विराट कोहली की 'जिद' ने न्यूजीलैंड में किया टीम इंडिया को शर्मिंदा

विराट कोहली की 'जिद' ने न्यूजीलैंड में किया टीम इंडिया को शर्मिंदा
विराट कोहली ने ट्विटर पर अपनी प्रोफाइल फोटो बदल दी है

वेलिंगटन टेस्ट (Wellington Test) में दस विकेट की शर्मनाक हार के बाद क्राइस्टचर्च (Christchurch) में भी टीम इंडिया (Team India) को न्यूजीलैंड (New Zealand) के हाथों सात विकेट से हार का सामना करना पड़ा.

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क्राइस्टचर्च. बांग्लादेश के खिलाफ दो, वेस्टइंडीज के खिलाफ दो और साउथ अफ्रीका के खिलाफ तीन मैचों की टेस्ट सीरीज जीतकर वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का बेहतरीन आगाज करने वाली भारतीय क्रिकेट टीम (Indian Cricket Team) की न्यूजीलैंड (New Zealand) में पोल खुल गई. दुनिया की नंबर वन टेस्ट टीम न्यूजीलैंड के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज की चार पारियों में से केवल एक बार 200 रनों का आंकड़ा छू पाई. वेलिंगटन (Wellington) में खेला गया पहला टेस्ट करीब तीन दिन हारने के बाद विराट कोहली (Virat Kohli) की टीम इंडिया ने क्राइस्टचर्च टेस्ट (Christchurch) में तो सिर्फ ढाई दिन में ही घुटने टेक दिए. यूं तो इस शर्मनाक प्रदर्शन की कई वजह हैं, लेकिन सबसे बड़ी वजह है टीम इंडिया (Team India) के कप्तान विराट कोहली की जिद, जिसकी वजह से टीम इंडिया को न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे और टेस्ट सीरीज में शर्मिंदा होना पड़ा.

1. साहा की जगह पंत : विराट कोहली (Virat Kohli) का सबसे अजीबोगरीब फैसला ऋद्िधमान साहा की जगह ऋषभ पंत (Rishabh Pant) को मौका देने का रहा. वो भी बड़े अटपटे तर्क के साथ. तर्क ये कि मौजूदा समय में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ विकेटकीपरों में शुमार साहा की विकेटकीपिंग भारत में तो अच्छी है, लेकिन विदेशी जमीन पर पंत की बल्लेबाजी को तरजीह दी जा रही है. जबकि इस बात में कोई शक नहीं है कि साहा निश्चित रूप से पंत से बेहतर विकेटकीपर हैं. अब सवाल ये उठता है कि क्या पंत तकनीकी रूप से साहा से बेहतर बल्लेबाज हैं? इसका जवाब भी न में है. तो फिर क्यों विकेटकीपर को रखने के मामले में विकेटकीपिंग को तरजीह न देकर बल्लेबाजी को तरजीह दी गई. अगर पंत को खिलाना ही था तो विराट के पास टी20 सीरीज में अजेय बढ़त बनाने और वनडे सीरीज में पिछड़ने के बाद पंत को खिलाने का मौका था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया.

2. प्लेइंग इलेवन में कंफ्यूजन : इस बात में कोई संदेह नहीं है कि विराट कोहली (Virat Kohli) दुनिया के बेहतरीन बल्लेबाजों में शुमार हैं, लेकिन क्या वे चतुर कप्तान हैं, इसे लेकर ये बात नहीं कही जा सकती. वो इसलिए क्योंकि प्लेइंग इलेवन (Playing Eleven) में उन्हें कौन से खिलाड़ी चाहिए, शायद उन्हें खुद ये बात नहीं पता. यही वजह है कि कभी उन्हें तकनीकी रूप से सशक्त शुभमन गिल (Shubhman Gill) की जगह पृथ्वी शॉ (Prithvi Shaw) के रूप में आक्रामक ओपनर चाहिए तो कभी उन्हें रविचंद्रन अश्विन (Ravichandran Ashwin) से बतौर बल्लेबाज अधिक अपेक्षाएं हो जाती हैं. यही वजह रही कि वेलिंगटन की ग्रीन टॉप पिच पर तीन विकेट लेने वाले अश्विन को सिर्फ इसलिए दूसरे टेस्ट से बाहर कर दिया गया क्योंकि उन्होंने बल्लेबाजी में रन नहीं बनाए थे. अब विराट को कौन समझाए कि अगर गेंदबाज ही शतक लगाने लगेंगे तो बल्लेबाजों का टीम में क्या काम रह जाएगा.



3. पुजारा का आत्मविश्वास तोड़ा : एक कप्तान को हमेशा अपने खिलाड़ियों के साथ खड़े रहना चाहिए. मगर विराट कोहली (Virat Kohli) इस मामले में उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे. वेलिंगटन टेस्ट में जब चेतेश्वर पुजारा (Cheteshwar Pujara) न्यूजीलैंड के घातक तेज गेंदबाजी आक्रमण के सामने डटकर खड़े थे तो विराट कोहली को ये बात नागावार गुजरी कि आखिर पुजारा तेजी से क्यों नहीं खेल रहे हैं. उन्होंने सार्वजनिक तौर पर पुजारा की धीमी बल्लेबाजी पर निशाना साधा. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर आपको टेस्ट मैच में कैसे बल्लेबाज चाहिए, ऐसे जो आपके लिए विकेट गिरने के सिलसिले को रोक सकें या ऐसे जो दो-तीन चौके जड़कर आउट हो जाएं. विराट को शायद ये बात समझने में मुश्किल आ रही है कि पुजारा टीम में अपनी इसी बल्लेबाजी शैली की वजह से हैं, जिस पर भारतीय कप्तान ने सवाल खड़े किए हैं. और फिर विराट की ऐसी आक्रामकता भी किस काम की, जो टीम के किसी काम न आ सके.
4. इशांत के करियर से खिलवाड़ : तेज गेंदबाज इशांत शर्मा (Ishant Sharma) को रणजी ट्रॉफी मैच के दौरान चोट लग गई थी. उन्हें छह हफ्ते के आराम की सलाह दी गई, लेकिन बावजूद इसके उन्हें न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज का हिस्सा बनाया गया. अनफिट खिलाड़ियों के साथ मैदान पर उतरकर आखिर विराट कोहली (Virat Kohli) किसका भला कर रहे थे. कम से कम भारतीय टीम और इशांत शर्मा का तो बिल्कुल नहीं.

5. जबरदस्ती की आक्रामकता : विराट कोहली (Virat Kohli) की गिनती दुनिया के सबसे आक्रामक खिलाड़ियों में होती है. वे हर समय मैदान पर जरूरत से ज्यादा उत्साह में नजर आते हैं. मगर जब टीम को उनकी आक्रामकता की जगह धैर्य की जरूरत थी तो वे अपेक्षाओं पर खरे उतरने में नाकामयाब रहे. जब उन्हें क्रीज पर टिककर शांत मन से खेलने की जरूरत थी तो वे जरूरत से ज्यादा आक्रामकता दिखाने से बाज नहीं आए और इसका खामियाजा न केवल उन्हें बल्कि टीम इंडिया को भी भुगतना पड़ा.

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