इन 5 कारणों से रवि शास्त्री को फिर चुना गया विराट कोहली एंड टीम का हेड कोच!

इन 5 कारणों से रवि शास्त्री को फिर चुना गया विराट कोहली एंड टीम का हेड कोच!
रवि शास्त्री 2021 तक रहेंगे कोच

कपिल देव (Kapil Dev) की अगुआई वाली क्रिकेट सलाहकार समिति (Cricket Advisory Committee) ने रवि शास्त्री (Ravi Shastri) को टीम इंडिया के हेड कोच पद पर बरकरार रखा

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 17, 2019, 7:44 AM IST
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रवि शास्त्री (Ravi Shastri) को एक बार फिर टीम इंडिया ( Team India) के हेड कोच पद पर बरकरार रखा गया है. रवि शास्त्री को अगले दो सालों के लिए यानी 2021 तक हेड कोच चुना गया है. मुंबई में कपिल देव की अगुआई वाली क्रिकेट सलाहकार समिति (Cricket Advisory Committee) ने रवि शास्त्री के नाम का ऐलान किया. कपिल देव ने कहा कि न्यूजीलैंड के माइक हेसन और पूर्व ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर टॉम मूडी ने रवि शास्त्री को कड़ी टक्कर दी. आखिर क्यों रवि शास्त्री ने माइक हेसन और टॉम मूडी को कोच पद की रेस में हरा दिया, आइए आपको बताते हैं इसकी 5 वजह.

1. विराट कोहली का समर्थन- रवि शास्त्री के हेड कोच पद पर बरकरार रहने की सबसे बड़ी वजह विराट कोहली का समर्थन रहा. विराट कोहली ने वेस्टइंडीज रवाना होने से पहले रवि शास्त्री के समर्थन में बयान दिया था. विराट ने कहा था कि टीम इंडिया के सभी खिलाड़ी रवि शास्त्री को कोच बनाए रखने के पक्ष में हैं.

2. ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक सीरीज जीत- रवि शास्त्री की कोचिंग में ही टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीती. भारत ने ऑस्ट्रेलिया दौरे पर 2-1 से सीरीज अपने नाम की थी.



3. शानदार टेस्ट रिकॉर्ड- रवि शास्त्री की कोचिंग में टीम इंडिया का टेस्ट रिकॉर्ड जबर्दस्त रहा. भारत ने 21 में से 11 टेस्ट जीते. 7 मैच में भारतीय टीम को हार मिली और 3 मैच ड्रॉ रहे.
विराट कोहली और रवि शास्त्री


4. वनडे में भी बेहतरीन रिकॉर्ड- रवि शास्त्री के कोच रहते भारतीय टीम ने 63 में से 45 मैच जीते और महज 15 में उसे हार मिली. वनडे में भारत का जीत प्रतिशत 71.4 फीसदी रहा.

5. अंशुमन गायकवाड़ का समर्थन- क्रिकेट एडवाइजरी कमेटी के सदस्य अंशुमन गायकवाड़ ने भी रवि शास्त्री का खुले तौर पर समर्थन किया था. अंशुमन ने रवि शास्त्री को चुनने के बाद बयान दिया कि वो टीम को जानते हैं, हर खिलाड़ी को जानते हैं, भारतीय क्रिकेट टीम के सिस्टम को जानते हैं. जबकि दूसरे दावेदारों को एक नई शुरुआत नहीं करनी पड़ती.

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