन्होंने कहा था, 'मुझे लगता है कि श्रीलंका दौरा मेरे करियर का टर्निंग प्वाइंट था. वहां मैने सहवाग के बाद सबसे ज्यादा रन बनाए थे. जिस तरह मैंने मुरलीधरन और मेंडिस जैसे गेंदबाजों का सामना किया, उसने मेरे अंदर विश्वास पैदा किया, मुझे लगा कि हां मैं भी टेस्ट क्रिकेट खेल सकता हूं.'

श्रीलंका दौरे के बाद गौतम का 'गंभीर' प्रदर्शन
2008 के श्रीलंका दौरे के बाद तो जैसे गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) के तेवर ही बदल गए. उन्होंने विरोधी टीमों की नाक में दम कर दिया. 2008 में ही ऑस्ट्रेलियाई टीम भारत आई और गंभीर ने 77.16 के औसत से 463 रन ठोक डाले, जिसमें दो शतक शामिल थे. इसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ 2 मैचों की टेस्ट सीरीज में गंभीर ने 361 रन कूट डाले, उनका औसत 90 से ज्यादा रहा.

न्यूजीलैंड दौरे पर खुद को किया साबित
किसी भी भारतीय बल्लेबाज के लिए न्यूजीलैंड की पिचों पर खेलना कभी आसान नहीं रहा लेकिन गौतम गंभीर ने न्यूजीलैंड दौरे पर भी 89 की औसत से 445 रन बना डाले. इस दौरे पर गंभीर (Gautam Gambhir) ने 2 शतक और एक अर्धशतक लगाया. गंभीर ने इस दौरान नेपियर में 436 गेंदों में 137 रनों की पारी खेली. नेपियर टेस्ट की दूसरी पारी में गंभीर ने 643 मिनट तक बल्लेबाजी की. भारतीय क्रिकेट इतिहास में कभी कोई क्रिकेटर दूसरी पारी में इतनी देर तक क्रीज पर नहीं टिक सका. गंभीर की इस पारी ने उन्हें एक अलग पहचान दी.

खत्म होने वाला था वीरेंद्र सहवाग का करियर, इस एक फैसले ने बदल दी जिंदगी
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज